मेरी यही कहानी मामा को दे दी जवानी

मेरे घर में मेरी माँ, पिता जी और एक बड़ी बहन है. हम दोनों बहनें भी अब शादीशुदा हैं. हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. मामा पुलिस में सिपाही था. माँ ने बड़ी बहन बसंती को मामा के पास ही रहने को छोड़ दिया, ताकि कुछ खर्चा कम हो जाए. मामा की उम्र कुछ 38-40 साल के आस पास ही थी. मामा के घर बसंती 4-5 साल रही. वह छोटी उम्र से मामा के घर चली गई थी और जब जवानी की दहलीज पर आ गई यानि 18 बरस की हो गई, तब वो जवान और खूबसूरत हो कर वापिस आ गई. मामा ने उसकी शादी में भी मदद की. वह अब अपने ससुराल में सुखी है और कभी कभी मामा से मिलने भी आती है.

बसंती की शादी जल्दी इसलिए करनी पड़ी क्योंकि वह गर्भ से हो गई थी. यह बच्चा मामा का ही था, लेकिन ऐसा मैनेज किया गया कि किस अंजान लड़के की जिम्मेदारी आ जाए. ये तो मुझे बाद में पता चला कि मेरी माँ को सारी बात पता थी और वह अपने भाई को खुश रखने के लिए यह सब करती थी ताकि भाई उसे पैसा देता रहे.

मेरी मामी की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी थी, वे अकेले थे. हमारी माँ ने जानबूझ कर बसंती को मामा की प्यास बुझाने में इस्तेमाल किया. जब बदनामी होने का डर हुआ, तो उसे वापिस बुला लिया.

लेकिन मामा की जिद के सामने माँ ने फिर हथियार डाल दिए और उनकी मांग पर मुझे मामा के घर भेज दिया. मेरी उम्र भी उस समय लगभग 18-19 की ही रही होगी. मैंने पढ़ना देर से शुरू किया था, दसवीं तक तो गाँव के सरकारी स्कूल में ही पढ़ी थी पर अब मामा ने मुझे स्कूल ग्यारहवीं में दाखिल करवा दिया. मामा मेरे लिए खूब अच्छी खाने की चीजें लाने लगे. मैं बहुत मज़े में थी.

तभी एक दिन मामा ने मुझसे कहा कि उनके कमरे का पंखा ख़राब है, वे भी मेरे साथ सोएंगे. मैं कुछ असहज तो हुई क्योंकि मेरी बहन को चोद चोद कर इस साले कमीने ने ग्याभन कर दिया था और फिर ऐसे वैसे ही घर में शादी करनी पड़ी थी. पर मुझे भी पता तो था ही कि मेरे साथ ये काम कभी भी शुरू हो सकता है. इसलिए डरती हुई अपने बिस्तर में दुबकी रही.

मामा बड़े लाड़ से मेरी चादर में घुसा और चुपचाप लेट कर मुझे सिर्फ सहलाता रहा. उसने मुझे खाने को चॉकलेट दी. पर मुझसे वह खाई नहीं गई. मैं कुछ सोचती रही कि अब आगे क्या होगा. खैर कुछ ज्यादा नहीं हुआ.

मामा ने मेरी चूची सहलाई और बोले- तेरी बहन की चूची तो बहुत बड़ी थी.
ऐसे ही वह कुछ कुछ करता रहा. वह रात भर नहीं सोया और मुझे भी नहीं सोने दिया.

अगली रात को फिर पंखे के बहाने आ गया और वह मेरी चूची और चूतड़ों को कपड़ों के ऊपर से ही सहलाता रहा. उस रात को भी उसने मेरे उभरते हुए नीम्बुओं को खूब दबा दबा कर सहलाया. हालांकि कल कुछ नहीं हुआ था, तो आज मुझे कम डर लगा. चूंकि कपड़ों के ऊपर से किया गया था, इसलिए मुझे कुछ मजा भी आया.

फिर अगले दिन यही काम मुझे पूरी नंगी करके किया. धीरे धीरे एक एक करके मेरे ना करने पर भी मेरे कपड़े उतारता गया.

ऐसे ही यह सिलसिला अब हरेक रात चलने लगा. अब वह खुद भी नंगा हो जाता था और अपना लंड मेरे हाथ में थामकर मुझे कहता था- इसे सहलाओ. मैं तुझे दुनिया की सारी खाने पीने की चीजें लाकर दूंगा.

मुझे पहले अच्छा नहीं लगा, फिर मैं भी उसकी हर बात मानने लगी. उसने मुझसे वादा किया कि वह मेरी चूत में लंड तब तक नहीं घुसाएगा, जब तक मैं ही उससे लंड की मांग न करने लगूं.
मैं उससे कुछ नहीं बोली.
वह बोला- मैं तुझसे ही कहलवा कर छोडूंगा और यह भी की मुझे मालूम है तेरी चूत अभी मेरे लंड को झेल नहीं पाएगी और मैं तुझे दर्द नहीं होने दूंगा.

उसकी इन सब बातों से मुझे अब कुछ ठीक लगने लगा. साथ ही उसने मुझे बसंती की निखरी जवानी और खूबसूरती को लेकर भी बताया कि तूने देखा नहीं कि तेरी बहन कितनी खूबसूरत बन कर गई. ये सब मैंने ही तो उसको चोद कर किया था.

कुछ दिन बाद उसने मुझे लंड चूसना भी सिखाया. मुझे लंड की मालिश करवाता. लंड की मुठ मरवाता. मेरे हाथ उसके माल से सन जाते तो मुझे लंड के माल को टेस्ट करने का भी कहता. मुझे भी उसके लंड के माल को खाने की आदत हो गई थी.

बस अब मैं उसके साथ सोने का पूरा आनन्द बिना डरे लेने लगी. वह मुझे अपना लंड चुसाता. मैं हँसते खेलते उसके लंड को मुँह में पेल कर ख़ुशी से चूसती रहती थी.

वह अब मेरी चूत को ऊपर से सहलाता और थोड़ी थोड़ी उंगली अन्दर को भी घुसाया करता था. बीच बीच में मुझे अपनी छाती से चिपटा लेता था

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