विधवा की प्यासी चूत

क्या नज़ारा था … कोई देखता तो देखता ही रहता.

वो बोली- आज आठ साल हो गए प्यासी चूत को बिना चुदे. इतने दिन बाद आज जिंदगी जीने को मिली है. ऑफिस के कई लोग मुझे चोदना चाहते थे, लेकिन हिम्मत नहीं हुई किसी के साथ कुछ करने की … पर पता नहीं मैंने तुम में ऐसा क्या देखा कि तुम्हें मना नहीं कर पायी.
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों पर कसते हुए कहा- बस अब सब कुछ भूल कर इस पल का मजा लो.

उसको मैंने सीधे लिटा कर उसकी प्यासी चूत को चाटना शुरू कर दिया.

वो टांगें फैला कर गांड उठाते हुए ‘सीईई सीईई …’ करके मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं भी मस्त होकर उसकी प्यासी चूत में जीभ डाल कर चूसे जा रहा था. कुछ ही मिनटों में पता ही नहीं चला कि वो कब झड़ गयी. उसका नमकीन पानी मेरे मुँह के स्वाद को मस्त बना रहा था.
झड़ने के बाद वो शांत हो गयी थी.

मैंने पूछा कि क्या हुआ?
वो कुछ नहीं बोली, बस मुस्करा रही थी. मैंने भी अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और उसकी चूत पर रगड़ने लगा. वो भी मेरा लंड अपनी प्यासी चूत में डलवाने के लिए गांड हवा में उठा रही थी.

रेखा बोली- आज फाड़ ही डालो इसको … बहुत साल हो गए … आज तो इतना पानी निकल रहा है कि कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि इसको क्या हो गया.
मैं बोला- आज इसको लंड की महक मिल रही है न … इसलिए रो रही है.
वो हंस कर बोली- हां … ये तो है … कभी कभी मैं इसको अपने हाथों से सहला लिया करती थी … तो जरा सा पानी निकल जाता था, लेकिन आज ये झरना तो रुक ही नहीं रहा. तुमने तो कमाल कर दिया यार … तुम्हारी बीवी बहुत किस्मत वाली है.

बीवी का नाम सुनते ही मैंने एक ही झटके में पूरा लंड उसकी प्यासी चूत की गहराई में उतार दिया. पूरा लंड चूत की जड़ तक घुसा कर मैंने उसको कसके जकड़ लिया. वो लंड घुस जाने से कुछ तेज कराहना चाहती थी, पर मैं रेखा के होंठों को चूसने लगा. इससे उसकी चीख दब कर रह गई.

कुछ पल बाद वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा कर मजा लेने लगी थी. मैं भी उसकी जीभ पकड़ कर चूसने लगा.

कोई पांच मिनट तक मैं चुपचाप लंड घुसाए उसकी जीभ चूसता रहा.

अब वो अपनी गांड हिलाने लगी थी. मैं समझ गया कि अब मुझे क्या करना है. मैंने स्पीड से चुदाई चालू कर दी, वो भी मजे लेकर चूत चुदवा रही थी. हम दोनों दुनिया से बेखबर चुदाई में मस्त थे. मैं उसकी प्यासी चूत में पूरा अन्दर तक लंड पेल कर उसकी मदमस्त चूचियों को भी चूस रहा था और वो भी अपनी चूचियां चुसवाते हुए लंड का मजा ले रही थी.

थोड़ी देर में मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से लंड को उसकी चूत में घुसा दिया. लंड घुसेड़ने के बाद मैं उसके बड़े बड़े चूतड़ों पर थप्पड़ मारता हुआ उसे चोदने लगा. तभी मेरी नज़र उसकी गांड के छेद पर पड़ गई. उसकी गांड का छेद खुल बंद हो रहा था. मेरे सामने उसकी भूरी सी गांड खुली हुई थी.

मैंने अपने लंड को प्यासी चूत में पेले हुए ही अपनी दो उंगलियां उसकी गांड में घुसा दीं और गांड खोदने लगा.

मेरे उंगलियां पूरी तरह से गीली हो गईं. उसकी तरफ से कोई विरोध नहीं हुआ … तो मैं समझ गया कि शायद उसकी गांड भी चुद चुकी थी. मैंने अपना लंड उसकी चूत में चलाना चालू कर दिया और उंगलियों से उसकी गांड को मथने लगा. इसमें उसको उसको डबल मजा मिल रहा था.

वो मस्ती में गालियां देने लगी, रेखा बोली- आंह मादरचोद … कसके चोद साले … आज दिखा दे अपने लंड का जलवा … आह मैं झड़ने वाली हूँ और जोर से चोद मेरे राजा.
मैं भी थक गया था, सो मैंने भी स्पीड बढ़ा दी और उसकी प्यासी चूत में झड़ने लगा. मैंने कंडोम पहना हुआ था, तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी.

