मेरी हॉट दीदी की अन्तर्वासना

नमस्कार मित्रो, मैं विशाल फिर से एक नई कहानी के साथ हाजिर हूं. मेरी पिछली कहानी
बहन बनी सेक्स गुलाम
को आप सबने काफी सराहा. उसके लिए आप सभी का धन्यवाद.

हालांकि इसे कहानी कहना उचित नहीं होगा क्योंकि ये घटना एक वृतांत है जो मेरी बहन प्रीति के जीवन की है. मेरे और मेरी बहन के रिश्ते से आप सभी अवगत हैं. जो नए पाठक हैं, उनसे मैं कहना चाहूंगा कि वे मेरे नाम से प्रकाशित अन्य कहानियों को पढ़ लें, ताकि उनको मेरी दीदी और मेरे बारे में जानकारी हो सके.

आइए दीदी की इस सेक्स कहानी को उन्हीं के शब्दों में जानते हैं.

हाय दोस्तों मैं प्रीति हूं … मैं अपने भाई की सेक्स गुलाम हूं. मैं एक सेक्सी फिगर की मालकिन हूं. मेरा साइज मेरे भाई ने आपको पहले की कहानियों में बता दिया था. खैर अब मेरे भाई ने मेरा साइज़ और बढ़ा दिया है. मेरे मम्मे अब 36 नाप के हो गए है. मेरा निखरा हुआ साइज अब 36-30-32 का हो गया है.

ऐसा एक भी दिन नहीं जाता, जब वो मेरे मादक मम्मों को मसलता चूसता ना हो. आपने पिछली कहानियों में देखा होगा कि कैसे मैं उसकी पर्सनल रखैल बन चुकी थी. उसकी चुदाई का अंदाज ही अलग था. मैं उसके लंड की दीवानी थी.

तीन महीने हो गए थे. मेरी जॉब लग गई थी. मैं नए शहर में आ गयी थी, ये शहर मेरे लिए नया था, तो पापा ने मुझसे मामा-मामी के यहां रुकने को कहा. मेरे मामा की एक ही लड़की थी. हम दोनों बचपन से बहुत अच्छी सहेलियां हैं … हमारी बहुत पटती थी. वो भी काफी सुन्दर थी. वो फैशन डिजाइनिंग कर रही थी. वो मॉडलिंग के लिए भी ट्राय करती रहती थी. उसका नाम इशिता था. वो भी एकदम छप्पन छुरी जैसी आइटम थी.

हालांकि मैं उसे बचपन से जानती हूं, लेकिन इस बार उसका बर्ताव कुछ बदला बदला सा था. वो मेरे से कम बात करती और ज्यादातर घर से बाहर रहती. मैं भी अपने काम में व्यस्त रहती थी, तो उससे मिल पाना बहुत कम ही हो पाता था.

खैर मुझे जॉब अच्छी मिली थी. कुछ ही माह में मुझे अच्छी पोस्ट मिल जाने वाली थी.

अपने भाई को मैं यहां बहुत मिस कर रही थी. उसके बिना तो एक पल मेरा मन कहीं नहीं लगता था. यहां मैं कैसे रह रही थी, मैं ही जानती हूं. भाई ने मुझे पर कैसा जादू कर दिया था कि मुझे हर समय उसका ही ख्याल बना रहता था. मुझसे दूर हो कर भी वो मेरे पास ही था. उसके छुअन के अहसास को मैं पल पल महसूस करती. हवा भी चले, तो लगता था कि उसने ही छुआ हो.

खैर … हम दोनों रोज फ़ोन और मैसेज पर बातें करते और रोज रात को वीडियो चैट करते थे. कभी कभी उसके गिफ्ट्स भी आते थे. लेकिन वो किसी आम जोड़े की तरह नहीं होते, ज्यादातर मुझे उत्तेजित करने वाले ही होते थे. जैसे ब्रा पैंटी का जोड़ा, जिसे मुझे उसके निर्देशित स्थान पर बदलने होते थे. कभी ऑफिस में, कभी पब्लिक टॉयलेट में, कभी मामी के बेडरूम में. मैं उसका दिया हर टास्क पूरे मन से पूरा करती थी.

भाई के कारण किसी पराये मर्द का तो मेरे जहन में ख्याल भी नहीं आता था. हां लेकिन मुझे जिस्म की नुमाईश करने में बड़ा मजा आता है और भाई का बस चले, तो वो हमेशा मुझे नंगी ही रखे.

