मेरी चालू बीवी लंड की प्यासी-5

मैं, मेरी बीवी और पापा ने मिल कर एक प्लान बनाया जिसके मुताबिक मैंने मेरी चालू बीवी की चुदाई मेरी मां के सामने करनी थी. हमने यही किया और मां ने हमें देख लिया.

दोस्तो, मैं आशीष एक बार फिर से आपके समक्ष हूं अपनी कहानी का पांचवा भाग लेकर!

कहते हैं कि अगर घर में औरत ठीक मिल जाए तो घर सोना बन जाता है. यह बात सही है कि लवली ने जिस क्षेत्र में कदम रखा उसमें सफलता प्राप्त करके यह साबित कर दिया कि औरतों के आगे आदमी कुछ नहीं कर सकता.

उसके दिमाग का मुकाबला कर सकने वाली शायद ही कोई दूसरी लड़की होगी. वह अच्छी तरह जानती थी कि वह किस आदमी को किस तरीके से पा सकती है. ऐसा काम इतने बेहतर ढंग से कोई और नहीं कर सकता था.

जैसा कि आपने कहानी के इससे पिछले वाले भाग
मेरी चालू बीवी लंड की प्यासी-4
में पढ़ा कि मेरे पापा और मेरी बीवी के जिस्मानी रिश्ते और गहरे होते जा रहे थे. मेरी बीवी की चूत के दीवाने मेरे पिताजी अब मेरी सेटिंग मेरी मां के साथ करवाने के लिए तैयार हो गये थे.

मेरे पापा मेरी बीवी की चूत के जाल में इस कदर फंस चुके थे कि वो उसकी चूत का स्वाद पाते रहने के लिए कुछ भी कर सकते थे. मगर मां की चूत तक पहुंचना इतना आसान नहीं था.
इसके लिए हम तीनों ने मिल कर एक प्लान बनाया जिसके मुताबिक मैं और मेरी बीवी मेरी मां के सामने चुदाई करने वाले थे. जब हम दोनों घर के पीछे वाले कमरे में चुदाई कर रहे थे मां ने हमें देख लिया.

फिर अगले दिन भी हमने वैसा ही किया. दो दिन तक हम मियां बीवी की चुदाई का खेल अपनी मां को दिखाते रहे. अब बारी थी पापा के रोल की. पापा को अब मम्मी की चुदाई करनी थी जैसा कि लवली का प्लान था.

उस दिन पापा ने मम्मी को दिन में चोदने का प्लान बनाया. पापा ने मम्मी को चोदने से पहले लवली को कॉल कर दिया. दस मिनट बाद मैं पहुंच गया.

लवली ने मुझे पहले से ही कह दिया था कि आप जायें तो कुछ देर वहीं पर खड़े होकर मां और पापा की चुदाई देखते रहना. जब मां भी आपको देख रही हो तो उनके सामने ही आप उनको देख कर मुस्करा देना.

पापा को लवली ने कह दिया था कि मम्मी के नीचे के कपड़े उतार कर उनको नंगी कर देना और उनकी चूत को चाटने में ज्यादा समय लगा देना ताकि आशीष को उनकी चूत को निहारने का ज्यादा समय मिल सके.

इस तरह लवली के प्लान के मुताबिक मैं भी पहुंच गया था. उस वक्त मां अपने पैर फैलाये हुए लेटी हुई थी. पापा उनकी चूत को चाटने में लगे हुए थे. मम्मी की चूत के बाल काफी बड़े हो गये थे. मैंने पहली बार मम्मी की चूत देखी थी. मैं मम्मी को चूत चटवाते हुए देखने लगा.

आज तक मैंने मम्मी को कभी भी इस तरह से नहीं देखा था. मेरी नज़र उनकी चूत से हट ही नहीं रही थी. उनकी चूत को देख कर मेरा लन्ड टाइट हो गया.

मुझे देखकर मां ने पैरों को मोड़ दिया और उठने लगी लेकिन पापा उनके ऊपर चढ़ गये. मैं मम्मी को देख कर मुस्कुरा कर कुछ कहे बिना वापस लौट आया और दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया और उन दोनों की बात सुनने लगा.

मम्मी बोली- मैंने मना किया था कि आप रात में करना, लेकिन आप को ना जाने कितना मन करता है चोदने का. अभी कुछ देर पहले ही आशीष यहां खड़ा हुआ था और मुझे देख कर मुस्करा रहा था.

पापा बोले- इतने सुन्दर माल की चुदाई जब आंखों के सामने हो रही हो तो कौन नहीं मुस्कराएगा.
मम्मी बोली- आपको मजाक लग रहा है लेकिन अब मैं उसके सामने कैसे जाऊंगी? कल ही वो लवली को पीछे वाले रूम में ले जाकर चोद रहा था और आज मुझे ऐसे देख कर मुस्करा रहा था जैसे मैं उसकी मां नहीं बल्कि कोई लड़की हूं.

इस बात पर पापा बोले- तो क्या हुआ, तुम लड़की ही तो हो.
फिर वो मां की चूत में लंड डाल कर हिलाने लगे.

