मेरी चुदासी चूत और गांड की चुदाई-1

मेरी चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैं मेरी सहेली को डिलीवरी के लिए अस्पताल ले गयी. रात को मैं वहीं रुकी. और मेरी चुदासी चूत और गांड की चुदाई कैसे हुई?

हाय फ्रेंड्स! मेरा नाम आराध्या है. मेरी उमर 42 साल है और मेरा फिगर 40-26-36 का है। मैं कानपुर की रहने वाली हूँ. रंग से मैं थोड़ी सांवली हूं लेकिन मेरी गांड कुछ ज़्यादा ही बड़ी है. मेरी गांड का उभार बहुत ज्यादा उठा हुआ है.

मेरी चूचियां भी काफी बड़ी हैं. मगर उम्र के हिसाब से अभी बहुत टाइट हैं. कुल मिला कर आप कह सकते हैं कि मैं एक मस्त चोदू माल हूं. मुझे हमेशा ही चुदने की चाहत रहती है. मेरी इसी चाहत के चलते मैं कहीं भी लंड ढूंढ लेती हूं.

ऐसा ही एक वाकया आज मैं आप लोगों को बताने जा रही हूं कि कैसे मेरी चूत की प्यास ने मुझे अस्पताल में एक लंड दिलवा दिया. मेरी गांड की चुदाई भी हुई.

मेरी चुदाई की कहानी आज से दो साल पहले की है.

मेरी एक सहेली को बच्चा होने वाला था. वो यहां पर अकेली रहती थी और उसके सास ससुर भी नहीं हैं. उसके पति नेवी में हैं और उसको हर 6 महीने पर ही छुट्टी मिलती है.

पिछली बार भी वो घर आकर बहुत जल्दी चला गया था. उसके जाने के बाद एक दिन उसका फोन मेरे पाया और कहने लगा कि भाभी आप मेरी बीवी के पास रुक जाना. उसको देखने वाला कोई नहीं है.

मैंने अपनी सहेली को कॉल किया कि मैं उसके घर आ रही हूं. मैंने अपना कुछ जरूरी सामान और कुछ कपड़े अपने साथ रख लिये. मैं घर से निकली और शाम तक सहेली के घर पहुंच गयी.

चार पांच दिन हो गये थे मुझे उसके वहां पर रहते हुए. मैं उसकी पूरी देखभाल कर रही थी.

शायद छठवें दिन शाम को उसको दर्द उठने लगा. उसको प्रसव पीड़ा होनी शुरू हो गयी. मैंने पड़ोस की एक लेडी की मदद से सहेली को अस्पताल में पहुंचाया.

वो वहीं पर एडमिट हो गयी. उसको एक निजी वार्ड मिल गया जो काफी सुविधाजनक था. शाम को डॉक्टर आये और उन्होंने मेरी सहेली का पूरा चेकअप किया.

रात के 10 बज गये थे. मैंने सोचा कि मैं भी अपने कपड़े बदल लेती हूं. मैं घर से अपनी नाइटी लेकर आई थी क्योंकि रात में मुझे ढीले कपड़े पहन कर सोने की ही आदत है.

मैंने वहीं पर कमरे के बाथरूम में चेंज कर लिया. मेरी नाइटी कुछ ज्यादा ही सेक्सी थी जो कि मेरे घुटनों से भी थोड़ा ऊपर ही जा रही थी. उसका गला ऊपर से काफी बड़ा था और फिटिंग हल्की थी जिससे ध्यान से देखने पर मेरे पूरे बदन का नजारा मिल सकता था.

अंदर मैं बोर होने लगी तो कुछ देर के लिए बाहर आ गयी. सामने ही रिसेप्शन रूम था. उसमें दो लड़के बैठे हुए थे. दोनों कम ही उम्र के थे. यही कोई 20-22 साल के रहे होंगे दोनों. उनकी नाइट शिफ्ट लगी थी शायद. वो दोनों मुझे दूर से ही घूर रहे थे.

उनके अलावा और जितने लोग भी आसपास में थे सबकी नजर मेरे ही अंगों का जायजा ले रही थी. मैंने और ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फिर मैं दो-चार मिनट टहलने के बाद फिर से वार्ड में आ गयी.

मेरी सहेली की पड़ोसन हम दोनों के लिए खाना लेकर आ गयी. हमने खाना खाया और फिर वो औरत चली गयी. कुछ देर के बाद मैं लेटने की जगह देखने लगी.

