मां के बाद बेटियों की चुदाई

मैं अपनी पड़ोसन को चोद चुका था और खूब चोदता था. अब मेरी नजर उसकी बड़ी बेटी पर थी लेकिन कोई जुगाड़ नहीं बन पा रहा था. फिर कैसे मैंने पड़ोसन की बेटियों को चोदा?

अपनी पड़ोसन की चुदाई करते हुए मुझे दो साल हो चुके थे.

तभी एक दिन रेखा ने बताया कि दिशा का ग्रेजुएशन हो गया है और आगे की पढ़ाई के लिए बंगलौर के क्राइस्ट कॉलेज से कॉल आई है. लेकिन मीतेश इंटरव्यू के लिए दिशा को भेजने को राजी नहीं है. मीतेश का कहना है कि इंटरव्यू क्लीयर नहीं हो पाया तो बीस हजार रुपये बिना मतलब के खर्च हो जायेंगे.
मैंने कहा- क्राइस्ट कॉलेज में मेरा कुछ जुगाड़ है तुम अगर चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ.

मीतेश से बात करने के बाद रेखा ने बताया कि मीतेश कह रहा था, अगर कपूर साहब जा रहे हैं तो तुम साथ जाकर क्या करोगी.
अंततः मैं और दिशा बंगलौर गये, वहां उसने इंटरव्यू क्लीयर कर लिया. उस दिन शुक्रवार था, सोमवार को एडमिशन की प्रक्रिया होनी थी इसलिए हमें दो दिन वहीं रुकना था. इंटरव्यू क्लीयर होने की खबर सुनकर रेखा बहुत खुश हुई.

शनिवार और रविवार ये दो दिन हमें घूम फिर कर गुजारने थे. शनिवार को घूमने के दौरान मैं दिशा को चोदने का प्रोग्राम बनाता रहा. रात का खाना खाकर हम लोग होटल के कमरे में लौटे तो मैं पलंग पर पसर गया और दिशा सोफे पर फैल गई. अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप चेक करते हुए दिशा बोली- अंकल, आपके सहयोग से मेरा एडमिशन हो रहा है, आपका एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी.

“हम अहसान को याद रखने या भूलने पर यकीन नहीं करते, हाथ के हाथ हिसाब करते हैं. तुमको अगर अहसान उतारना हो तो अभी उतार लो, मौका भी है और दस्तूर भी.”
“मैं आपका अहसान कैसे उतार सकती हूँ? आप आदेश करें?”
“कैसे उतारना है? पूरी रात पड़ी है, जैसे चाहो उतार लो.” इतना कहते हुए मैंने एक कुटिल मुस्कान दी.

मेरी कुटिल मुस्कान के जवाब में दिशा मुस्कुराते हुए बोली:
पापा, अगर आपको इसमें खुशी मिले तो मैं हाजिर हूँ. मेरे मुंह से पापा सुनकर आप हैरान न हों. पिछले दो साल से मैं और रिशा आपको पापा कहकर ही सम्बोधित करते हैं. हुआ यूं था कि एक दिन मम्मी के मोबाइल में मैंने आपके मैसेज देख लिये थे और मम्मी पर नजर रखे हुए थी. तभी एक रात मम्मी और आपकी बातचीत सुनी. आपने सुबह 11 बजे आने को कहा था.

अगले दिन डैडी दुकान चले गए और रिशा अपने स्कूल. इसके बाद सुबह 10 बजे मम्मी किचन में व्यस्त थी, मम्मी को बॉय कहकर मैं कॉलेज के लिए निकली. वास्तविकता यह थी कि मैं कॉलेज नहीं गई और दबे पांव ऊपर अपने कमरे में चली गई.

किचन का काम निपटा कर मम्मी नहाने चली गई. तभी आप आ गये, मम्मी तौलिया लपेटकर बाथरूम से निकली और दरवाजा खोला. आपने मम्मी को वहीं लॉबी में ही पकड़ लिया और चूमने लगे. मैं छिपकर सब देख रही थी. आप मम्मी को लेकर बेडरूम में चले गए. काफी देर बाद आप बेडरूम से निकले और बाथरूम में गये. उस समय आपके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था.

यह सब देखकर मुझे बहुत खुशी हुई. खुशी इसलिये हुई क्योंकि बीस साल मैं अपनी मां को तिल तिल मरते हुए देख रही थी, डैडी मम्मी की बिल्कुल केयर नहीं करते थे. मुझे खुशी थी कि मम्मी ने अपनी खुशी आपमें ढूंढ़ ली थी.

मैंने और रिशा ने मम्मी से बात की और उसके इस फैसले के साथ खड़े होते हुए आपको पापा मान लिया.

दिशा की बातें सुनकर मैं सन्न रह गया और उसे चोदने का विचार अपने दिमाग से निकाल दिया. तभी दिशा बेड पर आ गई और मुझसे चिपक कर बोली- पापा, मेरा एडमिशन कराने में सहयोग करके आपने जो अहसान किया है, उससे बहुत बड़ा अहसान आप मेरी मां को खुशी देकर कर चुके हैं. आपकी बांहों में रात गुजार कर मैं आप पर कोई उपकार नहीं करूंगी बल्कि आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी.