तभी लवली बोली- अब मैं जाती हूं.
लवली अंदर पहुंच गई. तभी एकदम से लवली को देख कर मां आनन-फानन में खुद को ढकने लगी और पापा से बोली- आपके लिए खाना लाऊं क्या?
मगर पापा ने चुदाई नहीं रोकी और लवली मां को देख कर मुस्करा कर बाहर आ गयी.

बाहर आकर वो बोली- अब हम लोग चुदाई करेंगे. जैसे ही मां बाहर आयेगी तो आप मुझे चोदना शुरू कर देना. उनको भी ये अहसास दिलाना है कि घर में चुदाई का कोई समय और कोई रिश्ता नहीं होता है. बस केवल मर्द और औरत के बीच में चुदाई की ही रस्म चलेगी.

मैं बोला- लेकिन उससे क्या होगा?
लवली- इससे होगा ये कि जब तुम मम्मी की चूत मारोगे तो उससे पहले मम्मी को बेशर्म बनाना पड़ेगा तभी तो वो तुमसे चुदाई करवायेगी. उसके लिए कुछ तो करना होगा न.

इतना सब होने के बाद अब वह ये भी नहीं कह सकती है कि तुम लोग हरामी हो गये हो क्योंकि मम्मी खुद ही पापा के लंड से चुदते हुए रंगे हाथ पकड़ी जा चुकी है. अब वो ये भी जान चुकी है हम दोनों उनको चुदते हुए देख कर बेशर्म हो चुके हैं.

जब हम दोनों भी उनके सामने इसी तरह से चुदाई करेंगे तो उनको भी इसी बात की आदत हो जायेगी. जिससे वो भी धीरे धीरे खुलने लगेगी और ओपन हो जायेगी.

लवली ने फिर अपनी साड़ी को ऊपर कर लिया और अपनी चूत को मेरे मुंह पर रख कर रगड़ने लगी और बोली- राजा जी, अब मेरी चूत के पानी को चाट लो. मैं लवली की चूत पर मुंह लगाकर उसकी चूत के रस को चाटने लगा. लवली मेरे मुंह को अपनी चूत में घुसाने लगी.

इसी बीच लगभग 10 मिनट के बाद मम्मी भी आने लगी. मम्मी के पास पहुंचने की आहट सुनकर लवली जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी- आह्ह चाटो जान, और तेज से चाटो. आह्ह मैं तो पागल हो जाऊंगी. ओह्ह . आह्ह चाटते रहो मेरी चूत को. चाट चाट कर मेरी चूत का पानी खत्म ही कर दो आज तुम.

फिर मम्मी के रूम में घुसने के साथ ही वो जोर जोर से सिसकारते हुए कहने लगी- आह्ह फक मी जान, चोद दो मुझे.
इतने में ही मां भी देखने लगी. मां ये सब देख कर वापस चली गयी.

मां के जाने के बाद हम भी उनकी बातें सुनने के लिए पहुंच गये.
पापा के पास मां जाकर बोली- आशीष और लवली दोनों अब दिन में भी चुदाई करने लगे हैं. वो लाज-शर्म सब कुछ भूल गये हैं. कभी किचन में तो कभी बाथरूम में आशीष अपनी बीवी को ले जाकर चोदता रहता है.

पापा बोले- तो क्या हुआ, पत्नी है उसकी. जैसा वो करना चाहे वैसा कर सकता है.
मां बोली- वो सब तो ठीक है लेकिन मेरे दिमाग में भी उन दोनों पति पत्नी की चुदाई घूमती रहती है.
पापा बोले- कोई बात नहीं, अगर तुम्हारा देखने का मन किया करे तो तुम भी देख लिया करो. इसमें कोई हर्ज नहीं है.

मां बोली- आपको भी बिल्कुल शर्म नहीं रह गयी है. बेटा खुले घर में अपनी बीवी को चोद रहा है और आप मुझे भी देखने के लिए कह रहे हो!
पापा बोले- इसमें शर्म की क्या बात है. तुम उसको बेटा नहीं मान कर कोई जवान लड़का मान लो. ये तो केवल हमारे दिमाग की सोच है कि वो बेटा है, आखिर में तो वो भी एक मर्द ही है और उसकी बीवी एक औरत ही है.

मम्मी बोली- मगर ऐसे खुले में तो अच्छा नहीं लगता है न.
उस दिन के बाद से हम दोनों मां के सामने चुदाई करते रहते थे और मां देख कर चली जाती थी. ऐसा लग रहा था जैसे अब मां के लिए भी यह सब एक आम बात हो गयी है.

हम दोनों ने पापा से भी कह दिया कि वो मां को दिन में ही चोदना शुरू कर दें. पापा ने वैसा ही प्लान किया. पापा ने मुझे चुदाई के प्लान के मुताबिक घर से बाहर भेज दिया और लवली को सोने के लिए बोल दिया और हमसे बोले कि मैं तुम्हारी मां की चुदाई शुरू करने से पहले तुम्हारे पास फोन कर दूंगा.

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