गाँव की देसी चूत शहर में चुदी-2

मेरी देसी सेक्सी कहानी में पढ़ें कि दीदी जीजा की चुदाई देखकर मेरा मन भी ब्वॉयफ्रेंड के लंड लेने को करने लगा. पर डर भी था. मैंने अपनी कुंवारी चूत में पहली बार कैसे लंड लिया.

मैं डिम्पल अपनी देसी सेक्सी कहानी आगे बढ़ा रही हूं. अपनी रियल हिन्दी सेक्स स्टोरी के पहले भाग
गाँव की देसी चूत शहर में चुदी-1
में मैंने आपको बताया था कि मैं पहली बार गांव से बाहर पटना शहर में कॉलेज की पढ़ाई के लिए गयी थी.

कॉलेज में मेरी दोस्ती सुमित नाम के एक लड़के से हुई और एक दिन वो मुझे घुमाने के लिए चिड़ियाघर में ले गया. उस दिन पहली बार मैंने किसी लड़के को गाल पर किस दी थी.

उस दिन मैंने फर्स्ट टाइम किसी लड़के लंड को उसकी पैंट में खड़ा हुआ देखा था. इस तरह से सुमित के साथ मेरी दोस्ती बढ़ती गई और हम दोनों ब्वॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बन गये.

सुमित मुझे रूम पर बुलाने लगा लेकिन मैं मना कर देती थी. फिर एक दिन मैं अपनी बड़ी दीदी के घर गयी हुई थी जो पटना में ही रहती थी. वहां पर रात मैंने दीदी और जीजा की चुदाई देखी. मैंने जीजू का खड़ा लंड अपनी दीदी की चूत में जाते हुए देखा तो मेरी देसी सेक्सी चूत भी गीली होने लगी.

मैं अपने रूम में आई और मेरे बदन में पसीना आ गया था. मैं सुमित के लंड के बारे में सोचने लगी. अब मेरी चूत में भी सुरसुरी हो रही थी. मैंने सोचा कि सुमित बहुत दिनों से मुझे अपने रूम पर आने के लिए कह रहा है.

मुझे एक बार ट्राई करके देखना चाहिए कि सेक्स में ऐसा क्या मजा आता है. मैं अपने ब्वॉयफ्रंड का लंड पहले ही देख चुकी थी और आज मैंने जीजू का लिंग भी देख लिया था. जीजू का लंड देखने के बाद और दीदी के चेहरे पर वो मजा देखने के बाद अब मैं भी सोचने लगी थी कि क्यों न एक बार मैं भी दीदी की तरह ही लंड को चूत में लेने का मजा लूं.

अगले दिन मैंने सुमित को फोन किया. फिर मैंने सुमित से हां कह दी और बोली कि दो दिन के बाद मैं तुम्हारे रूम पर आऊंगी. ये सुनकर सुमित बहुत खुश हुआ और खुशी से झूम उठा. मैं भी काफी एक्साइटेड हो रही थी.

12 फरवरी को मैंने सुमित को फोन किया था. 13 फरवरी का दिन भी मेरा बेचैनी में ही निकला. उस रात तो मुझे नींद भी नहीं आई. सोच रही थी कि पहला सेक्स कैसे होगा. मैं पहली बार लंड का मजा लूंगी.

चूत में लंड लेने में कैसा दर्द होता है? कैसा मजा आता है? किसी लड़के के होंठों को चूसने में कैसा रस होता है? ये सब बातें मेरे दिमाग में पहली बार घूम रही थीं.

साथ ही मुझे डर भी लग रहा था कि न जाने कितना दर्द होगा. अगर चूत में वीर्य गिरने से बच्चा ठहर गया और कुछ गड़बड़ हो गयी तो मैं अपने घरवालों को क्या मुंह दिखाऊँगी? उन्होंने कितने विश्वास के साथ मुझे यहां पर शहर में पढ़ाई करने के लिए भेजा हुआ है.

