मेरी पत्नी ने चुत से क़र्ज़ चुकाया

अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार! मेरी पिछली कहानी
सिनेमा हॉल में मस्ती गोदाम में चुदाई
आपने पढ़ी और खूब ईमेल भी किये।

यह कहानी काल्पनिक है, मनोरंजन मात्र के लिए लिखी गयी है।

मेरा नाम विक्रम है, जयपुर में रहता हूँ. मेरा कद 5 फुट 11 इंच, उम्र 31 वर्ष है। पर यह कहानी मेरी पत्नी रीना की है जिसकी उम्र 27 वर्ष, रंग सांवला, बूब्स साइज 34B, कद 5 फुट 2 इंच, एकदम दुबला छरहरा कामुक शरीर … मेरी बीवी रीना को जो कोई एक बार भी देख लें वो गच्चा खा जाये कि यह लड़की शादीशुदा भी हो सकती है क्या!

सीधा कहानी पे आता हूँ। बात करीबी एक वर्ष पुरानी है. मेरे कंप्यूटर बिज़नेस में बहुत घाटा हो चला था, मेरे ऊपर दो लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया था। मासिक किस्त भी भर पाना मुश्किल हो गया था।
तभी रीना ने मुझे सुझाव दिया कि वो अगर कहीं कुछ महीने नौकरी कर लेगी तो मुझे मदद मिल जाएगी.
मैंने काफी देर सोच कर उसे हाँ कह दिया।

अब रीना ने एक प्रमुख ऑनलाइन रोजगार साइट पे आवदेन शुरू कर दिए। तभी एक सप्ताह बाद रीना मुझे बताया कि एक प्रमुख प्राइवेट कंपनी ने उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया है।
मैंने खुश होते हुए कहा- यह तो बहुत अच्छी बात है.
पर रीना ने उदास होते हुए कहा- पर पोस्टिंग गुरुग्राम में है।

मैंने काफी देर मौन रहते उसे पूछा- सैलरी कितनी दे रहे हैं?
रीना बोली- 30,000 रुपये मासिक।
मैंने उसका उत्साह बढ़ाते हुए कहा- ठीक है, कर लो इंटरव्यू।

रीना गुरुग्राम चली गयी और नसीब का खेल देखो उसको जॉब भी मिल गयी। देखते देखते एक महीना बीत गया, हम लोग रोज़ाना मोबाइल चैट से संपर्क में थे।

अचानक मेरे दिल को धक्का लगा जब रीना मेरे कॉल को कट करने लगी। पूछने पे बोलती थी ‘ऑफिस का काम रहता है। बॉस फ़ोन करते रहते हैं।’
अब मुझे अपनी हालत पर गुस्सा बहुत आ रहा था।

इस तरह 3 महीने निकल गए। किश्तें चुकने लगी।

एक दिन मैं शाम को चाय दूकान पे बैठा था, तभी मैंने देखा सामने से रीना चली आ रही और उसके हाथ में बड़ा बैग है।
पिछले 1 हफ्ते से बात नहीं हुई थी और उसका अचानक से दिखना मुझको छलावा लगा।

पर वो तुरंत मेरे पास आयी और बोली- बहुत भारी है बैग … उठा लीजिये।
तभी मुझको यकीन हो चला ‘हाँ ये रीना ही है।’

मेरे मन में जैसे बारिश होने लगी और मोर नृत्य करने लगे बड़े उत्साह के साथ मैंने उसका बैग लिए और हम घर को चल दिए।

रात को खाना हमने बाहर से मंगवा लिया, फिर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे लगा कि रीना खूब बात करेगी जैसा उसका स्वभाव है चुलबुला … पर वो शाम से बिलकुल चुप थी।
मुझे लगा थकी होगी तो कुछ बोलना उचित न समझा और हम सो गए।

सुबह रोज की तरह मैं अपनी शॉप पे गया। तभी शाम को चार बजे मुझे बैंक से एक मेसेज मिला कि मेरा पूरा दो लाख क़र्ज़ चुकती हो गया है।
मेरा दिमाग ख़राब हो गया, कुछ समझ नहीं आया. मुझे लगा कि बैंक की तरफ से कोई गलती हो गयी होगी।
क्यूंकि बैंक अभी होने वाला बंद था तो मैंने अगले दिन पता करना उचित समझा।

