बहन बनी सेक्स गुलाम

फ्रेंड्स, मेरा नाम विशाल है। मैं बी.टेक. फाइनल ईयर में हूँ। यह कहानी मेरी और मेरी बहन की है। मैं अपनी बहन को काफी दिनों से चोद रहा हूँ। इसके बारे में मैं आपको अगली कहानियों में बताऊंगा कि हम दोनों के बीच सेक्स और चुदाई की शुरूआत कैसे हुई। जब से बहन के साथ सेक्स करना शुरू किया था उसके बाद से ही बात अब काफी बढ़ चुकी थी. अब तो लगभग रोज ही चुदाई होती है। मेरी बहन भी मुझे काफी पसंद करती है. बिना चुदे उससे रहा नहीं जाता।

मैं आपको बता दूँ कि मेरी बहन एक बहुत ही गर्म माल है। उसके मम्मे उभरे हुए 32 के साइज के हैं. पतली कमर एकदम कातिल, 28 के साइज की, चूतड़ उभरे हुए 36 के साइज के हैं। रंग गोरा, एकदम हीरोइन लगाती है किसी पोर्न फ़िल्म की। मेरी दीदी मेरे से दो साल बड़ी है. वह एम.बी.ए. कर रही है।

अब मैं कहानी पर आता हूँ. बात तब की है जब हम काफी दिनों तक एक ही प्रकार की चुदाई करके बोर हो गए थे। मेरी बहन को कुछ नया करना था। वो मेरे साथ बी.डी.एस.एम. सेक्स (एक तरह का क्रूर सेक्स) करना चाहती थी। वो मुझसे बोली- मैं तुमसे तुम्हारी निजी रखैल बनकर चुदना चाहती हूँ।
मैं बोला- वह तो ठीक है लेकिन मम्मी-पापा के रहते ये नहीं होने वाला।

वो उदास हो गयी. मैंने उसका चेहरा पकड़ कर ऊपर किया और उसके होंठों को चूम लिया। वो भी मेरा साथ देने लगी. फिर हमने रात को एक बार चुदाई की और सो गए।

सुबह नाश्ते की टेबल पर मैं मम्मी-पापा से मिला. उन्होंने मुझे बताया कि वे नानी के यहाँ जा रहे हैं क्योंकि नानी की तबियत खराब है। वो दो-तीन दिन बाद ही वापस आएंगे।
मैंने मेरी बहन की आँखों में देखा, वो खुशी से चमक उठी थी।
मैंने पापा से पूछा- कब निकलना है?
उनका प्लान आज दिन में ही निकलने का था।

दीदी उठी और किचन में गयी कुछ लाने। मैं उसके पीछे-पीछे किचेन में गया। मैंने उसे पीछे से पकड़ कर उसकी गर्दन पर चूमा और बोबे दबाते हुए बोला- आज कौन बचायेगा जान?
इस पर वो बोली- बचना किसको है जान! तुम तो बस जल्दी से आओ, मुझे चोद दो.
कहकर उसने मेरे होंठों को चूम लिया।

मैं फिर मम्मी-पापा को छोड़ने स्टेशन गया। ट्रेन लेट थी और आते-आते शाम हो गयी. मैंने बहन को मैसेज किया- तैयार रहना!
मैं घर पंहुचा तो उसने दरवाजा खोला. वह बिल्कुल नंगी थी. कुछ भी नहीं पहना था। उसके गले में एक पट्टा था। मैंने उसे देखते ही गले लगा लिया और उसके होंठों को चूमने लगा। मैं उसे किस करते हुए बेडरूम में ले गया, उसकी आँखों पर पट्टी बांध दी।

उसके दोनों हाथों को रस्सी से बांध कर पुल-बार (खींचने के लिए) से लटका दिया। मुझे व्यायाम करना काफी पसंद है तो मैंने पुल अप्स करने के लिए कमरे में ही पुल-अप बार लगवा रखा था। उसे इसी हालत में छोड़ कर मैं बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया.

