अनजान आंटी और उनकी सहेली की चुत चुदाई

मैंने एक आंटी की मदद की उनका सामान उनके घर पहुंचाने में. उन्होंने मुझे अंदर बुला लिया. उनके घर में जाकर मैंने आंटी की चूत चुदाई की. ये सब कैसे हुआ? उनकी सहेली कैसे आयी?

दोस्तो, मेरा नाम अयाज़ है, मैं राजस्थान के अलवर जिले से हूँ. मेरी उम्र 25 वर्ष है, मेरे लंड का साइज़ साढ़े सात इंच है.

आज मैं यहां अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ. ये कहानी मेरी और दो अनजान आंटियों के बीच हुई चुदाई की कहानी है, जिनसे में अचानक से ही मिला था.

ये बात गर्मियों के दिनों की है, मेरे कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं, तो मैं बिल्कुल फ्री था.

मैं एक दिन में रेलवे स्टेशन गया था, मेरा कोई पार्सल आया हुआ था. मैं उसे लेने के लिए जब उधर गया, तो मुझे पता चला कि मेरा पार्सल अभी तक आया नहीं है. मैं वापस अपने घर की तरफ जाने लगा. मेरा घर स्टेशन से थोड़ा दूर है, तो मैं टेम्पो का इंतज़ार कर रहा था.

अचानक से मैंने देखा तो एक आंटी सामने से आ रही थीं. उनके पास दो पार्सल थे. मैंने उन्हें देखा, तो सोचा कि उनकी मदद कर दूं. आंटी के हाथ में एक पार्सल तो छोटा सा ही था. मगर दूसरा पार्सल कुछ ज्यादा बड़ा था. मुझे समझ आ गया कि उसमें शायद कोई बड़ा आइटम है.

मैं आंटी के पास गया और उनसे कहा- हैलो आंटी . क्या मैं आपकी कोई हेल्प कर दूं?

आंटी ने मेरी तरफ देखा और कहा- हां शायद मैं इन दोनों को एक साथ नहीं ले जा सकती हूँ . ये बहुत भारी हैं.
मैंने कहा- कोई बात नहीं आंटी . मैं आपकी मदद कर देता हूँ. चलिए कहां चलना है?
आंटी ने कहा- उधर पार्किंग में मेरी कार खड़ी है. उधर तक ले चलो प्लीज़.

मैंने वो बड़ा वाला पार्सल उठाया और आंटी के साथ चलने लगा. आंटी ने साड़ी पहन रखी थी. आंटी की उम्र करीब 34 साल की थी, वो देखने में बहुत ही खूबसूरत थीं. उनका बदन पूरा भरा हुआ था.
आंटी ने चलते हुए मुझसे पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने कहा- मेरा नाम अयाज़ है.
वो बोलीं- क्या करते हो?
मैंने कहा- मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ.
वो मुझे देखते हुए बोलीं- अच्छा.

फिर मैंने उनसे पूछा- आंटी आप कहां रहती हैं?
तो आंटी बोलीं- मैं एमजी कॉलोनी में रहती हूँ.
मैंने कहा- अच्छा . आप क्या करती हैं?
वो बोलीं- मेरा खुद का बिज़नेस है . मैं वो करती हूँ.
मैंने पूछा- कैसा बिज़नेस आंटी?
वो बोलीं कि मैं सिलाई करती हूँ और ऑनलाइन अपने प्रोडक्ट्स की सेल करती हूँ.

मैं उनकी मेहनत की मन ही मन तारीफ़ करने लगा.

ऐसे ही बात करते करते हम पार्किंग में आ गए. वहां आंटी की कार खड़ी थी.

मैंने उनकी कार में वो सामान रखा और उनसे कहा- अच्छा आंटी अब मैं चलता हूँ.
तो आंटी बोलीं- अरे बेटा . तुम मेरे साथ ही चलो न . तुम्हारा घर किस तरफ है?
मैंने उन्हें मेरे घर का पता बताया.

