भोले लड़के ने माँ के साथ सेक्स किया

माँ ने बिस्तर लगाया और मच्छरदानी लगा दी, ताकि हमें मच्छर ना काटें.

माँ बोली- बेटा पंखे को सामने रख दे और तार लगा कर स्विच ऑन कर देना ताकि लाइट जब आए, तो पंखा चालू हो जाए.
मैंने पंखे को पैरों की ओर रख कर उसे सैट कर दिया और सो गया.
तब तक माँ भी सो चुकी थीं.

रोजाना की तरह पेशाब के कारण मुझे नंगा ही सोना पड़ता था, तो मैं माँ के पास आकर सो गया. माँ ने भी रोजाना की तरह साड़ी निकाल दी थी.

माँ सो गईं, कुछ घंटों बाद लाइट आ गयी, तो मेरी नींद खुल गयी. पंखा चालू हुआ, तो हवा से माँ का पेटीकोट ऊंचा हो गया. उनका पेटीकोट पेट के ऊपर चढ़ गया. तो मैंने देखा कि माँ तो नीचे से पूरी नंगी हो गयी थीं.

आज पहली बार मैं अपनी माँ को नंगी देख रहा था मगर मुझे कुछ समझ नहीं थी. मैंने देखा कि माँ की चूत पर तो जैसे बारिश हो गयी हो, इस तरह से पसीना पसीना हो रहा था. तब मुझे याद आया कि कल रात पिताजी ने माँ की चुत से इसी पसीने को चाटा था.

मैंने सोचा कि आज पिताजी नहीं हैं, तो क्यों ना मैं ही माँ की चुत चाट कर साफ कर दूं. बस मैं खड़ा हो कर माँ के करीब लेट गया. मैंने माँ को मैंने जगा कर उनसे पूछने की कोशिश की, मगर माँ गहरी नींद में सोई हुई थीं, तो माँ जागी ही नहीं.

मैं माँ की टांगों के बीच में आकर माँ की चुत को चाटने लगा और उनकी चूत का सारा पसीना चाट चाट कर साफ़ कर दिया.

मगर अब परेशानी ये थी कि माँ की चूत में से और पानी आने लगा. अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. फिर सोचा कि माँ को गर्मी लग रही होगी, इसलिए पानी तो साफ़ करना ही पड़ेगा. तो मैं एक बार फिर से माँ की चुत चाटने लगा. तब मुझे कुछ चुत से निकला हुआ पानी का स्वाद नमकीन सा लगा. मुझे अब मज़े आने लगे थे और मैं माँ की चुत से नमकीन पानी पिए जा रहा था. तभी मुझे याद आया कि मेरे दोस्त ने जो मुझे वीडियो दिखाया था, उसमें एक आदमी अपना बड़ा सा लंड चुत में फंसाता है.

तब मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी ऐसा ही करूं. मेरा लंड तो, माँ की चुत चाट चाट कर यूं भी खड़ा हो गया था.

मैंने अपना खड़ा लंड माँ चुत पर रखा और अन्दर डाला, तो मेरा लंड माँ की चुत में सट से चला गया. माँ की चुत तो पानी निकलने के कारण पहले से ही पूरी चिकनी हो गयी थी.

मुझे भी लंड पेलने में मजा आ रहा था. मैं धीरे धीरे में माँ को चोदने लगा. मुझे वाकयी बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ देर माँ की चुदाई करके मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया. मैंने देखा कि माँ की चुत में तो मानो बाढ़ सी आ गयी थी. उनकी चूत मेरे पानी निकल जाने से इस तरह से पानी पानी हो रही थी कि मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं. जब कुछ समझ नहीं आया, तो मैंने सोचा कि मैंने ही ये पानी माँ की चुत में छोड़ा है, तो मैं ही इसे साफ़ कर देता हूँ. फिर मैंने माँ की चुत चाटना शुरू की और सारा पानी पी गया.

अब मैं थक चुका था, तो मैं सो गया. अगले दिन भी पिताजी नहीं आए, तो मैं इस बात से बहुत खुश हुआ. मैं आज फिर से बेसब्री से रात होने का इंतज़ार करने लगा. जैसे ही रात हुई, हम सोने गए.

माँ ने कहा- बेटा, रात को तो बहुत गर्मी हो रही थी.
मैंने कहा- माँ आप सो जाओ, मैं पंखा आपकी तरफ कर देता हूँ.

माँ पंखे के सामने ही सोई हुई थीं. मैंने पंखा चालू किया, तो माँ ने कहा- बेटा मुझे हवा नहीं लग रही है.

मैंने टेबल फैन को नीचे करके जैसे ही चालू किया, तो माँ का पेटीकोट फिर उड़ कर पेट पर चढ़ गया.

मैं पास में हो गया और माँ की चुत पर हाथ रख कर कहा कि माँ रात को इसमें से बहुत पसीना आ रहा था, तो मैंने इसे चाट चाट कर साफ़ किया था.
माँ मेरी बात सुनते ही घबरा सी गयी और वो अपने पेटीकोट को नीचे करके बोलीं- क्या? तूने सच में मेरी चुत को चाटा था?
मैंने कहा- हां माँ … मैंने आपको जगाने की कोशिश भी की थी, मगर आप जागी नहीं, तो मैंने भी पिताजी की तरह आपकी चुत को चाटा और मेरा लंड भी मैंने इसमें डाला था.
माँ ने भौंचक्का होते हुए कहा- बेटा, ये बात किसी को ना बताना.
मैंने कहा- ठीक है माँ, मगर मुझे आपकी चुत का पानी चाटना है, मुझे बहुत अच्छा लगा था.
माँ ने कहा- नहीं बेटा तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए.
मैंने कहा- पिताजी भी तो आपकी चुत चाटते हैं, तो मुझे भी आपकी प्यारी सी चुत को चाटनी है.
माँ ने मुझसे कहा- बेटा तुम अभी छोटे हो, सो जाओ.

पता नहीं माँ मुझे उनकी चुत क्यों नहीं चाटने दे रही थीं, मगर मुझे तो माँ की चुत का स्वाद बहुत ही नमकीन लगा था. तो मैं माँ के सोने का इंतज़ार करने लगा.

माँ के सोते ही मैंने मा का पेटीकोट ऊंचा किया और चुत को चाटने लगा. धीरे धीरे माँ की चुत से पानी आने लगा. मैंने खूब जोरों से माँ की चुत का रसपान किया और इसके बाद लंड पेल कर माँ को चोद दिया.

अब मैं रोजाना माँ के सोने के बाद माँ की चुत भी चाटता हूँ और लंड भी डाल देता हूँ.

आप मेरी इस माँ सेक्स की कहानी को पढ़कर मुझे ज़रूर बताएं कि आपको कहानी कैसी लगी.

Pages: 1 2