आगे की कहानी सुनाते हुए मैं मेरी बहन के शब्दों में और अपने शब्दों में कहानी लिखूँगा ताकि आपको हम दोनों का अनुभव अच्छी तरह से समझ आ सके.

प्रीति:
मेरी आँखें बंद थीं. मैं बिल्कुल नंगी बीच कमरे में खड़ी थी. दोनों हाथ एक रस्सी के द्वारा ऊपर पुल-अप बार से बंधे थे। मैं अपने रोम-रोम में एक अजीब-सा कम्पन महसूस कर सकती थी। मुझे यह बात और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी कि अब मेरा भाई मेरे साथ अब आगे क्या करेगा।
आधे घंटे से मैं ऐसे ही विचारों से उत्तेजित हो रही थी। मैं अपने भाई के पहले स्पर्श को याद कर रही थी। इससे मैं गर्म होने लगी थी। काफी समय से इसी स्थिति में रहने के कारण मेरे हाथों में दर्द भी था। लेकिन इस दर्द में मुझे मजा आ रहा था। यह दर्द मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था।

विशाल:
करीब 45 मिनट बाद मैं बाथरूम से निकला। मेरी बहन मादरजात नंगी कमरे में दोनों हाथ ऊपर किये हुए खड़ी थी। वह काफी उत्तेजित थी। उत्तेजना उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। मैं टॉवल लपेटे हुए था। मैंने मेज पर रखी स्टिक उठाई। एक पतली सी छड़ी थी। जिसका अगला भाग थोड़ा चपटा था। ये सब सामान उसी ने अर्रेंज किया था। उस स्टिक से मैंने उसकी पीठ को छुआ तो वो छटपटा सी गयी। मैं स्टिक को उसकी पीठ पर घुमाते हुए नीचे लाया और उसके उभरे हुए चूतड़ों पर मारा। वो चिहुँक-सी गयी. वो सर ऊपर करके ‘आहह हहह!’ की सिसकारी लेने लगी। उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

यहाँ मैं यह बताना चाहूंगा कि मेरा उद्देश्य उसे मारना या चोट पहुंचाना नहीं था. हम बस सेक्स के एक नए प्रयोग का मजा ले रहे थे।

मैं स्टिक को उसके शरीर पर घुमाते हुए आगे लेकर आया और उसके पेट पर हल्के से मारा। वो चिहुँक गयी। नंगे बदन पर वो रबर की छड़ी सटीक चिपकती था। ये चोट बड़ी कामुक थी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैं स्टिक को उसके बदन पर घुमाते हुए ऊपर लाया और उसके उरोजों पर धीरे से मारा तो वो चिहुँक उठी जैसा पहली बार किया था।
उसकी सांसें तेज हो गयी। उत्तेजना से वो सिसकारियां भर रही थी। उसका शरीर वासना से तप रहा था। हर एक वार के साथ वो सिसकारियां ले रही थी ‘आहह हहहह … आहहह … ओह्ह … ओह्ह!’

मैं स्टिक को वैसे ही घुमाते हुए उसकी चूत के पास लाया और उसकी चूत पर फेरने लगा. वो मचल उठी, उसकी चूत पानी छोड़ रही थी। मेरे ऐसा करने मात्र से ही वो स्खलित हो गयी। उसका रस स्टिक पे लगा हुआ था. मैं स्टिक को उसके मुंह के पास ले गया जिसको वो झट से चाट गयी। वो थोड़ी सी शांत हुई.

उसके हाँफने से उसके बोबों को मैं ऊपर नीचे होते हुए देख सकता था। मेरी बहन का गोरा बदन वासना से तप कर लाल पड़ चुका था। मैं उसके चेहरे पर संतोष का भाव देख सकता था।
उसे इस हालत में देख कर मेरा लण्ड भी तन चुका था। मैं उसके पीछे गया. उसके बालों को पकड़ कर खींचा और उसका सिर ऊपर की तरफ उठ गया। मैंने उसके कंधों पर दांत गड़ा कर चुम्बन किया. उसने अपने होंठ भींच लिए, कामुक अंदाज में दबा लिए. शायद उसे मजा आ रहा था। मैं उसके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था। उसका बदन एक दम तवे के माफिक गर्म था।

