प्यारी दीदी और उनके पति की चुदाई स्टोरी

हेलो फ्रेंड्स, मई अरमान वापस आ गया हुआ अपनी कहानी का अगला पार्ट लेके. जिसने भी इसका पिछला पार्ट नही पढ़ा है, वो पहले पिछला पार्ट पढ़े. ताकि आपको कहानी आचे से समझ मे आए.

मासूम बहन का अमीर पति और उसका छोटा लंड



सो अब सीधा स्टोरी स्टार्ट करते है. पहले वाले पार्ट मे मई बहुत टाइम ले चुका हू आप लोगो का. खैर अब मई जगह तलाश कर रहा था, की कहा से रूम मे अंदर देखने की जगह मिल जाए. और मई पता कर साकु की अंदर से आवाज़े किस औरत की आ रही थी.

लेकिन बहुत ढूँढने के बाद बाद भी कही कुछ नही दिखा. फिर मई बाल्कनी मे आ गया और सोचने लगा जीजू के बारे मे. मुझे लग रहा था, की जीजू मेरी बेहन को धोखा दे रहे थे ओए ना-जाने किन-किन लड़कियो के साथ मज़े करते थे.

ये सोचते-सोचते मेरी वाहा एक सुराख पर मेरी नज़र पड़ी. मैने देखा, तो वो सुराख एसी की पीपे के साथ था. यानी एर-कंडीशनर लगाते वक़्त जो पीपे बाहर आती है ना, उसके लिए जो होल होता है, वो सुराख. और उसी दीवार पे एसी का आउटडोर भी था आंगल के साथ.

वो सुराख देख कर मेरे मॅन मे आया, की ज़्यादातर लोगो के बेड एसी के सामने ही होते है, तो जीजू ने भी बेड की पोज़िशन ऐसे ही रखी होगी. फिर मैने उस सुराख से अंदर देखा. अंदर मैने जो देखा, मई वो सोच भी नही सकता था. मेरी सिस्टर पूरी नंगी थी.

मुझे उसके सिर्फ़ बूब्स क्लियर नज़र आ रहे थे और वो भी झूलते हुए. दीदी की छूट जीजू के सिर की तरफ थी और दीदी का मूह जीजू के लंड के पास था. जीजू दीदी से बोल रहे थे-

जीजू: श नेहा, ज़ोर-ज़ोर से हिलाओ ना लंड को.

दीदी लंड को हिला रही थी और बहुत ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकाल रही थी-

दीदी: श आहह ऊईए डालो डालो आहह ज़ोर से डालो.

अब मुझे कुछ समझ नही आ रहा था. लंड तो दीदी सहला रही थी और आवाज़े भी दीदी की निकल रही थी. जीजू का लंड 4 इंच का था और बिल्कुल मेरे सामने था. फिर जीजू ने अपने लंड पर चढ़ाने के लिए कॉंडम पकड़ा. लेकिन जीजू का लंड तो खड़ा ही नही हो रहा था.

उधर दीदी की आवाज़े ही नही रुक रही थी.

दीदी: आ.. आ.. ओह.. प्लीज़ अंदर रखो प्लीज़ आहह.. आ…

करीब 10 मिनिट तक ये चलता रहा और फिर दीदी अकड़ गयी और ज़ोर से आहें भरने लग गयी. फिर दोनो ने पोज़िशन चेंज की. मैने देखा, की जीजू दीदी की छूट मे वाइब्रटर डाले हुए थे और दीदी अब झड़ने वाली थी. दीदी ज़ोर-ज़ोर से आवाज़े निकाल रही थी.

जीजू का लंड अभी भी खड़ा नही हो रहा था. फिर उन दोनो ने पोज़िशन चेंज की. पोज़िशन कुछ यू थी, की जीजू सीधे लेते हुए थे और दीदी घुटनो के बाल उनकी टाँगो पर बैठ कर उनका लंड हिला रही थी.

फिर करीब 5 मिनिट दीदी के हिलाने पर जीजू का लंड खड़ा हुआ और खड़ा होते ही जीजू के लंड ने पानी छोढ़ दिया. ये देख कर मई तो हैरान रह गया.

जीजू: नेहा तुम हमेशा पहले फारिघ् हो जाती हो. आज मई तुम्हारी गांद मे लंड डालता हू.

नेहा इसके लिए माना कर देती है और बोलती है-

नेहा: नही आपने एक बार पहले भी ट्राइ किया था और मुझे 7 दिन तक दर्द होता रहा था. अब इस खिलोने को रखो अपने पास.

जीजू बोले: खिलोना नही है ये. ये तो तुम्हे सुकून देने वाला औज़ार है. और जो भी चीज़ तुम्हे सुकून देती है, वो तुम्हारी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है.

फिर वो दोनो अपने कपड़े पहन-ने लगते है. मई भाग कर अपने रूम मे आ जाता हू और सोने का नाटक करता हू. रूम मे आके मई सोचता हू, की वो आदमी दीदी के काबिल नही था और दीदी तो बस उसके साथ रह कर कॉंप्रमाइज़ कर रही थी.

फिर कुछ दिन ऐसे ही रहता है. जीजू कभी लाते आते थे, तो कभी टाइम पर. लेकिन मई वाहा रोज़ जाता था और जल्दी जाता था. फिर एक दिन मई दीदी के घर लाते जाता हू और वाहा जाके देखता हू, की उनके घर का दरवाज़ा लॉक नही था.

