वासना अंधी होती है-2

मैंने नहा धोकर तैयार होकर 11 बजने से 5 मिनट पहले गाड़ी निकाली और सलोनी को लेने चल पड़ा।

मैं सोच रहा था कि जिस औरत को मैंने आज तक भाव नहीं दिया, ढंग से उसकी तरफ कभी देखा भी नहीं, आज मुझे उसकी चूत मारने के लिए चाव चढ़ा हुआ है।

खैर मैं उसे चुपके से उठा लाया और घर आ कर गाड़ी खड़ी करी. हम दोनों अपने ड्राइंग रूम में गए।
मैं उसके लिए गिलास में कोल्ड ड्रिंक डाल कर लाया।
उसके चेहरे पर, खुशी, घबराहट, जिज्ञासा सब कुछ झलक रहा था।

मैंने उसको कोल्ड ड्रिंक पीते देख कर कहा- यहाँ इतनी दूर क्यों बैठी हो, इधर पास हो कर बैठो।
वो शर्मा गई.
तो मैंने उसकी बाजू पकड़ कर खींची और उसको अपने से सटा लिया।

मैंने कहा- इतनी चुप क्यों हो? पहले तो इतना बोलती हो?
वो बोली- क्या कहूँ?
मैंने कहा- अगर कुछ नहीं कहना तो मेरी गोद में आ जाओ।
वो शरारत से बोली- अच्छा, यूं ही?

मैंने उसकी बाजू पकड़ कर खींची तो वो खुद ही उठ कर मेरी गोद में बैठ गई. मैंने उसे अपनी बाजू का सहारा देकर अपनी गोद में ही लेटा लिया। दोनों के गिलास टेबल पर रख दिये।

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथ से पकड़ा और ध्यान से देखा।
सुंदर न होते हुये भी वो मुझे प्यारी लग रही थी।

मैंने उसके माथे, गाल पर उंगली फेरी तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली. आँखें मींचे वो मेरी गोद में लेटी थी और मैं उसके चेहरे से होते हुये उसके सारे बदन को छूकर, सहला कर देख रहा था। मुझे
साली की चुदाई की कोई जल्दी नहीं थी मुझे, मैं तो सिर्फ उसके जिस्म ऊंचाइयों, गहराइयों और गोलाइयों को छू कर अपने मन को तसल्ली दे रहा था।
वो भी किसी कमसिन की तरह लरज़ रही थी।

मैंने उसके होंठ को छुआ, और फिर उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठों में ले लिया.
उसकी लिपस्टिक का टेस्ट मेरे मुंह में आया मगर मैं उसके होंठ को चूसने लगा।
वो भी मुझसे लिपट गई।

काफी देर हम दोनों ने एक दूसरे के होंठों को चूसा।
फिर मैंने कहा- सलोनी मेरी जान, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।
वो बोली- उस दिन देख तो लिया था।
मैंने कहा- वो तो तुम्हारे घर में था, यहाँ मेरे घर में मुझे नंगी हो कर दिखाओ।

वो नखरे से बोली- नहीं, मैं नहीं, आप गंदे हो।
मैंने कहा- क्यूँ? मैं क्यूँ गंदा हूँ?
वो बोली- आप गंदी बातें करते हो।

मैंने कहा- नहीं मेरी जान, मैं गंदी बात नहीं करता, प्यार में ये सब करते हैं।
वो बड़े भोलेपन से बोली- अच्छा जी, पर कैसे करते हैं?
मैंने कहा- सब बता दूँगा, मेरी जान अगर तुम मेरी हर बात मानो। मेरा बाबू मेरी बात मानेगा?

उसने किसी बच्चे की तरह से अपना सर हाँ में हिलाया।
तो मैंने उसे उठा कर खड़ा किया और फिर मैंने उसकी कमीज़ को पकड़ कर ऊपर को उठाया, उसने भी मेरा साथ दिया.

पहले कमीज़ उतारी, फिर ब्रा खोल कर उतारी, फिर सलवार का नाड़ा खोला और सलवार उतार कर उसे बिल्कुल नंगी कर दिया।
एक एक करते उसके कपड़े उतारते हुये उसने मेरा पूरा साथ दिया, जैसे उसके अंदर भी यह चाहत हो कि ‘कर दो मुझे नंगी और देखो मेरे सेक्सी जिस्म को।’

उसे नंगी करके मैंने अपनी कपड़े भी उतारे।
उसके सामने जब मैं कपड़े उतार रहा था तो वो भी बड़ी उत्सुकता से मुझे नंगा होते हुए देख रही थी।

टीशर्ट और जीन्स के बाद मैंने जब अपनी चड्डी को उतरना चाहा तो उसने मुझे रोका- सुनिए, थोड़ा रुक जाइए!
मैंने पूछा- क्यों?
“आपने इतने प्यार से मेरे कपड़े उतारे, मुझे भी मौका दीजिये कि मैं भी अपनी मर्ज़ी से कुछ कर सकूँ।”

मैं रुक गया तो वो मेरे पास आई और मेरे सामने बैठ गई।

चड्डी में मेरे तने हुए लंड का पूरा आकार बना हुआ था. उसने पहले चड्डी के ऊपर से ही मेरे लंड को छूकर देखा।
उसके चेहरे पर एक बड़ी आश्चर्य वाली मुस्कान थी क्योंकि उससे प्रेम प्यार करते मेरा लंड भी पूरा अकड़ चुका था।

मेरे तने हुये लंड को देख कर वो बोली- आप तो पूरे तैयार हुए फिरते हो।
मैंने कहा- हाँ तैयार तो रहना पड़ता है.
और उसके बाद उसने अपने हाथों से मेरी चड्डी नीचे को सरका दी और मेरा कड़क लंड झूम कर बाहर निकला।

अपनी चड्डी उतर जाने के बाद मैंने आगे बढ़ कर उसे उठाया और अपने सामने खड़ी करके एकदम से उसे अपने गले से लगाया. और जानबूझ कर अपना कड़क लंड उसके पेट पर ज़ोर से टकराया। वो बिलबिलाई- हाय . कितना सख्त है पत्थर के जैसे! कितनी ज़ोर से मारा, इतना दर्द हुआ।

मैंने अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा कर कहा- अब जब ये तेरी भोंसड़ी में घुसेगा, तब देखना!
उसने मेरे सीने पर हल्का सा मुक्का मार कर कहा- छी, गंदे ऐसे नहीं कहते।
मैंने कहा- अब जैसे भी कहते हों! अब कहने सुनने का वक्त गया, अब कुछ करने के वक्त है.

कहते हुये मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया तो उसने भी अपनी बांहें मेरे गले में डाल दी।

गोद में उठा कर मैं उसे अपने बेडरूम में ले गया और लेजा कर बेड पर पटक दिया.

साली की चुदाई कहानी जारी रहेगी.
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