मैंने उसे गर्दन पर किस करते हुए उसके हाथ की रस्सी खोली और मैं उसे इसी हालात मैं छोड़ कर किचन में गया। फ्रिज़ से मैं आइस ट्रे उठा लाया।

प्रीति:
मेरा रोम-रोम उत्तेजित था. मैं पूरी तरह से अपने भाई की स्लेव (सेक्स गुलाम) बन गयी थी। मुझे उसका हर एक स्पर्श उन्मादित कर रहा था। यह बिल्कुल अलग अहसास था। मेरा पूरा बदन इतना ज्यादा सेंसेटिव हो गया था कि हवा का स्पर्श भी मुझे उत्तेजित कर रहा था। मैंने आजतक कितनी ही बार सेक्स किया था लेकिन यह अहसास कभी नहीं हुआ। मैं बस एक भी पल रुके बिना ज़ोरदार चुदाई की कामना कर रही थी। लेकिन मेरे भाई ने कहा था कि अगर पूरा मजा लेना है तो तुम कुछ करोगी नहीं. जो करेगा वह ही करेगा. इसलिए मैं कुछ भी नहीं कर रही थी।

विशाल:
मैं कमरे में वापस आया. मेरी बहन वहीं फर्श पर घुटने के बल बैठी थी। मेरे वापस आने का इंतज़ार कर रही थी। मैंने उसे उठाया और उसके हाथों को ऊपर पुल-अप बार पर चौड़ा करके बांध दिया. नीचे उसके दोनों पैरों को भी पुल बार के स्टैंड के सहारे चौड़ा करके बांध दिया ताकि वो हिले डुले ना। मैंने आईस क्यूब मुँह में लिया, उसके पेट पर चूमने लगा. वो सिहर सी गयी जैसे उसके बदन में कोई करंट सा दौड़ गया हो. उसे इसका जरा सा अहसास भी नहीं था कि मैं कुछ ऐसा करने वाला हूँ। उसके फूल की पंखुड़ी की तरह लाल होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान थी। शायद इससे उसे काफी आनंद आ रहा था।

आइस क्यूब को उसके बदन पर घुमाते हुए मैं ऊपर की ओर बढ़ रहा था. उसका अंग-अंग टूट रहा था। वो काफी उत्तेजित हो रही थी। उसके चेहरे की मुस्कान गहरी हो रही थी. उसे इस चीज से काफी आराम मिल रहा था। मैं उसकी बदन की खुशबू को महसूस कर पा रहा था। यूँ तो हमने कई बार सेक्स किया है लेकिन यह अहसाह ही कुछ और था।

मैं आईस क्यूब को उसके बोबों पर घुमा रहा था. उसके गोरे-गोरे बोबों पर लाल निशान पड़ चुके थे. आइस का स्पर्श पाते ही उसके चूचक कड़े हो गए थे।
वो आहहहह … ऊ … ओह … की हल्की सीत्कार ले रही थी. चूंकि उसे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया के लिए मनाही थी इसलिए वो मजबूर थी. नहीं तो अभी तक वो मुझे चोदने को कह देती या तो खुद ज़बरदस्ती मुझे पटक कर मेरे लौड़े पर चढ़ कर चुद लेती। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं उसको सैकड़ों बार चोद चुका हूँ और मैं उसके हर एक भाव से वाक़िफ़ हूँ। उसका यह भाव मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था।

उसके बदन की खुशबू पाकर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था जोकि एक बार पहले ही झड़ चुका था। मैं उसकी गर्दन के पास था. मैं उसकी गर्म सांसों को महसूस कर सकता था। उसके बाद मैं उसके होंठों पर पहुंचा और वो आइस क्यूब को जीभ निकल कर चाटने लगी। उसकी आँखों पर पट्टी थी. मुझे इतना पास पाकर उसने मुझे चूमना चाहा लेकिन मैंने उसके माथे पर चुम्बन करते हुए जल्दी से पीछे हट गया।

