दोस्त की बहन की हवस पूरी की

दोस्तो! मेरा नाम दीपक है, मैं 26 साल का हूँ. मेरी लम्बाई 6 फीट और 1 इंच है. मैं देखने में काफी गोरा हूं और मेरी लम्बाई की वजह से मेरी पर्सनेलिटी भी अच्छी दिखाई देती है.
मेरी पिछली कहानी थी: बहन की चुदासी सहेली को चोदा
काफी समय से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी अन्तर्वासना के प्यारे पाठकों के लिए एक और नयी कहानी लिखूं और एक दिन मैं लिखने बैठ गया. दोस्तो, यह कहानी मेरे दोस्त की बहन सुलेखा की है. गोपनीयता के लिए मैंने यहां पर उसका नाम बदल दिया है. सुलेखा की उम्र 24 साल के करीब है. वह दिखने में बहुत ही सुंदर है.
उसके कपड़े पहनने का स्टाइल भी गजब का है. उसके कपड़े हमेशा ही स्टाइलिश होते हैं और उसके कपड़ों में से उसके चूचों का उभार अलग से ही दिखाई देता रहता है.

उसके फिगर की बात करूँ तो वह 34-28-36 का है. मुझे उसके बारे में सब कुछ पता है. उसका एक बॉयफ्रेंड भी है जिसके साथ वह कई बार अपनी चूत भी चुदवा चुकी है.

जब भी मैं उसके घर जाता था तो वह मुझे भी लाइन देने लगती थी. उसने आज तक मुझे कभी भी भैया कहकर नहीं बुलाया है. वह हमेशा ही मुझे मेरे नाम से बुलाती है. उसका यह अंदाज़ मुझे भी बहुत अच्छा लगता है. वह हमेशा मुझे देखकर एक स्माइल देने लगती थी जिसके कारण मेरा विश्वास और भी गहरा हो जाता था कि वह भी मुझे पसंद करती थी. लेकिन उसने कभी अपने मुंह से इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा.

एक बार की बात है कि जब मैं अपने दोस्त के घर पर गया हुआ था. उस दिन सुलेखा ने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था. टॉप ऐसा था कि उसके चूचों की दरार अलग ही झलक रही थी. जब वह मेरे पास पानी लेकर आई तो मुझे झुककर पानी का गिलास पकड़ाने लगी. झुकने के कारण मुझे उसके टॉप के अंदर से उसकी लाल रंग की ब्रा दिखाई दे गई.
मैंने उसकी ब्रा को देखा तो वह मुझे देखकर मुस्कराने लगी. उसकी इस मुस्कान का मतलब मुझे यहां पर बताने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि जब लड़की सामने से खुद ही मुस्कराने लगे तो पता लग ही जाता है कि उसकी इस मुस्कान के पीछे उसके दिल में क्या चल रहा होता है.
मैं भी उसकी इस मुस्कान को देखकर समझ गया था कि वह मुझसे क्या चाहती है.
लेकिन उस दिन मैंने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की. न ही सुलेखा ने उसके बाद कोई ऐसी हरकत की.

फिर एक दिन मेरा दोस्त मेरी आंटी यानि कि अपनी माँ को नानी के घर पर लेकर गया हुआ था. सुलेखा के पापा भी काम से बाहर गए हुए थे. उस दिन सुलेखा ने मुझे खुद फोन करके घर पर बुला लिया. फोन पर मैंने पूछा तो उसने बताया कि उसको कुछ काम है. साथ में ही उसने मुझे पानी पूरी लाने के लिए भी कह दिया.

मैं उसके कहे मुताबिक जब पानी पूरी लेकर उसके घर पर पहुंचा तो मैं उसे देखता ही रह गया. उसने चमकीला सा लाल रंग का टॉप पहना हुआ था जिसके अंदर उसके चूचे साफ-साफ दिखाई दे रहे थे. टॉप के नीचे उसने एक निक्कर पहनी हुई थी. निक्कर के नीचे उसकी गोरी जांघें साफ-साफ चमक रही थीं. मैं तो उसे देखता ही रह गया. मैं दरवाजे पर खड़ा ही था कि उसने मुझे अंदर आने के लिए कह दिया.

