गर्लफ्रेंड की सहेली की प्यास बुझाई

तू तो दोस्त है ना मेरी, बस एक बार चुदवा लेने दे राहुल से मुझे। मैं तुम दोनों के बीच कभी नहीं आऊँगी।

काजल चुप रही तो जया उसकी चुचियाँ चूसने लगी। अब उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी। जल्दी ही दोनों गर्म हो चुकी थीं।

इधर मैं लेटा हुआ दोनों को देख रहा था। थोड़ी देर एक दूसरे को गर्म करने के बाद दोनों मेरे पास आईं। मैं वर्णन नहीं कर सकता वो नज़ारा कितना सेक्सी था। मेरे सामने दो दो हसीनाएं बिना कपड़ों के एक साथ खड़ी थीं। उनके चार बड़े बड़े ख़रबूज़े उनके शरीर को और भी मादक बना रहे थे।

और तो और दोनों के ही चूत पर बाल नहीं थे; शायद दोनों ने ही साफ करवाये थे।

वो दोनों मेरे पास आईं और काजल अपनी चूत मेरे मुंह पर रखकर बैठ गई और और खुद जया की चूत चाटने लगी। उधर जया मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर चूसे जा रही थी।

आप कल्पना कीजिये कि हम तीनों की क्या हालत थी।

जल्दी ही काजल झड़ गई मेरे ऊपर ही; मैं सारा पानी पी गया। मगर मैं अभी नहीं झड़ा था, तो वो मेरे मुंह से उतरी और जया के साथ मिलकर मेरा लण्ड चूसने लगी। एक मेरा टोपा चूसती तो दूसरी मेरे ट्टटों को खा रही होती थी।

वो आनन्द शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल है।

खैर इतनी ज़्यादती के बाद तो मेरा झड़ना भी तय था और दोनों ने ही चाट चाट कर सब साफ़ कर दिया।

हम तीनों लेट गए और कुछ देर बाद मैं उठा और पूछा कि पहले किसे चोदूँ।
दोनों कह रही थीं कि पहले मुझे, पहले मुझे।
आखिरकार तय हुआ कि मैं काजल को पहले चोदूंगा।

अब काजल सामने आकर लेट गईं। मैंने अपने लण्ड का टोपा उसकी चूत पर रखा और धीरे से धक्का दिया। चूत पहले से ही गीली थी, तो उसकी ज़रा सी सिसकारी के साथ ही आधा अन्दर चला गया।

वहीं काजल और जया दोनों एक दूसरे की चुचियाँ 69 जैसी ही मुद्रा में चूसने में लगी थीं। अगली बार पूरे ज़ोर से मैंने धक्का मारा और काजल का मुंह खुल गया। अब मैं पूरे जोश में आकर काजल को चोदने लगा था।

नीचे से जया उसकी चूचियाँ चूसकर उसे मज़े दे रही थी। इतने आनंद के कारण वो ज़ोर ज़ोर से सीत्कार कर रही थी।

लगभग पांच मिनट की चुदाई के बाद काजल झड़ गई। अब वो शिथिल हो गई थी।
तो बारी जया की थी; अब वो सामने आ गई और मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई। और अपनी चूत को मेरे खड़े लण्ड पर सेट करते हुए बैठ गई, घप्प… और पूरा लण्ड एक ही बार में अंदर था।
अब वो उछल उछल कर चुद रही थी।

थोड़ी देर में काजल भी गर्म हो गई। अब वो आई और मेरे मुंह पर बैठ गई और खुद जया को किस करने लगी। दोनों बीच बीच में एक दूसरे की चूचियाँ पी रही थीं। मैं यहां जन्नत में था।

पर जल्दी ही दोनों का वजन मुझ पर असर डालने लगा

तो मैंने उन्हें रोका और अब मैं उठ खड़ा हुआ। जया को मैंने पीठ के बल लिटाया। और मैं सामने से उसकी चूत चोदने लगा। वो आवाज़ें निकाल रही थी। काजल उसकी चूची पी रही थी। ये चुदाई लगभग छः सात मिनट चली।

जया एक बार झड़ चुकी थी। अब मैं भी झड़ने वाला था।

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और जया के ऊपर झड़ गया। काजल उसे चाटने लगी।

उसके बाद जया उठी और फिर दोनों ने ही मेरा लण्ड चाटकर साफ़ कर दिया। पर ये अभी भी खड़ा था.
मैं ही थक गया था तो मैं लेट गया।

मैंने कहा कि भूख लगी है!
तो जया बोली- हम दोनों का ही दूध है पी लो!