मैंने दूसरी आइस क्यूब ली और घूम के पीछे उसके पैरों के पास आ गया। मैंने उसे आइस से उसे स्मूच देना चालू किया. वो बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी। मैं उसकी जांघों से होते हुए उसके चूतड़ों पर पंहुचा. उसके चूतड़ एकदम लाल हो चुके थे.
मैंने चूतड़ पर आइस क्यूब घुमाना चालू किया. कभी गांड में घुसाता तो कभी चूतड़ों पर घुमाता. उसकी गांड की गर्मी से पूरा आइस क्यूब पिघल गया।

मैंने उसके चूतड़ों को दांतों से काटना चालू कर दिया। मेरे हर एक वार से वो चिहुँक जाती। उसके मलमल से गद्देदार चूतड़ … हाय! मैं उन्हें काटता-चूमता हुआ चाट रहा था। मेरी बहन के चूतड़ मेरे सबसे फेवरेट हैं। मैंने दूसरी आइस क्यूब ली और उसकी कमर से होते हुए ऊपर पीठ की तरफ बढ़ने लगा. वो छटपटा रही थी। मैं उसकी कोमल पीठ को फील कर सकता था। मैं ऊपर गर्दन की तरफ बढ़ा.

उससे रहा नहीं गया, वो मुँह पीछे करके मुझे किस करने की कोशिश करने लगी। मैंने पीछे से उसके बाल कस कर पकड़ कर उसके उसकी गर्दन सीधी की और आइस को उसके कंधों पर रगड़ने लगा। वो तिलमिलाने लगी. वो छूटने का प्रयास करने लगी लेकिन कोशिश नाकाम थी. बंधन काफी मजबूत था। मैं आइस को उसके कंधों से कान और गर्दन तक घूमता। वो आनंद से उन्मादित हो उठती।

ऐसा करने के बाद मैं उसकी बांहों के नीचे आ गया। चूंकि उसके दोनों हाथ ऊपर पुल-बार में बंधे हुए थे उसके आर्मपिट्स (बगलें) मेरी तरफ खुले हुए थे. बिल्कुल साफ … एक भी बाल नहीं, एकदम गोरी। मेरी बहन किसी मॉडल से कम नहीं है. हर हफ्ते पार्लर जाती है और वैक्सिंग भी टाइम से कराती है। मुझे हर रोज फ्रेश मॉल मिलता है।

मैंने आइस क्यूब को उसकी कांख पर रगड़ना चालू किया। वो उतेजना के मारे छपटाने लगी. ऐसा मैंने पहले कभी नहीं किया था उसके साथ। वो छूटने की कोशिश करने लगी। वो तेज-तेज सिसकारियाँ ले रही थी.
चूंकि उसका मुंह मैंने उसी की पैंटी को मुंह में ठूंस कर बंद किया हुआ था तो वो बोल नहीं पा रही थी। यह कल के सेक्स वाली पैंटी थी. वो अक्सर उसे बेड के नीचे डाल देती थी।

मुझे उसकी कांख की मादक भीनी सी खुशबू पागल बना रही थी। मुझे नशा सा चढ़ने लगा था। मैंने क्यूब छोड कर उसके आर्मपिट्स को चाटना चालू कर दिया। वो छटपटाने लगी, तेज तेज सीत्कार करने लगी. उसका बदन अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी।
मैंने एक हाथ उसकी चूत पर लगा दिया। उसके रस को अपने हाथों पर ले लिया।

झड़ने के बाद वो रस्सी से लटक कर हाँफने लगी लेकिन मैंने उसे आराम करने का मौका नहीं दिया। मैं उसके आर्मपिट्स चाटने में लगा था। कुछ देर बाद मैंने उसके मुंह से पैंटी निकाली और अपने हाथ जो उसके चूत-रस में डूबे हुए थे, होंठों के पास ले गया, वो चाटने लगी. मैं भी उसके साथ चाटने लगा।

फिर मैंने दो उंगली उसके मुंह के अंदर डाल दीं। वो मेरी उंगलियां चाट रही थी. मैं उसके होंठों पर लगे उसके चूत के रस को चाट रहा था।

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