भाभी की चुदाई ने गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप कराया-1

पढ़ाई के लिए मैंने कमरा किराये पर लिया. मकान मालकिन भाभी मस्त माल थी. एक बार भैया कुछ दिनों के लिए बाहर गए तो मुझे ख्याल रखने को कह गए. भाभी ने मुझे कैसे पटाया?

दोस्तो, मैं किशोर आपसे मुखातिब हूँ. इससे पहले कि मैं अपनी सेक्स कहानी आप सबसे शेयर करूं, मैं आप सबको अपने बारे में बता देना चाहता हूँ. मैं भिलाई का रहने वाला हूं और इंजीनियरिंग का स्टूडेंट हूं. वैसे तो मेरा घर भिलाई से ज़्यादा दूर नहीं है पर मैं एक पीजी में रहता हूं जो कॉलेज के पास ही है.

अब आप सोच रहे होंगे कि मैं ये सब आपको क्यों बता रहा हूं. धैर्य रखिए . आगे इस गर्म कहानी में सब चीज़ें आपके सामने एक एक करके आती जाएंगी.

वैसे तो कहानी के शीर्षक से ही आपको कुछ कुछ पता लग गया होगा कि यह कहानी कहां जाने वाली है.

जब मैं यह कहानी लिख रहा हूं उससे पांच मिनट पहले ही भाभी के पति घर आए थे.

उफ्फ भाभी . जब भी भाभी का नाम ज़ुबान पर आता है, तो दिल में अलग ही हलचल मच जाती है.

पांच मिनट पहले ही उन्होंने मुझे अपने हाथ की कड़क चाय पिलाई थी. चाय देने के बाद भाभी आटा गूंथ रही थीं. किचन के दूसरी ओर मैं खड़ा होकर उनसे बात कर रहा था.

मैं- भाभी, आज चाय कुछ अलग लग सी क्यों रही है.
भाभी- अरे . आज शक्कर कम पड़ गई क्या?
मैंने पास जाकर उनके कान में कहा- भाभी शक्कर तो ठीक है, बस किसी और चीज़ की कमी रह गई है.
भाभी शरमाते हुए बोलीं- क्या?
मैंने उनकी कमर पकड़ते हुए कहा- इसमें आज आपके प्यार की चाशनी कम दिख रही है.
भाभी ने मुझे धकेलते हुए कहा- जल्दी हटो . लगता है तुम्हारे भैया आ गए हैं . चलो भागो जल्दी से अपने कमरे में.

मैं उनके पास से जल्दी से हटता हुआ बोला- बाय भाभी.
भाभी- बाय किशू.

मेरा कमरा ऊपर था, तो मैं भाग कर ऊपर आ गया. आपकी जानकारी के लिए मैं आपको बता दूं कि भैया एक ठेकेदार हैं और उनका ज़्यादातर समय अपना बिजनेस सम्भालने में ही चला जाता है. वे कभी देर शाम या रात को ही घर आ पाते हैं. वैसे तो यह सिलसिला पहले ठीक था, जब उनकी एक दुकान थी. घर पर इनकी मां भी रहती थीं, पर जब उनका एक्सीडेंट हुआ, तो वह भी चल बसीं . और उनके इलाज में भैया को अपनी दुकान बेचनी पड़ी. तब से वे उदास और थके हुए रहते हैं.

पर उससे मुझे क्या. भैया को अपनी शादीशुदा ज़िंदगी पर ध्यान देना नहीं होता है, इसलिए मुझे ही भाभी को खुश रखना पड़ता है. शादी के बाद उनकी शारीरिक ज़रूरतें मैंने ही तो पूरी की हैं.

वैसे भाभी दिखने में बहुत सुन्दर हैं. कोई भी नहीं कहेगा कि उनकी शादी हो चुकी है. आज भी वे कॉलेज की कन्या लगती हैं. उनका दूध सा गोरा बदन, बड़े . पर कसे हुए मम्मे और वो पतली कमर ओए होए . दिल पर मानो छुरियां चल जाती हैं. उनकी मस्त थिरकती हुई गांड . आह ऐसी लगती है कि बस अभी पकड़ कर दबा दूं.

