दोस्त की जुगाड पत्नी का राज

antarvasna, kamukta मैं जब 5 वर्षों बाद अपने दोस्त संतोष से मिला तो उसकी स्थिति पूरी तरीके से बदल चुकी थी, अब वह पहले वाला संतोष नहीं था उसके पास एक बड़ी सी गाड़ी थी और उसका एक बड़ा सा बंगला था, मेरे तो समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कार संतोष के हाथ इतने पैसे कहां से लग गए। उसने जब मुझे अपने घर पर इनवाइट किया तो मैं अपनी पत्नी के साथ उसके घर पर गया, मैं जब अपनी पत्नी के साथ उसके घर पर गया तो मेरी पत्नी मेरे कान में कहने लगी कि आपके दोस्तों बहुत ही रईस है, मैंने उससे उस वक्त कुछ भी नहीं कहा और उससे कहा कि हम लोग इस बारे में बाद में बात करेंगे। जब मैंने संतोष से इस बारे में पूछा तो संतोष कहने लगा बस यह सब मेरी पत्नी रोशनी की वजह से ही संभव हो पाया है उसने मेरा बहुत साथ दिया है इसीलिए तो आज मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं लेकिन मुझे उसकी तरक्की से खुशी नहीं थी क्योंकि वह हमारे क्लास में सबसे नालायक किस्म का लड़का था परन्तु जब उसकी इस सफलता को मैंने देखा तो मैं सिर्फ उसे देख ही सकता था मेरे पास तो एक सरकारी नौकरी थी जिसमें कि मुझे हर महीने एक फिक्स तनख्वाह मिल जाया करती जिससे कि मैं अपना घर चलाता था लेकिन मुझे संतोष को देखकर बहुत अजीब सा लग रहा था।

उसकी पत्नी मुझे कहने लगी भाई साहब आप कभी हमारे घर पर आ जाया कीजिए, मैंने उनसे कहा जी भाभी मैं जरूर अब आपके घर पर आता जाता रहूंगा। उस दिन उनके घर पर हम लोगों ने काफी अच्छा समय बिताया, जब मैं और मेरी पत्नी कार से घर वापस लौट रहे थे तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी आपके दोस्त तो बहुत ही अमीर है, मैंने उसे कहा वह पहले ऐसा नहीं था परंतु ना जाने उसके हाथ ऐसा क्या लग गया जिससे कि वह इतना अमीर बन गया है मुझे तो संतोष पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं था, मैं सोचने लगा संतोष ने तो अपने जीवन में सब कुछ हासिल कर लिया है लेकिन मेरे जीवन में अभी बहुत सारी चीज़ें अधूरी है अब मुझे भी संतोष की तरह ही बनना था, मैंने संतोष से इस बारे में पूछा तो संतोष कहने लगा यदि तुम्हे मेरी मदद की जरूरत है तो मैं तुम्हारी मदद करने को तैयार हूं।

वह मेरी पैसे से मदद करना चाहता था लेकिन मैं उससे पैसे नहीं लेना चाहता था मैंने संतोष से कहा मुझे तुम्हारी पैसों की जरूरत नहीं है मुझे बस तुम्हारी जरूरत है मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिरकार तुमने यह पैसे कैसे कमाए? संतोष ने मुझे उस वक्त कुछ भी नहीं बताया और कहा यदि तुम्हे जब भी मेरी जरूरत हो तो तुम मुझे याद कर लेना लेकिन मैं इस बारे में जानना चाहता था कि आखिरकार संतोष के पास इतनी संपत्ति कहां से आई, मैंने इस बारे में अपने एक और पुराने मित्र से बात की उसे भी इस बारे में कुछ पता नहीं था, जब मैंने उसे कहा कि संतोष तो अब पैसे वाला हो चुका है वह भी अपनी जिंदगी में व्यस्त था लेकिन वह भी संतोष के जीवन में दिलचस्पी लेने लगा, उसने मुझे एक दिन मिलने के लिए बुलाया और कहने लगा यार तुम यह क्या बात कर रहे हो मुझे तो कभी उम्मीद नहीं थी कि संतोष के पास इतनी संपत्ति होगी, मैंने उसे कहा यदि तुम्हें यकीन नहीं आ रहा तो उसके घर पर कुछ दिनों बाद एक पार्टी है तुम भी उसमें मेरे साथ चलना, वह मुझे कहने लगा लेकिन उसने तो मुझे इनवाइट ही नहीं किया तो भला मैं तुम्हारे साथ कैसे चल सकता हूं, मैंने उससे कहा मैं तुम्हारे बारे में संतोष से कहूंगा तो संतोष जरूर तुम्हे फोन करेगा। कुछ दिनों बाद मैंने संतोष को फोन किया तो मैंने संतोष से कहा की रवि भी आजकल यही है और वह मुझसे तुम्हारे बारे में पूछ रहा था, संतोष बहुत खुश हुआ और कहने लगा रवि को भी तुम मेरी पार्टी में इनवाइट करना, मैंने उससे कहा तुम ही उसे फोन कर लो। मैंने संतोष के व्हाट्सएप नंबर पर रवि का नंबर मैसेज कर दिया, संतोष और रवि की बात फोन पर हो चुकी थी मुझे यह बात रवि ने ही बताई थी।। रवि कहने लगा अरे तुमने तो मेरा नंबर वाकई में संतोष को दे दिया, मैंने उससे कहा मैं तो सोच ही रहा था कि तुम भी मेरे साथ चलो आखिरकार हम लोगों को इस बारे में पता तो लगाना ही चाहिए की संतोष के पास इतनी ज्यादा संपत्ति कहां से आई, मेरी भी अब इसमें दिलचस्पी और ज्यादा बड़ने लगी थी और जब संतोष की पार्टी में हम दोनों एक साथ उस दिन गए तो मैं उस दिन अपनी पत्नी को अपने साथ नहीं लेकर गया मैं और रवि एक साथ ही उसकी पार्टी में गए।

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