जवानी की प्यास ने क्या करवा दिया

ऐसे ही मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो गयी और वापिस अपने घर आ गया।
एक महीना भी नहीं बीत पाया पर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने छाया को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसे किसी शादी में जाना है इसीलिए आज नहीं कर पायेगी और न ही आज उसकी कोई सहेली से मिलवा पाएगी।

मैं दुखी मन से हाथ से करने के लिए बाथरूम में जा रहा था तो देखा कि मेरी माँ सज रही थी कहीं जाने के लिए। मेरी माँ बिल्कुल घरेलू महिला थी। सिर्फ घर के काम करती थी और दिन में सोया करती थी। मुझे अपने बाप से जलन हो रही थी कि इस क़यामत औरत को बेकार कर दिया। ऐसी औरत तो दिन रात चुदाई के लिए होती है पता नहीं मेरे पापा खुद को कैसे रोकते होंगे।

खैर ये सब सोचते हुए मैंने माँ से पूछा- कहाँ जा रही हो?
वो बोली कि हर रोज़ किसी न किसी रिश्तेदार की शादी है तो आज तुम्हारे पापा नहीं जा पाएंगे इसीलिए उन्होंने हम दोनों को साथ जाने के लिए बोला है।
मेरा मन नहीं था पर कार मुझे ही चलानी थी इसीलिए मैं भी तैयार हो गया माँ के साथ जाने के लिए।

शादी रोहिणी में मेरी बुआ की लड़की पूजा की थी। मैं अपने ज़्यादा रिश्तेदारों को नहीं जानता था इसीलिए मैं वहाँ पर एक साइड में बैठ गया और मेरी माँ सब लोगों से मिलने लगी।

अचानक पीछे से किसी ने मेरी आँखों को बंद कर दिया। वो मुलायम हाथ इतने खुशबूदार थे कि मेरे शरीर में गुदगुदाहट होने लगी। मैं नहीं जानता था कि किसने मेरी आँखें बंद की थी पर मैं जल्दी से जल्दी उस मुलायम हाथों की मालकिन को देखना चाहता था।
तभी आवाज़ आयी- मेरा पीछा करते करते यहाँ तक क्यों आ गए?

छाया!
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
यह छाया थी जिसने मेरी आँखें बंद की थी। मैं खड़ा हुआ उसे गले लगाने के लिए पर उसने बोला- यहाँ सब जानते हैं, बाहर चलते हैं।

मैं उसे लेकर अपनी कार में आ गया और उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया।
पर उसने कहा- यह सही वक्त और सही जगह नहीं है. और तुम्हारे लिए खुशखबरी है। मेरे दूर के रिश्ते की भाभी तुमसे चुदने के लिए बेताब है पर वो 5000 से ज़्यादा रुपये नहीं दे पाएगी। जब लन्ड में आग लगती है तो पैसा दिखता ही नहीं और वैसे भी मैं किस्मत वाला हूँ जिसे चूत मारने के पैसे मिलते हैं। नहीं तो लोग तो पैसे देकर भी ठीक से नहीं चोद पाते।

मैं तैयार था तो उसने बोला कि वो उसे लेकर एक घंटे बाद अपने घर पर मिलेगी।
मैंने मम्मी को फ़ोन किया और बताया कि मेरे कॉलेज के दोस्त यहाँ पास में रहते है उनके पास जा रहा हूँ थोड़ी देर में आऊंगा।
मम्मी भी किसी रिश्तेदार के साथ मार्किट जा रही थी तो उन्होंने भी मना नहीं किया।

मैं जब एक घंटे उसके घर पहुँचा तो छाया ने गेट खोला और मुझसे कहा कि तेरी आज की बेगम बैडरूम में तेरा इंतज़ार कर रही है। पर उसने आज तक अपने पति के अलावा किसी से नहीं किया तो शर्माती है और बोल रही है कि लाइट न नहीं करेंगे अंधेरे में करना होगा।

पहले तो गुस्सा आया- कौन इतनी शर्त मानेगा. उसे भगाते हैं, हम दोनों करते हैं.
तो छाया बोलने लगी- हम तो हमेशा करते ही हैं. भाभी पहली बार बोल रही है तो आज कर लो।

मैं बैडरूम में गया तो लाइट बन्द थी। मैं ऊपरी मन से उसकी भाभी की बगल में लेटा और साड़ी उठा कर सीधा उसकी चूत छेड़ने लगा। वो कोई भाव नहीं दे रही थी, बस चूत छूते ही उन्होंने अपनी टाँगों को चिपका लिया जिससे मैं ठीक से चूत का नाप नहीं ले पाया।

मेरा मन नहीं कर रहा था उसके साथ करने का इसीलिए मैंने समय बर्बाद न कर के सीधा लौड़ा उनकी चूत में डालने की सोची और अपने कपड़े उतारने लगा कि जल्दी से इसे चोद कर भेज दूंगा फिर छाया को चोदूँगा।

मैंने अपना लौड़ा उस भाभी की गीली चूत पे लगाया और धक्का दिया। उसकी गीली चिकनी चूत बहुत टाइट थी इसलिए मुझे थोड़ी ताकत लगानी पड़ी। अभी सिर्फ टोपा ही अंदर गया था कि वो भाभी दर्द से चिल्ला उठी।
मेरे हाथ उसके गाल सहला रहे थे जो मुझे उनके आंखों से निकलने वाले आंसुओं का अहसास करवा रहे थे। मुझे लगा नई शादीशुदा लड़की है जिसका पति ठीक से संतुष्ट नहीं कर पाता इसीलिए इतनी टाइट चूत है।

