मेरा तन बदन तुम्हारा हुआ

मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं और हम लोग जिस कॉलोनी में रहते हैं उसी कॉलोनी में हमारे पड़ोस में राकेश और उसका परिवार रहता हैं राकेश और मेरा परिवार कई वर्षों से एक दूसरे को जानता है। राकेश से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है एक दिन वह बहुत ज्यादा चिंतित नजर आ रहा था मैंने उसे कहा तुम इतना ज्यादा परेशान क्यों हो वह कहने लगा अमन मैं तुम्हें क्या बताऊं मीनाक्षी ने तो हमारे घर का माहौल ही पूरी तरीके से खराब कर दिया है। मैंने उसे कहा मीनाक्षी ने ऐसा क्या किया अमन मुझे कहने लगा यार मैं तुम्हें कैसे बताऊं मुझे तो बताने में भी अच्छा नहीं लग रहा है मैंने राकेश से कहा तुम बताओ तो सही आखिरकार हुआ क्या है। वह कहने लगा दरअसल मीनाक्षी एक लड़के से प्यार करती है और वह लड़का कुछ भी काम नहीं करता मीनाक्षी चाहती है कि हम लोग उसकी शादी उससे करवा दें।

अब तुम ही बताओ कि हम लोग उसकी शादी उसके साथ कैसे करवा सकते हैं उसका परिवार भी कुछ ठीक नहीं है हम लोगों ने मीनाक्षी को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी उसे पूरा प्यार दिया लेकिन तुम ही बताओ भला मीनाक्षी की शादी हम कैसे उस लड़के से करवा दे। मैंने जब राकेश को समझाया कि तुम फिलहाल उसके ऊपर यह सब छोड़ दो और तुम भी बेवजह की टेंशन ना लो राकेश कहने लगा हां यार तुम ठीक कह रहे हो घर में आजकल काफी दिनों से माहौल भी कुछ ठीक नहीं है। मीनाक्षी से मेरी कई बार बात हो जाती थी लेकिन मुझे इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं था कि उसका किसी और लड़के के साथ अफेयर चल रहा है। एक दिन मैंने और राकेश ने मीनाक्षी को समझाने की कोशिश की हम दोनों ने उसे समझाया और उस लड़के की असलियत बताई कि वह लड़का बिल्कुल भी सही नहीं है और उसका परिवार भी तुम्हें खुश नहीं रखेगा लेकिन मीनाक्षी के साथ के सर तो उसके प्यार का भूत सवार था वह बिल्कुल भी उसके बारे में कुछ बुरा नहीं सुनना चाहती थी। मीनाक्षी ने कहा यदि तुम लोगों को इस बारे में ही बात करनी थी तो मुझे यहां पर क्यों बुलाया, मीनाक्षी वहां से चली गई मीनाक्षी के पापा ने उसे इस बात के लिए बहुत डांटा और वह बहुत गुस्से में हो गई।

वह इतनी ज्यादा गुस्से में हो गई थी की उसने अपने आप को नुकसान पहुंचाया और उस रात उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा जब उसे अस्पताल में भर्ती करवाया तो वह वहां पर भी कह रही थी कि मैं सिर्फ अजय से ही शादी करूंगी मैं अजय के बिना नहीं रह सकती। उस वक्त उसे किसी ने कुछ नहीं कहा जब वह थोड़ा ठीक हो गई तो उसे हम लोग घर ले आए थे परंतु राकेश के पिता जी बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मीनाक्षी की शादी अजय से किसी भी हाल में हो। उन्होंने मीनाक्षी को घर से कहीं बाहर जाने ही नहीं दिया उन लोगों ने उसे घर में ही कैद कर के रख लिया था लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि अजय उसे लेकर एक दिन घर से भाग जाएगा। जब अजय उसे लेकर घर से भगा तो सब लोगों ने उसे ढूंढने की बहुत कोशिश की और अजय के घर पर भी गए अजय के माता पिता ने कहा कि हमें अजय के बारे में कुछ पता नहीं है हम लोग नहीं जानते कि वह कहां है। अजय मीनाक्षी को लेकर घर से भाग चुका था और इससे राकेश और उसके परिवार की बदनामी होना तो लाजमी था उन लोगों की बदनामी हुई और जिस वजह से राकेश के पिताजी बहुत दुखी रहने लगे। मीनाक्षी का अब तक कुछ पता नहीं था क्योंकि वह ना जाने कहां चली गई थी इस बात को समय तो काफी हो चुका था लेकिन राकेश के पिताजी को इस बात से बहुत ही सदमा पहुंचा था और वह बहुत दुखी थे। राकेश भी हमेशा इस बारे में बात करता रहता और कहता कि यदि मुझे कभी मीनाक्षी मिलेगी तो मैं उसे जरूर यह बात पूछूंगा कि क्या तुम्हें हम लोगों ने किसी चीज की कमी की थी जो की तुम यूँ घर से भाग गई। घर की इतनी बड़ी बदनामी हुई है लेकिन उसने तो यह सब अपने अंधे प्यार के चक्कर में किया था लेकिन मीनाक्षी को भी उसका खामियाजा भुगतना ही पड़ा। उसे नहीं मालूम था कि अजय की नीयत तो पहले से ही खराब थी मीनाक्षी घर से काफी पैसे लेकर भी भागी थी करीब 6 महीने बाद मीनाक्षी घर वापस लौटी तो वह बहुत ज्यादा दुखी थी।

उसके परिवार ने उसे घर के अंदर तक नहीं आने दिया और घर के बाहर भीड़ जमा हो गई लेकिन उसकी मां ने राकेश और उसके पिताजी को समझाया और कहा उसे घर के अंदर आने दो उसके बाद आपस में बात करना। वह लोग मीनाक्षी को घर के अंदर ले आए और उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया उनके घर से काफी तेज चिल्लाने की आवाज आ रही थी लेकिन उनके घर में किसी ने भी जाने की हिम्मत नहीं की। कुछ समय राकेश ने बताया कि अजय ने अपना असली रंग दिखा ही दिया जब तक मीनाक्षी के पास पैसे थे तब तक तो उसने उसे अपने साथ रखा और जब उसके पैसे खत्म हो गए तो उसने उसे छोड़ दिया। राकेश बहुत ज्यादा गुस्सा था वह कहने लगा यदि मुझे कहीं अजय दिख जाए तो मैं उसे बताऊंगा कि उसने मेरी बहन के साथ क्या किया है। मैंने राकेश से कहा तुम बेवजह गुस्सा मत हो अभी तुम अपने गुस्से को काबू करो फिलहाल तुम यह सोचो कि मीनाक्षी कैसे इस सदमे से बाहर निकलेगी। मीनाक्षी घर में ही रहती थी वह कहीं बाहर नहीं जाती थी मैं भी एक दिन मीनाक्षी से मिला जब मैं मीनाक्षी से मिला तो वह बहुत ज्यादा उदास थी और उसने मुझसे भी ज्यादा बात नहीं की लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ ठीक होने लगा था और मीनाक्षी भी अब अपने सदमे से उभरने लगी थी। उसके माता-पिता ने भी उसकी गलती को माफ कर दिया था और वह घर पर ही रहती थी हालांकि उसकी वजह से राकेश के परिवार की बहुत ज्यादा बदनामी हुई लेकिन फिर भी राकेश शांत रहा।

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