वो घोड़ी बनी थी, सो ऐसे ही बिस्तर पर लेट गयी … मैं भी उसके ऊपर ही गिर गया.

थोड़ी देर में दोनों होश में आए. मेरे लंड पर कंडोम चढ़ा था, लेकिन लंड अभी भी खड़ा था.

वो उठी और अपने हाथों से कंडोम निकाल कर कंडोम के ऊपर से मेरे सुपारे को किस किया और मेरे लंड को बड़े प्यार से सहलाने लगी. वो बोली- भूख लग आयी होगी मेरे शेर को …
यह कह कर वो नंगी ही किचन में चली गयी और बियर व खाना लेकर आ गयी.

हम दोनों नंगे ही खाना खाया और बची हुई बियर के कैन पीने लगे.

अब तक हम दोनों थोड़ा फ्रेश हो चुके थे तो दूसरे राउंड की चुदाई के लिए तैयार थे. इस बार उसने मोर्चा संभाला और मेरा लंड मुँह में लेकर जबरदस्त चुसाई शुरू कर दी.

मैंने रेखा को 69 की पोजीशन में ले लिया. अब मैं भी उसकी चूत चाटने लगा और धीरे से एक उंगली उसकी गांड में डाल दी.
वो मजे ले रही थी … बोली- क्या इरादा है मेरी जान?
मैंने कहा- जो तुम्हें अच्छा लगे … वो सब करूंगा.
रेखा बोली- एक बार हस्बैंड ने मेरी गांड मारी तो थी, लेकिन तब बहुत दर्द हुआ था. पर आज तुमको जो दिल करे, वो करो … मैं मना नहीं करूंगी.
मैंने कहा- चलो जान कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं.

हमारी चुदाई शुरू हो गयी. पहले मैंने प्यासी चूत में अपना लंड डाला. जब वो मस्त हो गयी, तो एक एक करके दो उंगलियां उसकी गांड में डाल कर चलाने लगा. उसकी चूत के साथ साथ गांड में हाथ चल रहा था.

थोड़ी देर मैंने अपना लंड चूत से निकाल कर उसकी गांड में घुसा दिया. आह बहुत टाइट गांड थी … उसने मेरी लंड झेल लिया.

उंगलियों का चलना अब उल्टा हो चुका था. मेरा लंड रेखा की गांड में था और उंगलियों से उसकी चूत की मस्त चुदाई कर रहा था. वो भी जन्नत के मजे ले रही थी. जो लोग ऐसी चुदाई कर चुके हैं. वो समझ सकते हैं कि ऐसी चुदाई में कितना मजा आता है.

करीब आधे घंटे तक नॉन स्टॉप चुदाई में वो दो बार झड़ी थीं. अब जान नहीं बची थी. एक बार मैं फिर से झड़ा.

अब हम दोनों लस्त हो चुके थे, ऐसी दमदार चुदाई के बाद कैसी हालत होती है, ये किसी को बताने की जरूरत नहीं है.

एक घंटे सोने के बाद हम दोनों जग गए. फिर वो कॉफी बना कर लायी. हम दोनों ने कॉफी पी. हम दोनों अभी भी नंगे थे. शाम के 5 बज चुके थे.

फिर मैंने पूछा- और कुछ?
वो बोली- बस अब जान नहीं बची.
मैंने कहा- जानेमन कोई बात नहीं, मैं तुम्हारे अन्दर थोड़ी सी जान डाल देता हूँ.
वो हंसने लगी और बोली- कितना चोदोगे यार.
मैंने कहा- आज चोद लेने दो … इतने दिनों से तड़पाया है, आज पूरा बदला लेना है.

मैं फिर से उसकी चूत चाटने लगा. दस मिनट की चूत चुसाई से वो भी जोश में आ गई. हम दोनों के तीसरे राउंड की चुदाई के लिए हम दोनों फिर से तैयार हो गए थे.

फिर मैं काफी देर तक जम कर कभी चूत कभी गांड को बारी बारी से चोदता रहा. वो भी पूरा साथ दे रही थी.

अब तक 6.30 बज चुके थे. आज की चुदाई से हम दोनों पूरी तरह से थक चुके थे.

फिर उसने मुझे विदा किया.

दोस्तो, ये थी एक विधवा की प्यासी चूत की अगन … कैसे मैंने विधवा को सुहागन होने का अहसास करवाया. आपको कैसी लगी मेरी ये सच्ची चुदाई की कहानी. बताना जरूर … मैं आपके मेल का इंतज़ार करूंगा.
आपसे मैं जल्दी ही एक नई कहानी के साथ मिलता हूँ.
आपका दोस्त शिव राज सिंह

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