मगर फिर जीजा और दीदी की चुदाई याद आ गयी. कैसे दीदी मेरे जीजू के लंड को चूत में ले रही थी. अपनी गांड को उछाल उछाल कर जीजा का साथ दे रही थी. चूत में लंड लेने से इतना मजा आता है तो फिर मैं भी क्यों न एक बार ऐसा ही मजा लूं.

इन्हीं ख्यालों में सुबह हो गयी थी. 14 फरवरी का दिन था और मैं सुमित से मिलने के लिए काफी उत्सुक हो रही थी.

उस दिन जब मैं नहाने के लिए बाथरूम में गयी तो मैंने अपने कपड़े उतारे. अपनी ब्रा में कैद चूचियों को मैंने ऊपर से ही छूकर देखा. अपनी चूचियों को छूने से ही आज मुझे सिरहन सी हो रही थी. मैंने अपनी ब्रा को खोल दिया और चूचियों को हाथ में लेकर दबा कर देखा. मुझे मजा आया.

फिर मैंने अपनी गांड को शीशे में देखा. मेरी गोरी सी गांड पर मेरी काले रंग की पैंटी बहुत सेक्सी लग रही थी. मैंने अपने चूतड़ों को सहलाया और दबाया, फिर मैंने धीरे अपनी चूत के ऊपर से पैंटी को हटा दिया.

पैंटी निकाल मैंने एक तरफ डाल दी. अपने नंगे बदन को मैं गौर से देखने लगी. मैं जवान हो गयी थी. मेरे उभरते अंग कह रहे थे कि अब हमको इस्तेमाल करने का समय आ गया है. ऐसा लग रहा था जैसे कि अपने ही अंगों से बात कर रही हूं.

फिर मैंने शॉवर ऑन किया और उसका पानी मेरी चूचियों पर गिरने लगा. मैं शॉवर के नीचे खड़ी होकर अपनी चूचियों को मसाज देने लगी. मेरी चूचियों के निप्पल उठ गये और कड़े हो गये.

सुमित के साथ सालभर रिलेशनशिप में रहने के चलते उसने मेरी चूचियों को इतनी बार छेड़ा और दबाया था कि मेरी चूचियां अब पहले के मुकाबले काफी बढ़ गयी थीं. जहां पहले मेरी चूची अमरूद के आकार की हुआ करती थी, अब वो मोटी सेब की तरह बिल्कुल गोल हो गयी थी और मेरी छाती पर तनी हुई रहती थी.

फिर मैंने अपनी कुंवारी चूत को भी नहलाया. आज चूत के उद्घाटन की बारी थी. इसलिए उसको बहुत से प्यार से मसाज देकर मैंने उसको साफ किया. नहाने के बाद मैं बाहर आई और एक हल्का सा पर्फ्यूम लगा लिया.

उसके बाद कपड़े पहन कर मैं तैयार हो गयी. मैं सज-धज कर अब सुमित से मिलने के लिए तैयार थी मैंने एक टाइट सी कुर्ती और चुस्त पजामी पहनी हुई थी. मेरी कुर्ती का गला काफी खुला हुआ था. उसमें से मेरे बूब्स का उभार भी साफ दिखाई दे रहा था.

मेरी पजामी लैगिंग्स वाली थी जो एकदम से चुस्त थी. उसने मेरे दोनों चूतड़ों को कस कर जकड़ा हुआ था. मेरी गांड उठ कर बाहर निकलने को हो रही थी.

उसके बाद मैंने सुमित को फोन किया कि मैं अपने यहां से निकल रही हूं. फिर वो मुझे तय समय पर लेने के लिए आ पहुंचा. वहां से रिसीव करने के बाद सुमित मुझे अपने रूम पर ले गया.