जिस दिन भाभी साड़ी में दिख गईं . उस दिन तो बिना लंड मुठियाए रह नहीं पाता हूँ. मैंने उन्हें साड़ी में खूब चोदा है. आए दिन वे मेरे सामने नई नई लायन्जरी ट्राई करती रहती हैं और इठला कर मुझसे पूछती हैं कि इसमें मैं कैसी लग रही हूँ.

और हर बार की तरह मैं उन्हें अपने खड़े लंड से हां में जवाब देता हूं. बस हम फिर से चुदाई में लग जाते हैं.

आज भी वह पल याद करके लंड हिलाने का मन करता है, जब मैंने भाभी को पहली बार चोदा था. ये बात फर्स्ट इयर की है, जब मैं नया नया कॉलेज में आया था. घर थोड़ी दूर होने के कारण मैं एक कमरा ढूँढ रहा था, ताकि आने जाने में भी दिक्कत ना हो और अपनी गर्लफ्रेंड से भी मिलना होता रहे.

जी हां मेरी स्कूल के समय से गर्लफ्रेंड भी थी. वो हॉस्टल में रहती थी और मैं उसे अपने कमरे लाना चाहता था. बड़ा खून पसीना एक करने के बाद मुझे एक कमरा मिला. कमरा थोड़ा महंगा ज़रूर था, पर अच्छी जगह था. घर के मालिक को देखने के बाद तो मना करना पाप समान समझो.

पहली बार जब मैंने भाभी को देखा, तो सच में समय स्लो मोशन में ऐसे चलने लग गया था मानो मेरे सामने एक अप्सरा ही प्रकट हो गयी हो.

भाभी हाफ स्लीव्स वाले नाइट गाउन में थीं और ऊपर दुपट्टा डाल रखा था. बात तो वैसे मेरी भैया से हुई थी. मैंने उन्हें बताया कि मैं स्कूल टॉपर था और मेरा दाखिला भी स्कॉलरशिप में हुआ है. पैसे बचाने के लिए और एक शांत माहौल में पढ़ने के लिए मैं यह कमरा ले रहा हूं.

वैसे मकान मालकिन भाभी को देख कर मेरे मन में तो कुछ और ही शरारती ख्याल घूम रहे थे.

भैया ने बताया कि उन्हें भी कोई चाहिए था, जो घर पर रहे तो भाभी को सेफ फील हो.

मैंने एक पल भी देरी ना करते हुए हां बोल दिया और उनकी गैरमौजूदगी में भाभी का ख्याल रखने का वादा भी किया. जिस समय मैंने भैया से हामी भरी थी, उस समय मैंने एक बार भाभी की तरफ भी निगाह की थी और मुझे बड़ा अच्छा लगा था क्योंकि भाभी ने मेरी हामी पर अपनी क्यूट सी स्माइल भी दी थी.

बस फिर मैं अगले ही दिन रूम पर शिफ्ट हो गया. अब मुझे अपनी जवानी के दिन आगे नज़र आ रहे थे.

मेरा कमरा घर की पहली मंज़िल पर था, जिस पर जाने का रास्ता घर के अन्दर और बाहर दोनों से था. बाहर जाते वक़्त दिख जाता था कि घर पर लोग क्या कर रहे हैं. भाभी हमेशा लोवर और टी-शर्ट में रहती थीं. आख़िर वो अकेली ही रहती थीं तो कौन उनसे कुछ बोलने वाला था.

मेरे आने से पहले तो भाभी को दिन भर मोबाइल या टीवी देखकर ही समय काटना पड़ता था. पर मेरे आने के बाद वो थोड़ी खुश हो गई थीं. हमारी थोड़ी बहुत बातें होनी शुरू हो गयी थीं. नाश्ता भी मैं घर पर ही करके जाता था. भैया 9:30 पर ही घर से चले जाते थे और मेरा कॉलेज दस बजे रहता था, तो हम आधे घंटे ऐसे ही बातें कर लेते थे.

दिन व दिन हमारी दोस्ती होने लगी. उन्हें मैं सुबह गुडमॉर्निंग विश किया करता था और वो भी मुझे प्यारी सी स्माइल देकर मेरा दिन बना देती थीं.

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