चुदक्कड़ भाभी और अनाड़ी देवर का कड़क लंड

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम आयुष है. मैं ग्वालियर मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ. यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है, अगर कोई ग़लती हो … तो माफ़ करना.

सभी भाभियों और कुंवारी लड़कियों को मेरा खड़े लंड से नमस्कार. मेरी उम्र 32 साल है और मेरी बीवी की 30 साल है. मेरे लंड का साइज़ साढ़े छह इंच है. मैं जबरदस्त चुदाई करता हूँ. इस कहानी में आपको मेरे पहले सेक्स कहानी बड़ी भाभी के साथ चुदाई की पढ़ने को मिलेगी, इसलिए आप अपने लंड को थाम कर तैयार रहिए. लड़कियां भी अपनी चूत में उंगली या खीरा वगैरह डाल कर मजा ले सकती हैं.

मैंने अपनी बड़ी भाभी को अठारह साल की उम्र में चोदा था, तब से अभी तक बहुत औरतों को चोद चुका हूँ. उन सभी चुदाइयों की कहानी मैं बाद में लिखूंगा.

मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई गांव में रहकर की है. वहां पर मेरे ताऊ के चार लड़के और उनकी दो बहुएं रहती हैं. ये कहानी उनकी बड़ी बहू की है, जिनको मैंने चोदा था. हम सब जॉइंट फैमिली में रहते हैं.

यह बात तब की है, जब मैं पूरा जवान हो गया था और स्कूल में पढ़ता था. मेरी बड़ी भाभी थोड़ी सांवली हैं, लेकिन छोटी भाभी बहुत गोरी हैं. बड़ी भाभी भले ही सांवली हैं, लेकिन वो बहुत सेक्सी हैं. उनका फिगर 34-28-36 का रहा होगा. वो इतनी अधिक चुदक्कड़ हैं कि अगर किसी दिन वो ना चुदें, तो उनको चैन नहीं आता था. मैं अक्सर उनकी चुदाई की सिसकारियां उनके रूम से सुनता था. तब मेरा मन उनकी चुदाई देखने का बहुत करता था. आख़िर भगवान ने एक दिन मेरी सुन ली और मुझे उनकी चुदाई देखने का मौका मिल गया.

उस दिन इंडिया का मैच आ रहा था. मैं उनके रूम में टीवी देख रहा था. लेकिन भाभी को चुदास लगी थी. वो मुझसे बार बार पूछ रही थीं- कब तक देखोगे, टीवी बंद कर दो.
कुछ देर बाद जब मैच ख़त्म हो गया, तो मैं वहां से आ गया. उनके रूम के बाहर ही आंगन में मेरा बिस्तर लगा था, तो मैं वहीं लेट गया.

मेरे लेटते ही भाभी ने भैया को अन्दर ले लिया और गेट लगा लिया. थोड़ी देर बाद उनकी चूड़ियों और पायलों की झनकार मुझे सुनाई देने लगी. मैं समझ गया ज़रूर भाभी अन्दर चुद रही होंगी. मेरी नींद उड़ गई और मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं उनकी चुदाई देखने के लिए उनके गेट पर खड़ा हो गया.

मैं गेट की झिरी में से झाँक कर देखा, तो आआआअ हह ओह हाय क्या नज़ारा था अन्दर का … भाभी ज़मीन पर दोनों पैर हवा में उठाए हुए खोल कर चित लेटी थीं और भैया उनके ऊपर चढ़े थे. भैया का लंड भाभी की चूत में था. भाभी की दोनों टांगें हवा में लहरा रहीं थीं. भाभी के दोनों पैर ठीक दरवाजे के सामने थे, जिससे उनकी चूत में लंड साफ़ साफ आता जाता हुआ दिख रहा था. जिंदगी में पहली बार किसी को ऐसे चुदते हुए देखा था, तो दिल जोर जोर से धड़क रहा था. लंड में जोश ही जोश भरा हुआ था.

ऊओह क्या बताऊं दोस्तो … क्या रंगीन नज़ारा था. उस अनुभव को शब्दों में कह पाना मुश्किल था. जैसे ही भैया जोर से कमर से शॉट मारते, लंड घप से भाभी की चूत में घुस जाता और भाभी के मुँह से जोरदार आह निकलती और पायल की आवाज़ आती. उस समय भाभी के चेहरे पर दर्द और मज़े की अलग ही झलक दिखती. हर झटके पर उनका मुँह खुला का खुला रह जाता.

भाभी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ ऐसे चीख रही थीं. उधर भाभी चुद रही थीं, इधर मेरी हालत खराब हो रही थी. जब तक भाभी की चुदाई चली, तब तक मेरा दो बार पानी निकल चुका था. जब भैया का पानी भाभी की चूत में निकल गया, तो भाभी शांत पड़ी रह गईं और भैया उनके ऊपर से हट गए.

भाभी ऐसे ही टांगें फैलाए लेटी थीं. मुझे उनकी चूत साफ़ साफ दिख रही थी. उनकी चूत से भैया का पानी बह रहा था और भाभी की सांसें फूल रही थीं. दिल कर रहा था कि मैं उनके ऊपर चढ़ जाऊं. लेकिन फिर मैंने देखा भाभी उठी ही नहीं, यूं ही चूत पसारे लेटी ही रहीं.

