फैमिली सेक्स कहानी: चुदक्कड़ चाची

नमश्कार दोस्तो, मेरा नाम यशार्थ सिंह है, मेरी उम्र 20 साल है। आज आप सभी के सामने एक काल्पनिक फैमिली सेक्स कहानी बताने जा रहा हूँ, अगर कुछ गलत हो तो माफ कर दीजियेगा। पहली बार कहानी लिख रहा हूँ।

यह कहानी एक प्यासी और चुदक्कड़ चाची की है। आगे की कहानी उन्ही के लबों से सुनते हैं।

मेरा नाम रागिनी दुबे है। मेरे बदन में हमेशा कामरस बहती रहती है। बहुत चुदाई होने के बावजूद भी मेरा तन प्यासा ही रहता है। मेरे गोरे – गोरे बूब्स किसी के मुँह में पानी ला दे, मेरी पतली कमर मक्खन की तरह है जो भी देखे फिसल जाए। जब भी चलती हूँ, छोटे तो छोटे … 80 साल के बुड्ढों के लंड में भी पानी आ जाता है।

अपने बदन की नुमाइश में मैंने अपनी उम्र ही नहीं बताई. वैसे मेरी उम्र 26 साल है और मेरे फिगर का साइज 30-26-32 है।

मेरे पति का नाम राजीव है, उनकी उम्र 30 साल है। मेरे ससुर जी का देहांत हो चुका है लेकिन मेरी सास हम लोगों के साथ ही रहती है। मेरे पति के एक बड़े भाई हैं, उनका नाम रमेश दुबे है 52 साल के हैं. उनकी पत्नी मतलब मेरी जेठानी की उम्र 50 साल है।

मेरे जेठ जी के बेटे का नाम देव हैं। 22 साल का जवान और कसरती बदन का मालिक है. उसे देखते ही मेरी चुत अपने आप पानी छोड़ देती है।

अब मैं असल कहानी पर आती हूँ।

बात आज से तीन साल पहले की हैं, 2016 जनवरी की जब मेरी शादी हुई थी। सुहागरात की रात मुझे पता चला कि मेरे पति का लंड सिर्फ 3 इंच का है। तभी मेरा दिमाग खराब हो गया, मेरे सारे अरमानों पर पानी फिर गया।
अब मैं करती भी क्या?? अब तो मुझे झेलना ही था।

दो-तीन महीनों तक किसी तरह मैंने बर्दाश्त किया लेकिन मेरी चूत को अब दमदार चुदाई की जरूरत थी लेकिन चोदने के लिए कोई नहीं था। मेरी चुत हर रात प्यासी ही सोती।

मेरे जेठ जेठानी का बेटा देव गर्मी की हॉलिडे की वजह से घर आ गया था। उसको देख कर मेरी चुत को भी मस्ती आ रही थी। मेरी जेठानी-जेठ जी गांव चले गए थे। गांव में खेती की वजह से उन्हें जाना पड़ा था। यह मेरे लिए भी अच्छा था।

अक्सर देव मुझे हवस की नज़रों से देखता था। जब मैं झुकती तो वह मेरी चुचियों को ऐसे देखता जैसे अभी इनको चूस कर सारा रस पी लेगा।
उसकी ज़्यादातर नज़र मेरी संतरे जैसे चुचियों पर ही रहती थी।

अब मैं स्लीवलेस वाले ब्लाउज और पारभासी साड़ी पहनती थी ताकि उसे अपना, अपने जिस्म पूरा गुलाम बना सकूं। कभी कभी वह भी मेरी गांड पर अपना हाथ फिरा देता, अपनी कोहनी से कभी कभार मेरी चुचियों को भी दबा देता।

एक बार वो पेशाब कर रहा था। वाशरूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला था या उसने अपना लंड दिखाने के लिए खोल रखा होगा। उस खुले दरवाजे से उसका लंड साफ-साफ दिख रहा था। उसके लंड को देखकर मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया।
देव का लंड करीब 8 इंच का था।

मैं बाहर खड़ी हूँ … शायद यह बात उसको पता चल गई, उसने अपने कपड़े ठीक किये, फिर बाहर आ गया।
मैं वहीं खड़ी थी.