मुझे लगा, की दीदी दरवाज़ा लॉक करना भूल गयी होंगी. फिर जब मई अंदर जाता हू, तो फिरसे वही आवाज़े आने लगती है. आवाज़े सुन कर मुझे लगता है, की जीजू तो घर पर नही थे, तो आवाज़े कैसे आ रही थी. फिर मई भाग कर उसी सुराख के पास गया और अंदर देखने लगा.

सुराख मे से जो मैने देखा, वो मई देखता ही रह गया. दीदी उसी वाइब्रटर को अपनी छूट मे डाल कर ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर कर रही थी. दीदी पूरी नंगी पड़ी हुई थी और उसका साइज़ भी पहले से काफ़ी बड़ा हो चुका था.

अब दीदी का साइज़ बूब्स का 36″, कमर का 30″ और चूतड़ का 40″ था.

दीदी: आह.. आ.. ओह… आहह..

दीदी की छूट बिल्कुल लाल हो गयी थी.

वाइब्रटर करीब 6 इंच का था, जिसमे से 5 इंच दीदी की छूट के अंदर था. दीदी की छूट मे से पूछक-पूछक की आवाज़ आ रही थी और दीदी पुर जोश मे थी. मई भी दीदी को देख कर पागल हो रहा था और मेरा लंड खड़ा हो चुका था.

कमरे मे एसी फुल था, लेकिन दीदी का पसीना उनके बूब्स से बहता हुआ सॉफ दिखाई दे रहा था. अब दीदी ने पोज़िशन चेंज की और डॉगी-स्टाइल मे आ गयी. दीदी की गांद का छेड़ छ्होटा सा था और सॉफ दिख रहा था.

मेरी नज़र दीदी की गांद के छेड़ पर थी और तभी दीदी ज़ोर से आहह.. आहह.. करके चिल्लाई. दीदी ने अपना सारा पानी बेड की चादर पर निकाल दिया और वो वाइब्रटर को छूट मे लिए हुए वैसे ही बेड पर उल्टी लेती रही.

मई समझ गया था, की दीदी झाड़ चुकी थी. मई भी झाड़ चुका था. दीदी अब बेड पर उल्टी लेती हुई थी और उनकी रंगत और बढ़ गयी थी. उनका शरीर पसीने से भरा पड़ा था और चमक रहा था.

दीदी की पतली कमर और उसके नीचे गोल-गोल चूतड़ कमाल के लग रहे थे. अभी तक दीदी ने छूट मे से वाइब्रटर नही निकाला था और अपनी गांद अभी भी थोड़ी उपर ही रखी हुई थी. फिर तकरीबन 15 मिनिट बाद दीदी उठी और वाइब्रटर छूट मे से निकाल कर सॉफ किया.

दीदी ने वो वाइब्रटर अलमारी मे रख दिया और मई वाहा से भाग कर बाहर आ गया. मैने दरवाज़ा लॉक कर दिया और अपने घर चला गया. घर जाके मई दीदी के बारे मे सोचने लगा. फिर मुझे दीदी की कॉल आई और उसने पूछा-

दीदी: कहा हो.

मैने कहा: मई घर पर हू.

दीदी: आज आए नही यहा.

मई: हा वो कुछ काम था.

फिर ऐसे ही कुछ दिन चलता रहा. मई स्टडी कर रहा था और दीदी की छूट वाइब्रटर और जीजू के मुरझाए हुए लंड के बीच फ़ससी हुई थी. एक दिन मुझे किसी काम से पापा के साथ कही बाहर जाना पड़ा.

मैने दीदी को एक दिन पहले ही बता दिया था, तो दीदी ने मुझसे कहा-

दीदी: ऐसा करना, छ्होटी को यहा मेरे पास भेज देना.

मैने कहा: अगर उसको आपके पास भेज दिया, तो यहा मम्मी को कों देखेगा.

मेरी मम्मी बीमार रहती है, तो उनका ध्यान रखने के लिए किसी को उनके साथ रहना पड़ता है. फिर मैने दीदी से कहा-

मई: बड़े भाई को भेज डू?

दीदी ने माना कर दिया, क्यूकी उन दोनो की बनती नही थी. फिर दीदी ने जीजू को बताया, की मई और पापा जेया रहे थे और जीजू भी लाते आते थे, तो उन्होने मारिया को घर लाने की बात पूछी.

जीजू ने दीदी को माना कर दिया. दीदी ने जीजू को कहा, की वो उनको कही लेके नही जाते, तो जीजू ने कहा-

जीजू: मई कुछ सोचता हू.

फिर मुझे दीदी की कॉल आई और दीदी बोली-

दीदी: तुम्हारे जीजू गाड़ी भेज रहे है. तुम लोग उसमे बैठ कर चले जाना.

मैने पूछा: ड्राइवर को अड्रेस पता है?

दीदी: ये मुझे नही पता.

उतने मे ड्राइवर आ गया गाड़ी लेके और मई और पापा उसमे बैठ कर चले गये.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट मे पता चलेगा. अगर आपको कहानी अची लगी हो, तो कहानी को लीके और कॉमेंट ज़रूर करे.