पड़ोसन आंटी की गर्म चुदाई

मेरा नाम दीपक है. मैं हिसार हरयाणा से हूँ. मैं दिखने में सुन्दर हूँ. जिम जाने की वजह से मेरा बदन भी मस्त है. मैं अपनी ज्यादा तारीफ़ नहीं करूंगा. मेरा लंड मोटा और लंबा है, जो किसी भी औरत को खुश करने के लिए काफी है. मैं अभी 20 साल का हूं और मैंने बीएससी कर रखी है.

मेरे घर के सामने एक घर है. उस घर में एक फैमिली रहती है. उस फैमिली में पति पत्नी और उनके 2 बच्चे हैं … एक लड़का और एक लड़की. लड़की भी दिन प्रतिदिन मस्त माल होती आ रही थी. लड़की का नाम अञ्जलि था और आंटी का नाम किरण था. आंटी का 36-34-42 का फिगर एकदम मस्त है. आंटी की गांड बहुत भरी हुई है और बहुत बड़ी भी है. मैं उनकी गांड का ही दीवाना था. आंटी की उम्र 40 साल है. उनका बदन पूरा गदराया हुआ और भरा हुआ है, जिसे देखकर लंड एकदम खड़ा हो जाता था.

अञ्जलि अभी 12वीं में थी और उसके बोर्ड के एग्जाम थे. उसे गणित विषय में बड़ी दिक्कत थी. इसलिए आंटी ने मुझसे बोल दिया कि तुम अञ्जलि को मैथ्स पढ़ा दिया करो.
मैंने भी हामी भर दी और मैं उसको हर रोज़ पढ़ाने जाने लगा. जिससे मैं अञ्जलि से भी बात कर लेता और उसको पटाने की कोशिश भी करने लगता.

साथ ही आंटी से भी मेरी बात होने लगी. मैं जब भी उनके घर जाता, तो आंटी की गांड और चूचों को घूरता रहता. आंटी ने भी इस बात को नोटिस कर लिया था और फिर वो भी मुस्कुरा देती थीं.

धीरे धीरे आंटी मुझसे खुलने लगीं और हमारी बहुत बात होने लगी. आंटी ने मेरा नंबर ले लिया था. फिर उसके बाद आंटी मुझसे व्हाट्सएप्प पर भी बात करने लगी थीं.

आंटी को अब जब भी कोई काम होता, तो वो मुझे बुला लेती थीं. जब भी बाजार का कोई काम होता, तो वो मुझे अपने साथ ले जाती थीं. मैं उन्हें अपनी बाइक पर ले जाता था, तो मुझसे काफी चिपक कर बैठती थीं. मैं भी उनके चूचों के पूरे मजे लेता था. वो भी चूचों को मेरी कमर पर पूरा दबा देती थीं. मतलब साफ था कि आग दोनों तरफ लगी थी, बस शुरूआत करने की देर थी.

एक दिन मैं अञ्जलि को पढ़ा कर और उसको काम देकर आंटी से बात करने आ गया.

मैं आंटी से बात करने लगा.
उन्होंने मुझसे पूछ ही लिया- तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड नहीं है क्या?
मैंने बोल दिया- नहीं है.
तब वो कहने लगीं- ऐसा हो ही नहीं सकता कि तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड न हो.
मैंने कहा- सच में आंटी, नहीं है … कोई आप जैसी मिली ही नहीं, जिसे मैं अपनी गर्लफ्रैंड बना लेता.
आंटी कहने लगीं- हमारे जैसी का क्या करोगे, हम तो इतनी सुंदर भी नहीं हैं.
फिर मैंने कहा- आंटी अगर मुझे आप जैसी बीवी मिल जाए, तो मेरी तो मौज हो जाए. मैं तो कभी आपको अकेला छोड़ूँ ही नहीं. अंकल भी नहीं छोड़ते होंगे आपको.

अंकल की चर्चा होते ही वो थोड़ा उदास सी हो गयीं.

मैंने यह देख कर कहा- आंटी मैंने कोई गलत बात थोड़े ना कह दी, जो आप उदास हो गयीं.
आंटी ने आह भरते हुए कहा- कोई बात नहीं, कह दिया तो कह दिया.
यह कह कर रोने लग गयीं.