बाहर आते ही उसने बोला- सॉरी चाची!
मैंने उससे कहा- कोई बात नहीं देव, अगली बार से ध्यान रखना।

फिर उस दिन के बाद से वह कुछ ज़्यादा ही मुझ से चिपकने लगा। वो किसी ना किसी बहाने मुझे छू लेता और सच कहूँ तो उसके छूने से मेरी चुत में खलबली मच जाती। अब मैं किसी भी हाल में उससे चुदना चाहती थी।

मैं नहा कर निकली और आईने के सामने खड़े होकर अपने नंगे बदन को निहारने लगी। मेरे उठे हुए स्तन बतला रहे थे कि इन पर किसी गैर का हाथ लगने वाला है, मेरी योनि भी दूसरे लिंग की ख़ुशी में नीर बहा रही थी।

एक दिन मेरे पति को ऑफिस के काम की वजह से दो-तीन दिन के लिए शहर से बाहर जाना पड़ा। घर में सिर्फ मैं, मेरी सासु माँ और मेरा भतीजा देव था। यह मेरे लिए अच्छा मौका था उससे चुदवाने के लिए। सासु माँ को शूगर यानि डायबीटीज़ और नींद नहीं आने की बीमारी है।

सुबह नाश्ता करने के बाद देव अपने दोस्त के घर चला गया। सासु माँ भी खाना खाने के बाद शूगर और नींद की गोलियों को खाकर सो गई थी।

उसके बाद मैंने लाल-पीले रंग की पारदर्शी साड़ी, लो कट ब्लाउज, सेक्सी ब्रा और काली रंग की पैंटी पहनी। अब मेरी आधी चुचियाँ दिख रही थी और मेरी साड़ी गांड से चिपक कर एक अच्छा आकार दे रही थी।

दोपहर को वह अपने दोस्त के घर से आया।
मैं- क्यों देव, इतनी देर क्यों हो गयी तुम्हें आने में?
देव- हाँ चाची, थोड़ी देर हो गयी … सॉरी!!

फिर उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोला- ‘चाची आज तो आप कयामत लग रही हो, कहीं जा रही हो क्या?
मैं- कहीं नहीं जा रही हूँ, बस थोड़ा तैयार हो ली। क्यों अच्छी नहीं दिख रही हूँ क्या?
देव- नहीं चाची, ऐसी बात नहीं हैं। मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा हूँ। लेकिन कुछ भी हो आप आज बहुत खूबसूरत दिख रही हो। लेकिन हमारी किस्मत में कहाँ ऐसी खूबसूरती!
मैं- ऐसी बात नहीं है, तुम भी अपने चाचा के ही भतीजे हो। तुम्हारा भी उतना हक़ है मुझ पर जितना तुम्हारे चाचा का। अच्छा यह बताओ पहले पानी पियोगे या खाना खाओगे?

देव- चाची, सबसे पहले पानी पिलाओ, फिर बाद में खाना खाऊंगा।

मैंने कहा- ठीक है, अभी लाती हूँ।
अब मैं अपनी चुतड़ों को कुछ ज़्यादा ही हिलाती हुई रसोई की तरफ गई। फिर मैंने सोचा कि आज तो इसका लंड लेकर रहूँगी।

मैं उसको पानी देने के बहाने थोड़ी झुकी और अपना पल्लू गिरा दिया। अब मेरे 80% चुचे उसे दिखाई दे रहे थे। उसके लंड में भी उभार आ गया था। वह मेरे चुचियों को घूर रहा था। मैंने अपना पल्लू उठाते वक़्त कहा- देखोगे या पियोगे भी?
हड़बड़ी में उसने जवाब दिया- क्या चाची?
मैं- पानी और क्या देव!!

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