इतना कहकर दिशा ने अटैची से अपने कपड़े निकाले और बाथरूम चली गई. कुछ देर बाद दिशा बाथरूम से निकली. छोटी सी नेकर और टॉप पहने दिशा को देखकर मेरा दिमाग झन्ना गया.

करीब 21 साल की दिशा प्रीति जिंटा की कॉपी लग रही थी. नेकर से बाहर निकली उसकी जांघें मेरा लण्ड टनटना रही थीं. मैं यह याद भी नहीं करना चाहता था कि मेरी उम्र 62 साल है और दिशा की सिर्फ 21 साल.

मैं भी बाथरूम गया और शॉवर लेकर सिर्फ लोअर पहनकर आ गया.

दिशा अपने मोबाइल में मशगूल थी. दिशा के बगल में बैठ कर मैंने उसकी जांघों पर उंगलियां फेरीं तो दिशा ने मोबाइल रख दिया और ‘आई लव यू पापा’ कहकर मेरे सीने से लग गई.

मैंने दिशा का टॉप उतार दिया और संतरे के आकार की उसकी चूचियों से खेलने लगा. दिशा की चूची मुंह में लेकर मैं धीरे धीरे चूसने लगा. दिशा की नेकर का हूक खोलकर मैंने उसकी नेकर घुटनों तक खिसका दी और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.

दिशा के होंठों पर होंठ रखकर मैंने दिशा को अपनी ओर खींचा तो अपनी नेकर को टांगों से अलग करते हुए दिशा मुझसे लिपट गई और मेरे बदन पर हाथ फेरने लगी. दिशा का हाथ मैंने अपने लण्ड पर रखा तो मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच कर दिशा बोली- आई लव यू, पापा. मुझमें समा जाओ, पापा.

मैंने अपना लोअर उतार दिया और 69 की पोजीशन में आकर दिशा की चूत चाटने लगा. दिशा मेरे लण्ड का सुपारा चाटते हुए सॉफ्टी के मजे ले रही थी.

तभी मैंने दिशा को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लण्ड दिशा की चूत के मुंह पर रख दिया. दिशा ने मेरे लण्ड का सुपारा सेट किया और उस पर बैठ गई. दिशा की कमर पकड़ कर मैंने उसे नीचे की ओर दबाया तो टप्प की आवाज हुई और मेरे लण्ड के सुपारे ने दिशा की चूत में जगह बना ली. दिशा ने और दबाव डाला तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया.

अपना लण्ड दिशा की चूत में बनाये रखते हुए हम पलट गये.
अब दिशा नीचे थी और मैं ऊपर. अपना लण्ड दिशा की चूत के अन्दर बाहर करते हुए मैंने जोर से धक्का मारा तो दिशा की चूत की झिल्ली फट गई. चूत की झिल्ली फाड़ते हुए मेरा लण्ड दिशा की चूत की गहराई में उतर गया.

लण्ड को दिशा की चूत में फंसा कर मैं उसकी चूचियां चूसने लगा. चूचियां चूसने से मेरे लण्ड में जोश बढ़ने लगा, मैंने चुदाई की तो दिशा की चूत ने पानी छोड़ दिया. चूत गीली होने से मुझे आराम हो गया.

जब लण्ड को अन्दर बाहर करते काफी समय हो गया तो मैंने दिशा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. चोदते चोदते दिशा की चूत का भुर्ता बन गया था लेकिन मेरा लण्ड पानी छोड़ने को तैयार नहीं था. दिशा की चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए मैंने लाल कर दिया था. मेरे लण्ड का सुपारा फूलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी पिचकारी छूटने वाली है. पिचकारी छूटने पर मैं दिशा से लिपट गया.

उस रात मैंने दिशा को दो बार चोदा. अगले दिन रविवार था. शिलाजीत के कैप्सूल और वियाग्रा की गोली खाकर दिशा की जमकर चुदाई की. सोमवार को दिशा का एडमिशन करा कर उसको हॉस्टल में शिफ्ट करके मैं वापस लौट आया.

बंगलौर से वापस लौटकर अगले दिन मैं रेखा के घर गया तो रेखा ने बाहें फैला कर मेरा स्वागत किया.

दिशा की चुदाई का आनन्द लेने के बाद भी रेखा को चोदने का अलग ही मजा था. 100 किलो से भी अधिक वजन वाली भारी भरकम शरीर की मल्लिका रेखा जब नंगी होती तो हाथी का बच्चा लगती.

कई दिन बाद चुदने के कारण रेखा ने उछल उछल कर चुदवाया. रेखा को चोदने के बाद मेरे कहने पर रेखा चाय बना लाई. चाय की चुस्कियां लेते हुए रेखा ने बताया कि परसों रिशा का जन्मदिन है, वो 19 साल की हो जायेगी.

“तो चलो परसों गोल्डेन एप्पल में पार्टी करते हैं.”
“नहीं, घर पर ही केक काटेंगे.”

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