मैंने सोचा कि यह मैंने क्या कर दिया. अब मैं उन्हें चुप कराने लगा, जिससे मैं उनसे कुछ ज्यादा ही चिपक गया. चुप कराने के बहाने मैं उनकी पीठ पर धीरे-धीरे सहलाने लगा.

आंटी थोड़ा गर्म होने लगीं और मुझसे और चिपक गयीं. शायद वे मुझसे चुदना चाहती थीं. मैंने भी इस बात का फायदा उठाया और उन्हें चुप कराने के बहाने अपना एक हाथ उनके चुचे से टच कराने लग गया. आंटी को हाथ से स्पर्श का आभास हो रहा था, मगर वह कोई विरोध नहीं कर रही थीं.

उनकी तरफ से सहमति देख कर मैं भी अपना काम आगे बढ़ाने में लगा रहा. मैंने उनसे कहा कि शायद अंकल आप को अच्छे से वो सुख नहीं दे पा रहे हैं.

तब उन्होंने कहा- वो तो मुझे हाथ भी बहुत ही कम लगाते हैं. जब कभी उनका मूड होता है, तो वो अपना काम जल्दी से दो मिनट में करके सो जाते हैं और मैं अपने शरीर की आग अपनी उंगली से शांत करती हूँ.

ये सब बातें सुन कर मैं धीरे-धीरे उनसे और चिपक गया, जिस कारण उनके चुचे मेरे सीने से टच होने लगे.
मैंने उनको चुप कराते हुए कहा- आंटी मैं हूँ न, मैं आपकी मदद करूँगा.
यह सुन कर वो चुप हो गईं और मेरी तरफ देखने लगीं.

मैंने उसी वक़्त उन्हें किस किया. पहले तो वो थोड़ा ना नुकर कर रही थीं, पर पर थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगीं. अब मैं उन्हें लगातार किस किये जा रहा था. हम दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में ऐसे खेल रही थीं, जैसे हम दोनों एक दूसरे में समा जाना चाहते हों.

कुछ दस मिनट बाद हम दोनों अलग हुए, तो हमें होश आया कि यहां हमें अञ्जलि भी देख सकती है. तब हम दोनों अलग हुए.

आंटी ने कहा- कल सुबह 10 बजे आ जाना, तुम्हारे अंकल भी काम पर जा चुके होंगे और बच्चे भी स्कूल जा चुके होंगे.
मैंने उनकी बात मान ली और जाकर अञ्जलि को काम करवा कर वापिस आ गया. घर आने से पहले मैं आंटी को जोरदार किस करके आया.

घर आकर अब मैं अगले दिन का इंतजार करने लगा. मैंने लंड की मालिश भी की और बाल भी साफ कर लिए.

अगले दिन मैं जब उनके घर गया, तो आंटी ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया. घर के अन्दर जाते ही मैं आंटी के ऊपर टूट पड़ा और वो भी मुझ पर टूट पड़ीं. हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे.

फिर मुझे याद आया कि गेट तो बन्द ही नहीं किया है. हमें कोई बाहर से भी देख सकता था.
उसके बाद आंटी गेट बन्द करके आईं और फिर मुझे लेकर बेडरूम में चली गईं. आंटी ने एक पतली सी नाइटी पहन रखी थी, जिसमें वो गजब का माल लग रही थीं.

बेडरूम में जाते ही आंटी और मैं, एक दूसरे पर टूट पड़े. हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे. किस करते करते हम बेड पर आ गए. मैंने आंटी को बेड पर लिटा दिया और मैं उनके ऊपर आकर उनको किस करने लगा. आंटी भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं. मैं उनको किस करते करते नीचे की तरफ आने लगा. पहले मैं उनकी गर्दन पर किस करने लगा और साथ की साथ नाइटी के ऊपर से ही उनके चुचे भी दबाने लगा. आंटी को भी मजा आने लगा, वो भी सिसकारी लेने लगीं.

‘अहहा … उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्म्म्म … ओह ओह … और चूस और चूस उम्म्म्म … आह आह..’

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