मैंने थोड़ा सा सहलाते हुए उनके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और सोच रहा था कि मैं फालतू में छाया की चूत के बारे में सोच रहा था। इतनी टाइट चूत रोज़ मिलने लगे तो छाया का क्या करूँगा।
उसके मम्मे मेरी छाती को छू रहे थे और मैं उनकी गोलाई और मोटाई दिमाग में नाप रहा था। मैं उनके बदन की गर्मी और आकार को महसूस कर रहा था जो मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था।

मैंने दोबारा धक्का दिया और इस बार आधे से ज़्यादा लन्ड अंदर चला गया।
उम्म्ह… अहह… हय… याह…
पहली बार उसकी आवाज़ सुनाई दी मुझे … वो दर्द से चिल्लाने की आवाज़ थी। वह दर्द में भी बहुत मादक आवाज़ थी। पर आवाज़ इतनी तेज थी कि छाया बैडरूम में आ गयी और गेट खटखटाने लगी- भाभी ठीक हो न? क्या हुआ?
उन्होंने मुझे धक्का दिया और गेट के पास जाकर धीरे से कहा- मैं ठीक हूँ, आप जाओ।

खिड़की से निकली हल्की रोशनी में मुझे चेहरा तो नहीं दिखा पर उसके शरीर के उभार समझ में आ रहे थे। छाया से बहुत खूबसूरत शरीर था उसका और उतनी ही मादक आवाज़ थी। खैर, मुझे यह तो पता चल चुका था कि भाभी जी खुश हैं मेरे लौड़े से!

तो मैं उनके पास गया और उनके होंठों को चूसने लगा। वो भी पूरी तरह गर्म थी जो उनकी सांसें मुझे मुझे बता रही थी।

अचानक से वो नीचे बैठी और मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी। पर वो ठीक से मुंह में नहीं ले पा रही थी क्योंकि मेरा लौड़ा उनकी उम्मीद से बड़ा था। मैंने उन्हें खड़ी किया और दीवार के सहारे लगा दिया।
इस बार मैंने कोई रहम न दिखाते हुए पूरा लौड़ा एक बार में डाल दिया।

वो काँप उठी पर चिल्लाने की जगह अपनी चूत आगे करके मेरा साथ देने लगी। इतनी टाइट चूत होने की वजह से मैं जल्दी ही चरम सीमा पर पहुंच गया और पानी छोड़ने के लिए जैसे ही अपना लौड़ा बाहर निकाला तो वह समझ गयी और मुँह में पानी लेने के लिए झुक गयी।
दिखा तो नहीं पर पहली धार उसकी छाती पर गिरी होगी और अगली धार तक वह मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले चुकी थी।

अब वो पहले से ज़्यादा खुल चुकी थी और आधे से ज़्यादा लन्ड को मुँह में ले रही थी। उसके मुँह की गर्मी ने तुरंत ही मेरे किंग को किंग साइज का बना दिया। मैंने उसे खड़ा किया और फिर से दीवार पे लगा दिया. पर इस बार मैंने उसकी पीठ अपनी तरफ की, पीछे की तरफ से उसकी चूत में अपना लौड़ा डालने लगा।

वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, वो दबी आवाज़ में आह … आ…ह की आवाज़ निकाल रही थी। उसकी गोल मोटी गांड मेरे शरीर से टकरा कर मुझे और तेज़ धक्के लगाने के लिए मजबूर कर रही थी।
मैंने एक हाथ में उसके बाल पकड़े हुए थे और मेरा दूसरा हाथ उसके चुचों को गोलाई नाप रहा था कि तभी भाभी की शरीर अकड़ने लगा। उन्होंने अपनी गांड मेरी तरफ तेज़ी से धकेली। ऐसा लग लन्ड के साथ दोनो गोटियां भी अपने अंदर ले लेंगी। इतनी टाइट चूत और उनकी इस हरकत ने मुझे भी पानी छोड़ने को मजबूर कर दिया। मैं उनकी पीठ से चिपक गया और उनको दोनो चुचे अपने हाथ में कैद कर लिए।

फिर वो कपड़े पहनने लगी। मेरा मन अभी और कर रहा था, मैं इस भाभी को जाने नहीं देना चाहता था। पर उनकी शायद छाया से सिर्फ एक बार पानी निकालने की बात हुई थी। मैं भी कपड़े पहन रहा था.
इतनी देर में वो गेट खोल कर बाहर चली गयी।

तब तक छाया आ गयी और बोली- मैं भाभी को छोड़ने जा रही हूँ। तुम जहाँ शादी है, वहाँ ही मिलना।

मैंने टाइम देखा शाम के 6:30 बज चुके थे। मम्मी का फ़ोन भी आ सकता था तो मैंने छाया के होंठ चूमते हुए कहा- हम कल ही मिल पाएंगे अब।
पर छाया भी उत्तेजित हो चुकी थी हमारी चुदाई की आवाज़ सुन कर … तो मैंने कहा- रात में टाइम मिला तो आ जाऊँगा।

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