रात को डिनर करने के बाद मैं और रीना सो रहे थे।
तभी मैंने पूछा- रीना क्या बात है आजकल बड़ी गुमसुम रहती हो? पहले तो खूब बोलती थी.
रीना चिढ़ते हुए- आप सो क्यों नहीं जाते, मैं बहुत थक गयी हूँ।
मैंने कर्ज वाली बात बतानी चाही पर उसके गुस्से को देखते हुए उस तरफ मुँह मोड़ के सो गया।

अगले दिन में फिर अपने शॉप गया, फिर दो बजे लोन वाली बात याद आ गयी, बैंक जाकर मैंने अधिकारी से पूछा- सर, मेरा लोन अकाउंट पूरा खत्म बता रहा है.
बैंक अधिकारी कंप्यूटर में देखते हुए- हाँ सर, आपका लोन पूरा पे हो गया है.
मैं चौंका और फिर पूछा- सर ठीक से देखिए कोई गलती हो गयी होगी।
बैंक अधिकारी- कमाल करते हो विक्रम सर, आपकी वाइफ ही तो चेक लगा कर गयी है. क्यों परेशान कर रहे हो। कोई बकरा मिला नहीं आज आपको?

मेरा दिमाग सुन्न हो चला, इतने पैसे इतने कम समय में रीना के पास कहाँ से आ गए? वो भी पूरे दो लाख!

मैं बाइक भगाते हुए घर गया, मुझे रीना से बहुत सवालों के जवाब लेने थे।

जैसे ही मैं घर में घुसा, मैंने पाया कि रीना घर पर है ही नहीं.
अब मेरी हालात टाइट हो गयी … आखिर कहाँ गयी मेरी रीना? कहाँ से आये इतने पैसे?

मैंने उसे बहुत फ़ोन लगाए पर उसका फ़ोन स्विच ऑफ आया। दोस्तों और पड़ोस में भी उसका अता-पता नहीं था।
अब रात के 11 बज रहे थे, मुझे घबराहट सी होने लगी। अंत में अपने घर के अंदर थकान से गिर पड़ा।

रात के 11:30 बजे दरवाजे पे मैंने देखा रीना खड़ी थी।

मैं दौड़ कर उसके पास गया और उसे बाँहों में भर लिया. वो रोने लगी।
मैंने उसे बिलकुल नहीं डांटा और हम रूम में चले गए।

मैंने उसे खाने को पूछा और किचन में जाकर कुछ फटफट नूडल बना लिए।
फिर हम सोने को हुए।
मैंने उसके सिर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसका रोना बंद हो गया था।

मैंने उसे ह्ल्के से कहा- रीना, अगर मन में कोई बात है, तो उसे फ़ौरन बता दो। मैं पति हूँ तुम्हारा अब मुझसे भी छुपाओगी?
रीना- शुरू शुरू में ऑफिस में सब कुछ ठीक चल रहा था दो महीने तक … फिर बॉस की मुझ में कुछ ज्यादा दिलचस्पी होने लगी, वो मुझे खूब काम देते और तारीफ भी करते, मुझे तो बहुत अच्छा लगने लगा कि मेरी जल्दी तरक्की होगी।

मैं- हाँ …तो फिर क्या हुआ ऐसा?
रीना- धीरे धीरे मुझे सहकर्मियों से उनके बारे में काफी कुछ पता लगने लगा.
मैं- अच्छा थोड़ा थोड़ा समझ में आ रहा है.

रीना- फिर एक दिन उन्होंने कंपनी की कोई डील बताई और मुझे साथ में शिमला चलने को कहा. मैंने काफी मना भी किया. फिर उन्होंने मुझे इशारों में कहा की यह डील जरूरी है, नहीं तो आपका यह नौकरी का आखिरी महीना हो सकता है.
विक्रम- फिर तुम चली गयी? इतनी बड़ी बात मुझे बतानी नहीं समझी?
रीना- मुझे कुछ समझ नहीं आया, क्या करूँ … या ना करूँ! मैंने पता नहीं क्यों हाँ बोल दिया और चली भी गयी.

विक्रम ठण्डे मन से- अच्छा फिर क्या हुआ?
रीना ने पूरी बात बतायी:

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