दोस्त की जुगाड़ भाभी की डबल चुदाई

मेरे प्यारे दोस्तो, कैसे हो आप सब … मैं आपका दोस्त शिवराज एक बार फिर से एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ. आप सबका जो प्यार मुझे मिला, वो ऐसे ही देते रहना.

इस बार मैं आपको एक हसीन हादसा, जो मेरे साथ हुआ, उसके बारे में बताना चाहता हूँ. ये बात इसी साल दिसंबर के आखिरी की है. मेरी बीवी सर्दियों की छुट्टियों में अपनी माँ के घर गयी हुई थी. मैं घर पे अकेला था. दस दिनों तक मुझे अकेला ही रहना था.

मैं रात को खाना खाने के बाद फेसबुक सर्फ कर रहा था, तो एक दोस्त मुझे ऑनलाइन देख कर मुझसे चैट करने लगा.
उसका मैसेज आया- कैसे हो भाई? क्या हो रहा है? इतनी रात को ऑनलाइन क्या कर रहे हो?

उससे ऐसे ही नॉर्मली बात होने लगी, तो मैंने बताया कि यार तेरी भाभी मायके गई हुई है, सो कोई शिकार फंसाने की कोशिश कर रहा हूँ … हाहाहा.
वो भी हंसने लगा और बोला- यार मैं भी अकेला हूँ.
फिर वो बोला- मैं कॉल करता हूँ.

हम दोनों फ़ोन पे बात करने लगे कि न्यू ईयर का क्या प्लान है, पार्टी करते हैं.
मैं बोला- ठीक है … पार्टी साथ में कर लेते हैं. इस बार चुदाई वाली पार्टी रखो, कोई लौंडिया हो, तो बुला लो, उसी के साथ दोनों भाई मस्त दारू पी पी कर रात भर चुदाई करेंगे.
वो बोला- यार बात तो सही है, चलो देखते हैं कोई जुगाड़ मिलती है तो बताता हूँ. तुम भी देखो कोई तुम्हारी जुगाड़ हो, जो दोनों के साथ चुदाई कर सके.

थोड़ी देर बात कर के हम लोग सो गए.

अगले दिन शाम को फ़ोन आया. उसने पूछा- कहां हो … किदवई नगर आ जाओ … कुछ बात करनी है.
मैंने बोला- ठीक सात बजे तक मिलता हूँ.

मैं सात बजे उधर पहुंचा, तो वो कार में बैठा था. उसके साथ एक भाभी भी बैठी थी, जिसकी उम्र करीब तीस साल की रही होगी. वो ग्रीन साड़ी और जैकेट में थी. मैं उसकी पीछे वाली सीट पर बैठ गया.

उसने मेरा परिचय करवाया. उसका नाम मिशी था. उसने हाथ मिलाया तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर हैलो बोला और कहा- आप तो बहुत खूबसूरत हैं.

उसने थैंक्स कहा और बोली- आपका दोस्त अभी आपकी बहुत तारीफ कर रहा था.
मैंने बोला- अच्छा जी … सही है और बताइये क्या प्लान है?
वो बोली- मेरा कोई प्लान नहीं है, मैं तो फ्री हूँ. आप लोग बताओ.
मैंने कहा चलो- फिर पार्टी करते हैं.
भाभी बोली- ठीक है.

हम लोगों ने रम की दो बोतल खरीद लीं.

भाभी बोली- रम ठीक ले ली, ठण्ड है इसमें मजा आएगा.
फिर मैंने पूछा- यार आपकी कोई सहेली नहीं है, उसको भी बुला लो, फिर ज्यादा मजा आएगा.
इस पर वो बोली- अब इस टाइम तो कोई नहीं होगी, मैं फिर कभी बुलवा लूँगी. आज मैं अकेली ही तुम दोनों के लिए काफी हूँ.

इतना कह कर वो अश्लील हंसी हंसने लगी. हमने खाना पैक करवाया और दोस्त के घर की तरफ चल दिए.