वो बोलीं- हां मैं उसी तरफ से तो जा रही हूँ . चलो बैठो . मैं तुम्हें छोड़ दूंगी.
मैंने कहा- ठीक है आंटी.

फिर इस तरह मैं आंटी की कार में बैठकर अपने घर तरफ जाने लगा. मैंने आंटी से पूछा- आंटी आपके घर में और कौन कौन है?

आंटी बोलीं- मैं अपने घर में अकेली ही रहती हूँ.
मैंने कहा- क्यों . आपके पति कहां हैं?
वो बोलीं- मेरा डाइवोर्स हो चुका है.
मैंने कहा- सॉरी आंटी . मुझे नहीं पता था.
आंटी बोलीं- कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.

अब जैसे ही आंटी ने बोला कि उनका डाइवोर्स हो चुका है, तो मेरे मन में उनका मस्त बदन घूमने लगा. मुझे लगा कि क्यों न आज इस आंटी को चोदा जाए. किसी तरह से आज ये आंटी एक रात के लिए मिल जाए, तो मज़ा आ जाए.

तभी अचानक से मेरे दिमाग में एक आईडिया आया.
मैंने आंटी से कहा- आंटी यहां तो मैंने ये पार्सल रखवा दिए हैं. लेकिन आपके घर पर तो आप अकेले ही हो . तो आप इन्हें कार से निकाल कर अन्दर कैसे रखोगी?

मेरी ये बात सुनकर आंटी बोलीं- हां ये तो है . क्या तुम मेरे साथ मेरे घर तक चल चलोगे? मैं तुम्हें वापस छोड़ने आ जाऊँगी. तुम्हें बस थोड़ी तकलीफ और होगी.

मुझे क्या था, मैं तो खुद यही चाहता था. मैंने बिना रुके आंटी से कहा- क्यों नहीं आंटी . आप चलिए मैं ये पार्सल आपके घर में रखवा दूंगा.

फिर वो आंटी सीधा मुझे अपने घर ले गईं. मैंने देखा कि उन आंटी का घर तो बहुत बड़ा था.

मैंने तारीफ़ करते हुए कहा- आंटी, आपका घर तो बहुत ही बड़ा और अच्छा है.
आंटी बोलीं- थैंक्यू . अब अन्दर चलो.
मैंने कहा- जी आंटी, चलिए.

फिर मैंने कार से वो पार्सल निकाले और आंटी के साथ अन्दर उनके घर में आ गया. उस वक्त घर में सिर्फ मैं और वो ही थे. मेरे दिल में तो लड्डू फूटने लगे थे. बस आंटी के राजी होने की देर थी.

फिर आंटी ने मुझे पार्सल को एक जगह रखने को कहा- अयाज, आओ यहां सोफे आ जाओ.
उन्होंने मुझे सोफे पर बैठने को कहा, तो मैं सोफे पर जाकर बैठ गया.

फिर वो आंटी अन्दर गईं और पानी लेकर आईं. आंटी ने मुझे पानी दिया और वो भी वहीं बैठ गईं.

मैंने पानी पिया और उनसे पूछा- आंटी आपने इन पार्सलों में ऐसा क्या मंगवाया है, ये इतना भारी क्यों है?

आंटी एक मिनट के लिए चुप हो गईं और मेरी तरफ देखकर कुछ सोचने लगीं.

मैंने फिर कहा- आंटी ऐसा क्या है इन पार्सलों में, जो आप इतना सोच रही हो?

आंटी ने बड़े वाले पार्सल की तरफ इशारा करते हुए कहा- इसमें मैंने इसमें टोस्टर मंगवाए हैं. इसमें दो टोस्टर हैं. एक मैंने मेरी फ्रेंड के लिए मंगवाया है. बस वो अभी लेने आएगी.

मैंने कहा- अच्छा और वो दूसरे वाले पार्सल में क्या है?
आंटी ने कहा- उसमें तो मैंने कुछ किताबें मंगवाई हैं . वो हैं.

मैंने ओके में सर हिला दिया.