मेरे अन्दर जाते ही उसने दरवाज़े को लॉक कर दिया और वह मेरे लिए जूस लेकर आ गई. जब वह झुक कर मुझे जूस का गिलास देने लगी तो उसके टॉप के अंदर लटक रहे उसके चूचे मुझे साफ-साफ दिखाई दे गए. मैं उसके चूचों को घूर रहा था तो उसने मुझे एक शरारत भरी स्माइल दी और मेरे सामने ही बैठ गई.
बैठने के बाद जब मैंने जूस पी लिया तो उसने पूछा कि पानी पूरी लाए हो या नहीं.

मैंने पॉलीबैग को उसके हाथ में पकड़ा दिया जिसे लेकर वह किचन की तरफ चली गई. उसके बाद वह पानी पूरी को प्लेट में डालकर ले आई. वह मेरे सामने बैठकर ही खाने लगी.
मैंने उसे देख रहा था. फिर अचानक से एक गोल गप्पा उसके टॉप पर गिर गया. या फिर यूं कहें कि उसने जान-बूझकर वह गोल-गप्पा अपने टॉप पर गिरा लिया था. वह मेरे सामने ही गंदे हो चुके टॉप को साइड में खिसका कर साफ करने लगी. उसका चूचा मुझे दिखाई दे रहा था. साथ ही साथ वह मुझे भी देख रही थी कि मैं उसकी हरकतें कितनी ध्यान से देख रहा हूँ.

उसने कहा- क्या देख रहे हो?
मैंने बहाना बनाते हुए कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही.
फिर वह खुद ही उठकर मेरे पास आई और बोली- ऐसे दूर से क्यों देख रहे हो. छूकर ही देख लो न.
मैंने कहा- तुम पागल हो गई हो क्या?
वह बोली- हां, मैं तुम्हारे प्यार में पागल हो गई हूँ … और तुम्हें पाना चाहती हूँ.

इतना कहकर उसने मुझे धक्का देकर सोफे पर नीचे गिरा लिया और खुद मेरे ऊपर आ गई. वह पागलों की तरह मुझे चूसने और चाटने लगी. सुलेखा कभी मेरे गालों को चूम रही थी तो कभी मेरे होंठों को. कभी मेरी गर्दन को चाट लेती थी तो कभी फिर से होंठों को चूस देती.
वह बोली- दीपक, तुम भी मुझे प्यार करो न प्लीज … मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.

मेरा लंड भी उसकी ऐसी हरकतों के कारण पहले ही उसे चोदने के लिए तड़प उठा था. फिर जब वह मेरे ऊपर से उठी तो मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और उसके बेडरूम में ले जाकर उसके बेड पर पटक दिया. मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी और उसके ऊपर लेटकर उसको बेतहाशा चूमने और चूसने लगा. सुलेखा मुझे अपनी तरफ खींचने लगी और मैं उसके होंठों को ज़ोर से चूसने लगा. वह मेरे सिर के बाल पकड़ कर बार-बार मुझे अपनी तरफ खींचने की कोशिश करती हुई यह जता रही थी कि वह सेक्स की कितनी प्यासी है. उसके नाखून मेरी पीठ पर नोंचने लगे थे.

फिर मैंने अपना एक हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया और उसके चूचों को दबाने लगा. उसके मस्त चूचे दबाकर मुझे सेक्स का नशा चढ़ने लगा. मैं उसके चूचों को पूरा ज़ोर लगाकर दबा रहा था जिससे उसके जवान चूचे जल्दी ही तनकर टाइट हो गए थे और उसके मुंह से कामुक आवाज़ें निकलने लगी थीं.

मैं धीरे-धीरे उसके जिस्म को चूमता हुआ नीचे की तरफ बढ़ने लगा और उसकी निक्कर को खोल दिया. उसने निक्कर के नीचे नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो पहले से पानी छोड़ रही चूत पर रगड़ खाकर गीली होने लगी थी. फिर मैंने उसकी पैंटी को नीचे खींच दिया तो मैं उसकी चूत को देखता ही रह गया. उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था. बिल्कुल साफ बाल रहित चूत के दर्शन करके मेरा तो सिर चकराने लगा.
मुझे लग रहा था कि उसने अपनी चूत को आज ही साफ किया है.

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