उस वक्त उसके रूम में कोई नहीं था. उसके दोस्त घूमने के लिए गये हुए थे. दरवाजा लगाते ही वो मुझसे लिपट गया और सीधा अपने होंठों को मेरे होंठों पर कस दिया और मुझे चूसने लगा.

मैंने उसको हटाते हुए कहा- थोड़ा सा तो सब्र रखो.
वो बोला- इतने दिन से सब्र ही कर रहा हूं. अब और सब्र नहीं होगा मुझसे.
मैं बोली- अच्छा लेकिन पहले दरवाजा तो ठीक से लॉक कर दो.

वो जल्दी से उठा और दरवाजा लॉक करके आ गया.
वो बोला- अब मैं और नहीं रुक सकता हूं. तुमने मुझे बहुत तड़पाया है डिम्पल है, अब और सब्र का इम्तेहान मत लो. कहते हुए सुमित ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मुझसे लिपटने लगा.

सुमित मेरे होंठों को चूसने लगा और अब मैं भी उसकी बेचैनी को समझते हुए उसका साथ देने लगी. पहली बार मेरे होंठों पर किसी लड़के के होंठों का स्पर्श मिला था. मुझे भी सुमित के होंठों को चूसने में मजा आने लगा और मैं उसकी लार को अपने मुंह में खींचने लगी.

किस करते करते उसके हाथ मेरे चूतड़ों पर आकर मेरे चूतड़ों को दबाने लगे थे. वो जोर जोर से मेरी गांड को भींच रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे बदन में घुस जाना चाहता हो. मैं भी उसके बदन से चिपक रही थी.

धीरे धीरे फिर उसने मेरी कुर्ती को भी निकाल दिया. अब मैं ऊपर से केवल ब्रा में थी. वो मुझ पर टूट पड़ा. मुझे जहां-तहां किस करने लगा. वो जैसे पागल हो गया था. कभी मेरी गर्दन को चूम रहा था तो कभी कानों पर दांतों से काट रहा था. कभी मेरे कंधे पर चूम रहा था तो कभी मेरी वक्षरेखा में मुंह दे देता था.

अब उसका मुंह मेरी ब्रा में जा लगा. वो मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को किस करने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी ब्रा को खाना चाहता हो.
मैंने कहा- क्या कर रहे हो? आराम से करो यार.
वो बोला- आज मुझसे कंट्रोल नहीं होगा. मैं कब से तुम्हारे लिये तड़प रहा हूं.

सुमित मेरी ब्रा को चाट रहा था और मेरी सांसें भारी होने लगी थी. फिर उसने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरी टाइट पाजमी के ऊपर से ही मेरी जांघों के बीच में चूत पर किस करने लगा. एक दो बार किस करने के बाद वो मेरी पजामी को खींचने लगा.

मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया. शर्म के मारे मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं.
वो बोला- क्या हुआ?
मैं बोली- तुम अपनी आंखें बंद करो, मुझे शर्म आ रही है.

वो बोला- चलो भी डिम्पल, हम इतने दिन से ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड हैं, अब कैसी शर्म?
मैंने कहा- नहीं, तुम लाइट बंद कर लो फिर.
वो बोला- नहीं, मैं तुम्हारे जिस्म को देखना चाहता हूं जी भर कर. लाइट तो मैं बंद नहीं करूंगा.

फिर वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे होंठों पर लिप लॉक करके मुझे चूसने लगा. मैं भी उसकी पीठ को सहलाने लगी. मुझे उसकी जांघों के बीच से एक सख्त सी चीज अपनी जांघों पर चुभती हुई महसूस हो रही थी. उसका लिंग पूरे तनाव में था और मैं भी उत्तेजित हो रही थी उसके छूने से.

उसके बाद उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरी चूची नंगी हो गयीं. वो मेरी चूचियों को पीने लगा. मैं भी मदहोश होने लगी. वो मेरे निप्पल को खींच-खींच कर चूस रहा था. मेरे पूरे बदन में करंट सा पैदा हो रहा था.

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