फिर कुछ देर बाद भैया ने उनको हाथ पकड़ कर उठाया, तो मैं समझ गया कि भाभी की चूत कुछ ज्यादा ही चुद गई थी, जिससे भाभी चल नहीं पा रही थीं. फिर दोनों बाहर आने के लिए कपड़े पहन कर खड़े हो गए.

मैं जल्दी से अपने बिस्तर पर आकर लेट गया और आंखें बंद कर लीं, जिससे उनको लगे मैं सो रहा हूँ.

ये गर्मी का समय था, इसलिए सब लोग बाहर ही सोते थे. भाभी की चारपाई मेरे बगल में ही बिछी थी. उसके बाद भैया नीचे ज़मीन पर सो गए. हम सब आंगन में ही सोते थे.

चुदी हुई भाभी मेरे बगल में आकर सो गईं, लेकिन मेरी आंखों से नींद कोसों दूर थी.

जब रात के डेढ़ बजे, तो सब लोग गहरी नींद में थे. भाभी भी सो रही थीं. मैंने सोचा भाभी तो चुद कर थक गई हैं, इसलिए मैंने धीरे से भाभी के ऊपर हाथ फेरना चालू किया. जब कुछ हरकत नहीं हुई … तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने धीरे धीरे भाभी की साड़ी उनके पैरों से ऊपर खिसकाना चालू की. जब पूरी टांगें नंगी हो गईं, तो मेरे हाथ कांप रहे थे. ये सब मेरी लाइफ में पहली बार हो रहा था. जब उनकी चूत मेरे सामने आई.

ओह हाय क्या बताऊं … क्या नज़ारा था कितनी मुलायम रबड़ी सी चूत भाभी बिल्कुल खुली पड़ी थी. उनकी चूत पर हल्के बाल भी थे. मैंने भाभी की चूत पर हाथ फेरना चालू किया और फिर धीरे से एक उंगली उनकी चूत में सरका दी. बड़ी ही रसीली और चिकनी चूत थी. बड़े आराम से सुप्प से मेरी उंगली उनकी चूत में चली गई.

फिर जब मेरी हिम्मत और बढ़ी, तो मैंने भाभी की चुत में अपनी दो उंगलियां अन्दर कर दीं और उनको अन्दर बाहर करने लगा. मैं बहुत देर तक बड़ी भाभी की चूत में दोनों उंगलियां चलाता रहा और अपना लंड हिलाता रहा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. भाभी के पैर धीरे धीरे खुलते जा रहे थे, उनकी चूत रस से भीग चुकी थी. मेरी दोनों उंगलियां सटासट अन्दर बाहर हो रही थीं.

लेकिन तभी अचानक से भाभी उठ कर बैठ गईं. मेरी तो हालत खराब हो गयी और मैं जल्दी से अपने बिस्तर में लेट गया. मैं धड़कते दिल से चुपचाप सो गया. सुबह भाभी बहुत गुस्से में थीं. मैं उठ कर सीधा घर से बाहर निकल गया और अपने चाचा के घर चला गया. मैंने खाना भी वहीं खाया, वहीं बना रहा.

मैं चार दिन तक घर ही नहीं आया. मेरी डर के मारे भाभी के सामने आने की हिम्मत नहीं हो रही थी.

जब कुछ समय बीता, तो कुछ सामान्य हुआ. उस दिन मैं जब चाची के यहां नहा रहा था, तो भाभी छत पर आईं.
भाभी मुझसे बोलीं- क्यों … घर क्यों नहीं आ रहे हो?
तो मैंने कुछ नहीं कहा.
भाभी फिर से बोलीं- घर आओ तुमसे बात करनी है.

मैं डरते हुए घर गया. जब भाभी के पास गया तो भाभी बोलीं- इतना क्यों डर रहे हो, मैंने तुमसे कुछ कहा क्या?
तो मुझे थोड़ी राहत की सांस मिली.

फिर मैं घर रहने लगा. लेकिन भाभी को चोदने की तड़प अब और बढ़ गई थी.

आख़िर वो दिन भी आ गया, जब भाभी की चूत से मेरे लंड का मिलन हुआ.

वो एक तूफ़ानी रात थी. मैं उस दिन भाभी के रूम में उनके बेड पे लेटा हुआ टीवी देख रहा था. फिर अचानक मेरी आंख लग गई और टीवी देखते हुए मुझे नींद आ गई. सच में दोस्तो, ये कोई बहाना नहीं था, आज मुझे हक़ीकत में नींद आ गई थी. मेरी किस्मत थी कि मैं भैया के बेड पर ही सो गया. भाभी बगल में चारपाई पर लेट गईं, जिससे भैया बाहर जाकर और लोगों के साथ सो गए. मेरी किस्मत देखो उस दिन भाभी के साथ में उनके ही रूम में सो रहा था. रात को जब बादल गरजे और आंधी सी आई, तो मेरी आंख खुल गई.

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