मेरी चालू बीवी लंड की प्यासी-1

सुहागरात को ही मुझे शक हो गया कि मेरी पत्नी शादी से पहले अपनी चूत में कई लंड ले चुकी है. मगर उसके बाद भी मैंने उससे प्यार किया. एक दिन मैं उसके मायके गया तो .

दोस्तो, मेरा नाम लवली है. यह कहानी मेरे पति और मेरे द्वारा साथ मिल कर लिखी गयी है. इस कहानी में जो घटनाक्रम बताये गये हैं वो बिल्कुल सच है. इसलिए आप कहानी का पूरा मजा लें और हमें अपनी राय भी दें.

मेरे पति का नाम आशीष है. उनकी उम्र 24 साल है. जबकि मैं 20 साल की हूं. जब ये कहानी हम साथ में मिल कर लिख रहे थे तो पति ने मुझसे शुरूआत करने के लिए कहा था जो कि मैं कर चुकी हूं.

कहानी का श्रीगणेश करने के लिए पति ने इसलिए कहा था क्योंकि वो चाहते थे कि हमारी लाइफ की तरह हमारी कहानी भी सुपर होनी चाहिए. इसलिए अब आप लोग आगे की कहानी मेरे पति की जुबानी सुनेंगे. मैं उम्मीद करती हूं कि आपको मजा आयेगा.

हाय दोस्तो, मेरा नाम आशीष है. दो साल पहले मेरी शादी हुई थी. मेरे घर में मेरे मां और पापा हैं. पापा की उम्र 47 साल है और मां की उम्र 43 साल है. मेरी पत्नी का नाम लवली है. मेरी पत्नी अपने माता पिता की एकलौती संतान है. मेरी सासू मां की उम्र लगभग 40 के करीब है जबकि लवली के पिताजी यानि कि मेरे ससुर का देहांत हो चुका है.

मेरी पत्नी जमीन की मालकिन है इसलिए उसके पिता ने उसकी शादी जल्दी ही कर दी थी ताकि बाद में कोई समस्या न हो. पत्नी की जमीन पर भी अब मेरा ही हक है और मैं उसका जिम्मेदार भी हूं.

दोस्तो, अब मैं अपनी पत्नी के बारे में आपको विस्तार से बताता हूं. मेरी पत्नी की लम्बाई 5.3 फीट है. उसकी चूचियां 36 की हैं और उसके बदन का रंग एकदम से गोरा है.

शादी से पहले मुझे कभी चूत के दर्शन नहीं हुए थे. इसलिए मैं अपनी शादी को लेकर बहुत ही ज्यादा उत्साहित था. शादी के पहले भी मैं बहुत बार अपनी लवली को छेड़ा करता था. वो भी काफी चुदासी किस्म की लड़की रह चुकी है. अभी भी है लेकिन अब वो मेरी पत्नी है.

तो शादी की पहली रात को जब मैं कमरे में गया तो मैं बहुत जोश में था. मैं उसके साथ बैठ कर बातें करने लगा. धीरे धीरे मैंने उसके कपड़े उतारना शुरू किया. साड़ी उतारने के बाद मैंने पहले उसका ब्लाउज उतारा और फिर उसका पेटीकोट. अब वो गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी में थी.

उसके गोरे बदन पर वो ब्रा और पैंटी बहुत जंच रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे फिल्मों की कोई हिरोइन बिकनी में लेटी हुई है. मेरा लंड तो फनफना गया था. फिर मैंने उसकी ब्रा को उतारा और उसकी चूचियों को पीने लगा.

लवली भी गर्म होने लगी थी. कुछ देर तक चूचियों को पीने के बाद मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत के दर्शन किये. नंगी चूत का ये नजारा मेरी आंखों के सामने पहली बार आया था इसलिए मैं ध्यान से उसकी चूत को देखने लगा.

मेरी पत्नी का रंग तो बहुत गोरा था लेकिन उसकी चूत सांवली सी थी. इसका केवल एक ही मतलब निकल रहा था कि उसने शादी से पहले अपनी चूत की बहुत ठुकाई करवाई है. मगर अब ये सब सोचने का कोई फायदा नहीं था.

अब मैंने सेक्स पर ध्यान लगाना सही समझा. मैं लवली के होंठों को चूसने लगा. उसकी चूचियों को दबाने लगा. फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. मेरे होंठों को चूत का पहला स्पर्श मिला था. इसलिए मैं उसको चूस चूस कर पूरा मजा ले रहा था.

उसके बाद मैं उसकी चूत में तेजी से जीभ को अंदर बाहर करने लगा. उसकी चूत को मैंने अपने थूक से भर दिया ताकि मेरा लौड़ा आसानी से उसकी चूत में चला जाये.

फिर मैंने उसकी टांगों को चौड़ी कर लिया. अब वो सुनहरा पल आने वाला था जिसका मैं बेसब्री से इंतजार कर रहा था. मैंने बीवी की चूत पर लंड को सेट कर दिया और एक धक्का दिया. पहली बार में ही मेरा लंड उसकी चूत में पूरा उतर गया.