मुझे एक अच्छी जॉब मिली थी. मेरी बॉस भी एक महिला थीं. उनका नाम इलियाना था. वो काफी स्ट्रिक्ट थीं, सारे इम्प्लाइज की क्लास लेती थीं. मेरी कड़ी मेहनत और लगन से वो काफी प्रसन्न रहती थीं.

एक दिन रात को रोज की तरह मैं भाई से चैट कर रही थी. भाई का सख्त आदेश था. चैट करते समय मैं पूरी नंगी रहूं. पिछले आधे घंटे से मैं बेड के बीचों बीच घुटने मोड़ कर बिल्कुल नंगी बैठी थी. मेरे दोनों हाथ ऊपर हवा में थे. बेड पर लैपटॉप मेरे सामने था. मुझे एक मिनट के लिए भी लैपटॉप से नजर नहीं हटानी थी. भाई सामने वीडियो चैट पर मुझे घूर रहा था. वो मेरे अंग को ऐसे निहार रहा था, जैसे पहली बार देख रहा हो.

ये बिल्कुल आसान नहीं था. खास करके जब 8 इंच का लौड़ा आपकी चुत में हो. जी हां … ये भाई के गिफ्ट्स में से एक था. एक नकली लंड, जो उसके लौड़े के साइज का था. हालांकि मुझे इसे उसके आदेश के बिना इस्तेमाल करने की आजादी नहीं थी. मैं वासना से पागल हुई जा रही थी … लेकिन मुझे हिलने का आदेश नहीं था. मैं बहुत गर्म थी. आधे घंटे से एक मूसल सा लंड मेरी चुत में था.

तभी धड़ाक की आवाज से मेरा ध्यान बंटा, मैंने हड़बड़ा कर लैपटॉप बन्द किया. इशिता, मेरी छोटी बहन दरवाजा खोल कर अन्दर आ चुकी थी. वो मेरी तरफ बढ़ी, लेकिन उससे पहले ही लड़खड़ा कर गिर गयी. इशिता नशे में धुत्त थी. उसके हाथ में अभी भी एक बोतल थी.

“इशिता..!” मैं चिल्लाई और उसकी तरफ दौड़ी. वो जमीन पर बेसुध लेटी थी. मुझे बड़ी हैरानी हुई.
“उठ इशिता, कहां से आ रही है, तूने इतनी क्यों पी रखी है?”
“बूब्स … बिग बिग बूब्स..” इशिता ने मेरे नंगी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए बोला. तब मुझे एहसास हुआ कि मैं पूरी तरह नंगी हूं.
“क्या बक रही है?”

इशिता कुछ नहीं बोल रही थी, अभी भी उसकी आंखें मेरे मोटे और बड़े चूचों पर ही टिकी थीं.

“बूब्स मिल्की बूब्स … टेस्टी … आई वन्ना सक इट..”
उसने शराबियों के लहजे में बोला.

इतना कह कर उसने मेरे एक चूचुक को मुँह में भर लिया. मैं तो उसके इस एक्शन से एकदम से सिहर उठी. महीनों बाद मेरी चूचियों की नोकों पर किसी की नर्म जीभ के स्पर्श का एहसास हुआ था. चूचुकों पर प्राप्त अन्तर्वासना से मेरे मुख से “आहहहह..” निकल गई. एक पल को मुझे अपने चोदू भाई की याद आ गयी. एक भी दिन ऐसा नहीं होता था. जब वो मेरे मम्मों को मसलता और चूसता न हो. मैंने खुद को ख्यालों से निकाला और वास्तविकता में आ गयी.

“इशिता छोड़ … क्या कर रही है?”

मैंने किसी तरह उससे अपने मम्मे छुड़ाए. इशिता ने बहुत ज्यादा पी रखी थी. वो इस हालत में नहीं थी कि मैं उसे उसके कमरे में ले जाऊं. मैं किसी तरह उसे बेड पर ले कर आयी. मैं उसके लिए पानी लेने गयी. तब तक वो मेरे बेड पर ही सो गई.

मैं सोने की कोशिश कर रही थी. पर मुझे नींद कहां आने वाली थी. पहले भाई ने, फिर इशिता ने मेरे अन्दर की अन्तर्वासना जगा ही दी थी. इन सबको सोचते सोचते कब मेरा हाथ मेरे स्तनों पर चला गया, मुझे पता भी नहीं चला. मैंने अनुभव किया कि मेरे निपल्स एकदम कड़क और सेंसटिव थे. जोकि अकसर भाई के ख्यालों से हो जाते थे.