करीब नौ बज गए थे. सर्दी के कारण मस्त कोहरा पड़ रहा था, ठण्ड भी जबरदस्त थी. हम लोग घर पहुंचे, तो दोस्त ने फटाफट एक एक पैग बनाया और हम लोग पीने लगे.

एक टाईट सा पैग पी कर थोड़ा राहत मिली और हम लोग रजाई लेकर बेड पर बैठ गए. मेरा दोस्त उस भाभी को किस करने लगा. वो भी पूरा साथ दे रही थी. वे दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे. मेरा दोस्त उसकी जीभ को अपने मुँह में पकड़ कर चूस रहा था, जिसे देख कर मेरा भी लंड खड़ा होने लगा. मैंने भी पीछे से उसे पकड़ लिया और उसके बूब्स दबाते हुए उसकी गर्दन में किस करने लगा.

वो भी दारू के एक पैग से मस्त होने लगी थी और धीरे धीरे पूरी तरह से गर्म होना शुरू हो गई थी.

तभी वो अचानक से पलटी और मेरे होंठों को चूसने लगी. कसम से जन्नत का मजा आ रहा था, करीब दस मिनट तक हम लोग उसको बारी बारी से किस करते रहे. उसके मम्मों को रगड़ते रहे.
अब मेरा दोस्त खड़ा हुआ और पैग बनाने लगा. हम दोनों को पैग देते हुए बोला- लो खींचो … इससे और मजा आएगा.

हम दोनों अपना अपना पैग खत्म करने लगे. मेरा दोस्त बोला- पहले एक एक राउंड चुदाई कर लेते हैं, फिर खाना खाया जाएगा.

चूंकि वो भाभी भी बहुत गर्म हो चुकी थी और हम दोनों भी बिना चुदाई किए रह नहीं सकते थे. हम लोग एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे.

तब तक मेरे दोस्त ने एक एक पैग और बना दिया और बोला- चुदाई करते हुए ये पैग खत्म करना है.

उसकी बात मान कर भाभी और मैंने पैग उठाया और एक एक सिप लेकर हम लोग काम पे लग गए.

भाभी तो मानो सदियों से चुदाई के लिए प्यासी थी. वो नशीली आवाज में बोली- मैंने जिंदगी में बहुत चुदवाया है, पर आज जो मजा चुदाई से पहले आ रहा है, वो कभी नहीं आया.
मैंने बोला- मैडम अभी तो प्रोग्राम शुरू हुआ है … सुबह हमारी चुदाई के नंबर देना. अभी तो बस लंड से मजे करो.

मेरे दोस्त ने अपना लंड उसके मुँह के सामने रख दिया. उसने तुरंत लंड को हाथ में लिया और मुँह से लंड चूसना आरम्भ कर दिया.

अब तक मैं भी नंगा हो चुका था तो मैंने भी अपना लंड उसके मुँह के पास किया. उसने मेरा लंड भी पकड़ लिया और सुपारे पर जीभ फेरते हुए चूसने लगी. वो मस्त रांड थी … साली हम दोनों के लंड एक साथ और बारी बारी से चूसने लगी.

तभी मैं नीचे को हुआ और उसकी मस्त चिकनी चुत को चाटने लगा. जैसे ही मैंने चूत चाटना शुरू किया, वो मेरे सर को जोर जोर से अपनी चुत पे दबाने लगी. उसने अपनी टांगें पूरी तरह से खोल कर मेरी जीभ को चूत चाटने की आजादी दे दी थी. वो मस्ती में अपनी आंखें बंद किए हुए चुत चटवा रही थी. साथ ही मेरे दोस्त का लंड भी चूस रही थी.

बड़ा मादक नजारा था दोस्तो … मैं उस मजे को शब्दों में बयां नहीं कर सकता.
जब मेरे दोस्त से बर्दाश्त नहीं हुआ, तो मुझसे बोला- अबे तू हट … मुझे इसकी चुदाई शुरू करने दे.

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