पर मुझे सच में काफ़ी भूख लगी थी, तो काजल रसोई में गई और हम तीनों के लिये मैगी बनाई। हम तीनों ही नंगे बैठकर खा रहे थे।

काजल मेरी गोद में बैठी थी। मैं बीच बीच में उसकी चुचियाँ भी चूस रहा था।

मेरा लण्ड अब खड़ा हो चुका था, मैं काजल से बोला- तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ।
यह सुनकर उसने मुझे गुस्से में देखा।
मैं- प्लीज़ यार, एक बार!
काजल- पर बहुत दर्द होगा।

जया- अरे पागल सिर्फ एक बार दर्द होगा, फ़िर तू ख़ुद गांड मरवाती फिरेगी।
मैं- प्लीज़।
काजल- लेकिन सिर्फ़ एक बार।

मैं बहुत खुश हुआ। अब मैंने काजल को लिटाया और उसे गर्म करने के लिए उसकी चूत चाटने लगा। जल्दी ही उसकी आवाज़ें निकलने लगीं।

उधर जया अपनी चूत में उंगली कर रही थी। मैं अब रुका और काजल को पेट के बल लिटा दिया। उसकी गोरी गांड मेरे सामने थी। मैंने कोशिश की घुसाने की पर सब बेकार … छेद बहुत तंग था।

तो मैंने जया को उसमें सरसों का तेल लगाने को कहा।
जया कमर मटकाते हुए हुए गई और तेल ले आई, आते ही उसने उंगली में ज़रा सा तेल लगाया और उंगली सीधा काजल की गांड में घुसा दी।
काजल चिहुंक उठी। अब जया ने ढेर सारा तेल उसकी गांड में और ऊपर लगा दिया, और मेरे लण्ड पर भी तेल की मालिश कर दी।

अब मेरी बारी थी, मैंने अपना लौड़ा सेट किया और धीरे से धक्का दिया, तो गांड का मुंह खुल गया। अब फिर से धक्का दिया तो एक इंच घुस गया। उधर काजल चिल्लाने लगी। तो जया उसकी चुचियाँ चूसने लगी।

धीरे धीरे जब वो शांत हुई तो मैंने जया को इशारा किया।
जया उसके होठों को चूसने लगी। बारी मेरी थी तो मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा। आधे से ज़्यादा लण्ड घुस गया और उधर काजल छटपटाने लगी, वो ज़ोर ज़ोर से हाथ पटक रही थी, जया के चूसने के कारण चिल्ला नहीं पा रही थी।

उसने काफ़ी कोशिश की अपनी गांड को आगे करके लण्ड बाहर निकालने की, लेकिन मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ रखा था। तो उसकी हर कोशिश बेकार हुई।

धीरे धीरे जब उसने चिल्लाना बन्द किया तो मैंने धीरे धीरे अपना लण्ड आगे पीछे करना शुरू किया, उसकी गांड तंग थी, पर तेल के साथ कम दिक्कत हो रही थी। जल्दी ही उसने मेरा साथ देना शुरू कर दिया और मेरे साथ साथ अपनी कमर हिलाने लगी।

धीरे धीरे मैंने भी रफ़्तार पकड़ ली। हालांकि पूरा लौड़ा अब भी नहीं गया था, पर मैंने कोशिश छोड़ दी, मैं काजल को चोट नहीं पहुंचाना चाहता था।

जया अब काजल की चूचियाँ पी रही थी और काजल चिल्लाए जा रही थी।

उसकी गांड काफ़ी तंग थी तो मैं भी ज़्यादा देर टिक ना सका, 7-8 मिनट के बाद मैं काजल की गांड में ही झड़ गया।

अब मैं सचमुच थक चुका था, मैं लेट गया। और अब दोनों 69 की मुद्रा में आकर एक दूसरे को चूस रही थीं।
दोनों ने थोड़ी ही देर में एक दूसरे को झाड़ दिया।

हम तीनों ही लेट गए, हम सबको नींद आ ही जाती पर तभी मुझे होश आया और मैंने उन दोनों को कपड़े पहनने को बोला। हम कोई भी खतरा नहीं उठा सकते थे। तो बाथरूम में जाकर हम सबने एक दूसरे को साफ़ किया और वापस आकर कपड़े पहने।

फिर काजल ने दर्द की एक गोली खाई और फ़िर वो दोनों एक कमरे में गईं सोने।

मैं जानबूझकर हॉल में सोफ़े पर ही सो गया। आखिर घरवालों की नज़र में बढ़िया भी तो बनना था।

हुआ भी वही, सुबह काजल की मम्मी और बड़ी मम्मी आईं। मुझे सोफ़े पर लेटा हुआ देखकर मुझे जगाया और फ़िर कहने लगीं- बेटा कमरे में सोना चाहिये था।

मैं- अरे नहीं आंटी, ये ठीक था।
तो वो काजल को डांटने लगीं कि मुझे सोफ़े पर क्यों सोने दिया।
काजल मासूम बनकर बोली- मैंने तो बहुत कहा पर इसे यहीं सोना था तो मैं क्या करूँ।

बस फ़िर क्या था, वही तारीफों का दौर, संस्कारी लड़का वगैरह वगैरह।
मुझे नाश्ता करने के बाद विदा मिली।

अब काजल की मम्मी खुश थीं, काजल और जया बहुत खुश थीं।
और मैं?
मैं तो सबसे ज्यादा खुश था.

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