मैंने खुद से बुदबुदाते हुए बोला कि ये मैं क्या कर रही हूं … एक लड़की की छुअन से मैं कैसे उत्तेजित हो रही हूं. मैं पागल हो गयी हूं भाई की तड़प में … शायद उसकी कमी और सेक्स के लिए मेरी तड़प ने मुझे ऐसा सोचने पर मजबूर किया है. मेरे मन में ऐसे तरह तरह के बहुत सारे ख्याल कौंध गए. मैंने खुद को समझाया और किसी तरह सो गई.

“मैं यहां कैसे..!” इशिता ने सुबह उठते ही मुझसे पूछा. मैं ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी. तब वो उठी थी.
“ये तो तुझे बताना चाहिए.”
“आहहहह, मुझे कुछ याद नहीं दीदी.”
“हम्म रहेगा भी कैसे … तूने इतनी ज्यादा जो पी रखी थी.”
“पी रखी थी … ओ हां कल रात मैं पार्टी में थी फिर!”
“चल ज्यादा जोर मत डाल दिमाग पर … उठ जा, कॉलेज नहीं जाना क्या?”
“नो दीदी आई एम नॉट फीलिंग वेल..” (नहीं दीदी, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है)
“चल उठ जा, मैं राधा को निम्बू पानी लाने को बोलती हूं.”
“ओके दीदी.”

मैं ऑफिस के लिए निकल गयी.

ऑफिस में जो हुआ वो लिख रही हूँ.

सांसों की आवाज आ रही थी.

“स्मेलिंग नाइस.”(क्या खुशबू है) मेरे दायें कंधे पर किसी के सांसों का आभास हुआ.
“टीना!” मैंने पहचानते हुए उसका नाम जोर से पुकारा.

टीना मेरी सहकर्मी है, हम दोनों काफी जल्द ही बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे. उसकी आदत है … वो मज़ाक में मुझे जान, डार्लिंग, बिच (कुतिया) कह कर भी बुला देती थी और मैं उसे भी इन्हीं शब्दों से सम्बोधित कर देती थी. मतलब हम दोनों में काफी घनिष्ठ मित्रता थी. हम हर तरह की बातें शेयर किया करते थे.

वो भी काफी हॉट लड़की है. ऑफिस में कई उसके आशिक़ थे और कई पार हो चुके थे. वो थोड़ी मॉडर्न ख्यालातों की थी. काफी खुले विचारों की और कुछ ज्यादा ही फैशन की शौकीन लड़की थी.

“तू नहीं सुधरेगी न!” मैंने उसे आंख दिखाते हुए कहा.
“जान तुझे देख के अच्छे अच्छे बिगड़ जाएं, मैं क्या चीज हूं.”
“चल हट.”

वो डेस्क पर बैठ गयी, फिर कुछ देर हमने बातें की. वही ऑफिस पॉलिटिक्स शुरू हो गई कि किसका किसके साथ चल रहा है, कौन किससे चुद रहा है. किसका लंड किसकी चुत में जा रहा है. उसके बाद वो अपने क्यूबिकल में चली गयी. फिर वही दिन भर काम काम काम और काम.

इंटरवल में मैं वाशरूम गयी. मैंने अपने शर्ट के दो बटन खोल दिए. मेरे बड़े बड़े मम्मे साफ झलकने लगे. मैंने दो तीन फोटोज लीं और विशाल को भेज दीं. फोटो के नीचे मैंने टाइप किया.

“सॉरी मास्टर, प्लीज पनिश मी.”(कृप्या मुझे दण्ड दें)

कल रात को मैं बिना कुछ बोले चली गयी थी. फिर इशिता मेरे कमरे में आ गयी … तो उससे बात नहीं हो पाई. सुबह से उसके एक भी कॉल या मैसेज भी नहीं आया था. यह तूफान के पहले की शांति थी. मुझे कोई कठिन पनिशमेंट (दण्ड) मिलने वाला था. सच कहूं तो मैं भी इसके लिए उत्साहित थी … एक नए रोमांच को मसहूस करने के लिए. मुझे उसकी पनिश्मेंट्स और दिए गए काम अच्छे लगते थे. मुझे खुद को उसके हवाले करना, दिल से अच्छा लगता था.

उस दिन ऑफिस में कुछ नया या रोचक नहीं हुआ … वही रोज की तरह पूरा दिन काम करते हुए ही गुजरा.

मेरे द्वारा विशाल को अपने मम्मों की फोटो भेजने और उससे दंड पाने की ख्वाहिश का मैसेज किया था. मुझे उसका जबाव मिलने की प्रतीक्षा थी.

मेरे मास्टर विशाल की विचित्र पनिशमेंट कुछ यूं मिली.

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