मुझे पक्का यकीन हो गया कि मेरी पत्नी की चुदाई शादी से पहले जमकर हुई है. एक मैं ही चूतिया था जो शादी से पहले चूत का जुगाड़ नहीं कर पाया. मगर मेरी बीवी चालू निकली जो शादी से पहले ही इतने लंड खाकर आई थी.

खैर, मैं लवली की चूत में लंड डाल कर धक्के देने लगा. अपनी गांड को हिला हिला कर उसकी चूत को चोदने लगा. पहली बार चूत का स्वाद लंड ने चखा था इसलिए लौड़ा भी ज्यादा देर नहीं टिक सका. मैं जल्दी ही झड़ गया. मगर चोदने में बहुत मजा आया.

उस रात में मैंने चार बार लवली की चूत मारी. बहुत आनंद हो गया था जिन्दगी के अन्दर. फिर कुछ दिन बाद लवली अपने मायके चली गयी. मैं भी वहीं चला जाता था और उसको चोद कर आ जाता था. ऐसे ही मस्ती में 8-9 महीने बीत गये थे.

अब मैं असली बात बताता हूं जिसने मुझे ये कहानी लिखने पर मजबूर कर दिया. हुआ यूं कि एक बार लवली अपने मायके में गयी हुई थी. महीना भर हो गया था. मुझे भी चूत की प्यास लगी थी.

मैंने लवली को सरप्राइज़ देने के लिए अपने ससुराल बिन बताये पहुंचने का मूड बना लिया. उससे पहले मैं आपको बता दूं कि मेरे ससुराल में जो घर है वो गांव से थोड़ा बाहर है. वहां पर खेत का एरिया है. घर में तीन कमरे हैं और एक हॉल बना हुआ है.

शाम को 7 बजे के लगभग मैं घर से निकल लिया. वो कहते हैं न कि जो होता है वो अच्छे के लिए ही होता है. तो हुआ ये कि रास्ते में मेरी बाइक पंक्चर हो गयी.

दो किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद मैं कहीं पंक्चर की दुकान पर पहुंचा. 10.30 बज गये थे. एक बार तो सोचा कि काफी देर हो चुकी है और मैं लवली को फोन कर देता हूं. मगर फिर सरप्राईज खराब हो जाता. मैंने सोचा कि चुपके से जाकर उसको एकदम से खुश कर दूंगा.

जब मैं उनके घर पहुंचा तो मैंने धीरे से उनके घर के दरवाजे को धक्का दिया. मगर दरवाजा अंदर से बंद था. मैंने खिड़की की ओर देखा और सोचा कि यहां से आवाज देता हूं.

जैसे ही मैं खिड़की के पास पहुंचा तो वहां से आ रही आवाजें सुनकर मैं तो दंग रह गया. वो आवाजें लवली की मां के रूम से आ रही थी. अंदर से किसी पुरूष की आवाजें आ रही थी. फिर जब मैंने खिड़की से झांक कर अंदर देखा तो पाया कि वहां पर लवली की मां यानि कि मेरी सासू मां के ऊपर कोई आदमी चढ़ा हुआ है और उनको चोद रहा है.

ये देख कर मेरा तो दिमाग खराब हो गया. मैं सोचने लगा कि मेरी शादी तो मेरे बाप ने एक रंडी के घर में करवा दी है.

मैंने चुपके से दरवाजा बंद किया और फिर अंदर आ गया. मैंने धीरे से जाकर रूम की बाकी लाइटें जला दीं.

जैसे ही उजाला हुआ तो देखा कि एक आदमी जो कि लगभग 35 साल का था, वो मेरी सासू मां की चूचियों को मसलने में लगा हुआ था. लवली की मां पूरी की पूरी नंगी होकर बेड पर पड़ी हुई थी. वो आदमी भी पूरा नंगा था और उसकी चूत को चाटने में लगा हुआ था.

मैं तो ये सोच कर हैरान था कि पता नहीं ये मां-बेटी न जाने कितने आदमियों से चुदवाती होंगी.
फिर वो आदमी मुझे देख कर हड़बड़ी में अपने कपड़े पहनने लगा. सास अभी नीचे ही नंगी पड़ी हुई थी. उसके गदराये और भरे जिस्म को देख कर मेरा ईमान भी डोलने लगा था.

उसके बदन से मेरी नजर हट नहीं रही थी. मैं एक साधारण लड़का था और मैंने कभी किसी महिला को इस तरह से चुदते हुए नहीं देखा था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए.

इतने में लवली की मां ने अपने कपड़े डाल लिये थे. वो मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी.
मैंने पूछा- लवली कहां है?
वो बोली- अभी बुलाती हूं.

मैं बोला- नहीं, मैं चला जाता हूं.
वो बोली- नहीं, आप बैठिये, मैं बुला कर लाती हूं.
वो कपड़ा लपेटे हुए उठ कर जाने लगी. मैं एक बार तो रुका मगर फिर उसके पीछे तेजी से बढ़ गया.

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