फिर आंटी अन्दर चली गई थीं, तो मैंने आंटी को आवाज़ देकर पूछा- आंटी, क्या मैं ये पार्सल खोल कर टोस्टर देख लूं, कैसे हैं?
आंटी ने कहा- हां देख लो.

मैंने टोस्टर वाले पार्सल को खोलने की कोशिश की, लेकिन वो पार्सल नहीं खुला. क्योंकि उस पर मोटी टेप लगी हुई थी. बिना कैंची के खुलना सम्भव नहीं था.

फिर मैंने सोचा कि तब तक ये किताबें ही देख लूं . काहे की किताबें हैं. मैं उस दूसरे पार्सल को खोलने लगा. फिर जैसे ही मैंने वो पार्सल खोला और ऊपर वाली किताब का नाम देखा. उसका नाम देखकर मेरे होश उड़ गए. उस बुक पर चुदाई की कहानियां लिखा था. मैंने जैसे ही ये नाम पढ़ा, मुझे सब समझ आ गया कि आंटी पूरी तरह से चुदाई की भूखी हैं. अब मुझे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं थी.

मैंने वहीं टेबल पर रखे पानी के जग से पानी गिलास में भरा और जानबूझ कर मैंने अपने पजामे पर पानी गिरा दिया.
पानी गिरते ही मैंने अपने मुँह से जोर की आवाज निकाली- ओह शिट.

मेरी आवाज सुनकर अचानक से आंटी बाहर आईं. उन्होंने देखा कि मेरे पजामे पर पानी गिर गया है.

उन्होंने मुझसे पूछा- अरे ये कैसे हो गया, तुम्हारा तो पूरा पजामा गीला हो गया.
मैंने कहा- आंटी हां पानी गिर गया . मगर कोई बात नहीं, अभी तो वैसे भी गर्मी है. कुछ देर में सूख जाएगा.

आंटी बोलीं- गर्मी है तो क्या हुआ, गीला पजामा थोड़ी पहने रहोगे.
मैंने कहा- तो क्या करूं?
आंटी बोलीं- अभी तुम थोड़ी देर तौलिया पहन लो . तब तक तुम्हारा पजामा भी सूख जाएगा.
मैंने कहा- नहीं आंटी रहने दीजिए. इसकी कोई जरूरत नहीं है.
आंटी बोलीं- अरे जरूरत कैसे नहीं है . तुमने मेरी इतनी हेल्प की है. मैं तुम्हारे लिए इतना तो कर ही सकती हूँ.

मैं तो पहले से ही रेडी था . तो मैंने कहा- ठीक है आंटी . आप बताइए बाथरूम कहां है, मैं जाकर तौलिया पहन लेता हूँ.
आंटी बोलीं- तौलिया पहनने के लिए बाथरूम में जाने की क्या जरूरत है, यहीं चेंज कर लो. मेरे सामने करने में कोई प्रॉब्लम है क्या?
मैंने कहा- आंटी लेकिन आपके सामने कैसे!
आंटी बोलीं- क्यों क्या तुम मेरे सामने तौलिया नहीं पहन सकते?
मैंने कहा- पहन तो सकता हूँ . लेकिन मुझे शर्म आएगी.
आंटी हंस कर बोलीं- इसमें क्या शर्माना . तुम कोई लड़की हो . कर लो यहीं चेंज.

फिर मैंने हंसते हुए आंटी की तरफ देखा और अपने पजामे को नीचे खींचकर उतारने लगा. मैं ये देख रहा था कि आंटी की नज़रें मेरे पजामे पर मेरे लौड़े पर ही जमी थीं.

मैंने धीरे धीरे करके पूरा पजामा उतार दिया और अंडरवियर में खड़ा हो गया. आंटी के सामने होने की वजह से मैं कब से उनके बारे में सोच रहा था, इसीलिए मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था. उधर आंटी भी मेरे खड़े लंड को देख रही थीं.

फिर मैंने आंटी के हाथ से तौलिया लिया और उसे पहन कर बैठ गया. आंटी की नजर मेरे ऊपर ही जमी थीं.

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