बेड के सामने ही एक तख्त सा पड़ा हुआ था. मैं उसी पर लेट गयी. दो-तीन घंटे लेटी रही. मेरी सहेली तो सो गयी. मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी.

मैं उठ कर फिर वार्ड से बाहर आ गयी. उस वक्त रात के 2 बज रहे थे. मैं बाहर आई तो रिसेप्शन के सामने एक कुर्सी पड़ी हुई थी. मैं जाकर उसी पर बैठ गयी. मैं अपने फोन में ईयरपीस लगा कर मूवी देखने लगी.

मूवी के ध्यान में मुझे पता नहीं चला कि मेरी जांघें फैल गयी थीं. नीचे से मैंने पैंटी भी नहीं पहनी थी. मेरी चूत में हल्की हवा लगने से ठंडक पहुंच रही थी. जब मैंने रिसेप्शन रूम की ओर देखा तो पाया कि उन दो लड़कों में से एक जाग रहा था और मुझे ही देख रहा था.

मेरी जांघों के बीच में बार बार उसकी नजर जा रही थी. वो शायद मेरी चूत को देखने की कोशिश कर रहा था. जब मुझे मालूम चला तो मैंने भी जानबूझ कर अपनी जलवे दिखाने शुरू कर दिये.

मैंने अपनी गांड को थोड़ा और नीचे खिसका लिया जिससे मेरी जांघें और फैल गयीं. अब मेरी जांघों का एरिया और ज्यादा चौड़ा हो गया. अपनी दोनों टांगों को चौड़ी करके मैं पिक्चर देखने लगी और वो लड़की मेरी चूत की पिक्चर देखने लगा.

उस लड़के को शायद अब भी पता नहीं था कि मैंने उसको देख लिया. वो अभी भी चोर नजर से ही मेरी चूत को देख रहा था. कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा. वो छिप छिप कर मुझे देखता रहा.

मुझे फिर सिगरेट की तलब लगी. मैं उठ कर अंदर गयी और अपने बैग से सिगरेट की डिब्बी और लाइटर लेकर आ गयी. मैं अस्पताल के बाहर निकल आई और थोड़ा आगे जाकर सुनसान से एरिया में सिगरेट जला कर कश मारने लगी. वो एक सुनसान सी गली थी जिसमें सब कुछ शांत था.

कश लगाते हुए मुझे मजा आने लगा. रात का सन्नाटा था और मेरी चूत में हल्की हल्की चुदास जागने लगी. मेरा हाथ मेरी चूचियों पर चला गया और उनको सहलाने लगा. मैं हल्के हल्के अपने बूब्स को दबाने लगी. तभी मैंने देखा कि मेरे से कुछ दूरी पर कुछ हलचल हुई.

मैंने आगे जाकर देखने की कोशिश की तो एक परछाई देखी. फिर एकदम से वो सामने आ गया. वो एक रिक्शा वाला था.
वो बोला- इतनी रात में क्या कर रही हो आप यहां?
मैंने उसको अपने हाथ में जलती हुई सिगरेट दिखाई.

उसने मुझे पूरा ऊपर से नीचे तक देखा.
कुछ देख कर बोला- मुझे भी एक सिगरेट दे दो मैडम. बहुत तेज तलब लगी हुई है. आपको देख कर तो मेरा भी मन कर गया.

मैंने उसको डिब्बी में से एक सिगरेट निकाल कर दी.
सामने की तरफ उंगली दिखाते हुए बोला- आप बैठ जाओ यहां.
मैं बोली- नहीं, मैं ठीक हूं.
उसने फिर मुझे बैठने को कहा तो मैं बैठ गयी.

उसने जमीन पर अपनी लुंगी बिछाई हुई थी. मैं बैठ गयी और उसने भी अपनी सिगरेट जला ली. वो मेरे साथ में ही कश मारने लगा. फिर कुछ देर के बाद वो सरक सरक कर मेरे पास आ गया. मेरे जिस्म को छूने की कोशिश करने लगा.

साथ ही मुझ पर लाइन भी मार रहा था.
बोला- आपके साहब तो बहुत किस्मत वाले होंगे. आपसे बहुत खुश होते होंगे. मेरी किस्मत में ऐसा कभी कोई नहीं आ सकता.

उसकी बातों से साफ साफ पता लग रहा था कि वो वहीं पर मुझे लिटा कर मुझे पूरी नंगी करके चोदने की चाहत रख रहा था.
मैं भी अकेली थी तो मैंने मजा लेने के लिए माहौल को और गर्म करने की सोची.

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